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35000 रुपये के निवेश पर 1.20 करोड़ रुपये का रिटर्न! सोशल मीडिया पर चर्चा में यह इनवेस्टमेंट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर किसी व्यक्ति ने 109 साल पहले 35000 रुपये का इनवेस्टमेंट किया होगा तो उसकी वैल्यू आज 1 करोड़ रुपये को पार कर गई होगी। यह तब की स्थिति है जब इनवेस्टर को सालाना महज 5.5 प्रतिशत का ही ब्याज मिला हो। चौंकिए मत, मध्य प्रदेश में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। सीहोर के रहने वाले सेठ जुम्मा लाल रूथिया की फर्म सेठ राम कृष्ण जसकरन रूथिया फर्म ने अंग्रेजों को 35000 रुपये का कर्ज दिया था। परिवार के पास इस लोन की कॉपी आज भी है।

5.5% ब्याज पर दिया गया था लोन

सीहोर के सेठ ने यह लोन 5.5 प्रतिशत के सालाना ब्याज पर दिया था। जिसकी वैल्यू आज के समय में 109 साल के बाद 1.20 करोड़ रुपये हो गई है। बता दें, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वहां के डेट मैनेजमेंट ऑफिस आधिकारिक तौर पर रुथिया परिवार से सम्पर्क किया है। परिवार से यूके की सरकार ने पेपर्स मांगे हैं।

परिवार का कहना है कि उन्हें इस लोन पर अभी तक कोई भी भुगतान यूके की सरकार की तरफ से नहीं किया गया है।

क्या सच में मिलेंगे परिवार को 1.20 करोड़ रुपये?

यह अभी तय नहीं है। जुम्मा लाल रूथिया ने उस वक्त पर इंडियन वार लोन में पैसा लगाया था। ना की अंग्रेजी हुकूमत को कोई सीधा लोन दिया था। ऐसे में अब यह देखना होगा कि इंडियन वार लोन के नियम उस वक्त क्या तय किए गए थे। क्या इस लोन का कोई भुगतान पहले हुआ है या नहीं यह भी जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।

अगर 35 हजार रुपये का खरीदा होता सोना

सेठ जुम्मा लाल ने अगर 35 हजार रुपये का सोना 1917 में खरीदे होते तो उसकी वैल्यू आज की तारीख में 28 से 33 करोड़ रुपये के बीच होती। 109 साल पहले सोने का दाम 15 रुपये से 17 रुपये प्रति 10 ग्राम था। जोकि अब 1.40 लाख रुपये से 1.50 लाख रुपये के आस-पास है। बता दें, इस रेट टैग पर 1917 में 35 हजार रुपये में कुल 21.875 किलोग्राम सोना मिल सकता था।

109 साल पुराना कागज

इस चर्चा के बीच एक बार फिर से सोशल मीडिया पर 109 साल पुराना कागज शेयर किया जा रहा है। यह लोन पेपर 4 जून 1917 का है। इस डॉक्यूमेंट पर डब्ल्यूएस डेविस के सिग्नेचर हैं। वह उस समय भोपाल में पॉलिटिकल एजेंट थे। बता दें, सेठ जुम्मा लाल रुथिया का देहांत 1937 में हो गया था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN