Source :- LIVE HINDUSTAN
पिछले 4 दिनों में वेनेजुएला, जापान, अमेरिका और भारत-अफगानिस्तान सहित दुनिया भर में कई शक्तिशाली भूकंप आए। वेनेजुएला में भीषण तबाही से 1,430 मौतें हुईं। वैज्ञानिकों के अनुसार, अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेटों पर आए ये भूकंप आपस में जुड़े नहीं हैं, बल्कि यह महज एक अनोखा संयोग है।
पिछले एक हफ्ते से भी कम समय के भीतर दुनिया के अलग-अलग कोनों से आ रही भूकंप की खबरों ने सबको डरा दिया है। वेनेजुएला में आए विनाशकारी दोहरे भूकंप के झटकों से लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, जापान और उत्तरी कैलिफोर्निया तक- धरती लगातार डोल रही है। इतनी तेजी से बैक-टू-बैकर आए इन भूकंपों ने आम लोगों के जेहन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या ये सभी भूकंप आपस में जुड़े हुए हैं या यह किसी बड़ी तबाही का संकेत है?
वेनेजुएला से शुरू हुआ तबाही का सिलसिला
कांपती धरती का यह खौफनाक मंजर सबसे पहले बुधवार को वेनेजुएला में देखने को मिला। वहां आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भीषण भूकंपों ने चंद पलों में हंसते-खेलते शहरों को मलबे के ढेर में बदल दिया। इस आपदा में अब तक 1,430 लोगों की मौत हो चुकी है।
मलबे के नीचे जिंदगी तलाशने के लिए शुरुआती 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अब वह समय बीत चुका है, जिससे 50,000 लापता लोगों के जिंदा बचने की उम्मीदें बेहद कम हो गई हैं।
थम नहीं रहा झटकों का दौर: दुनिया भर का हाल
वेनेजुएला अभी संभला भी नहीं था कि उसी दिन और उसके बाद दुनिया के अन्य देशों से भी ऐसी ही खबरें आने लगीं:
- उत्तरी कैलिफोर्निया: बुधवार को ही यहां के ग्रामीण इलाके में 5.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।
- जापान: इसके कुछ ही घंटों बाद जापान के उत्तरी तट पर 7.2 तीव्रता का तगड़ा झटका लगा।
- पाकिस्तान: शनिवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 5.5 तीव्रता के भूकंप ने 100 से ज्यादा घरों को तबाह कर दिया और कम से कम 20 लोग घायल हो गए।
- अफगानिस्तान और भारत: बलूचिस्तान के बाद अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया, जिसके झटके पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए।
क्या ये सभी भूकंप आपस में जुड़े हैं?
जब दुनिया भर में एक साथ इतनी आपदाएं आती हैं, तो डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन विज्ञान की मानें तो इस डर के पीछे कोई ‘चेन-रिएक्शन’ या ग्लोबल कनेक्शन नहीं है।
धरती की ऊपरी परत विशाल टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो आपस में टकराती या खिसकती हैं तो भूकंप आते हैं। हालांकि ये सभी भूकंप कुछ ही दिनों के अंतराल पर आए हैं, लेकिन ये बिल्कुल अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर हुए हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भूकंप इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने वाले क्षेत्र के कारण आए हैं। इंडियन प्लेट लगातार उत्तर की ओर दबाव बना रही है, जिससे यह क्षेत्र सबसे ज्यादा भूकंप-संभावित बन चुका है।
दूसरी तरफ, वेनेजुएला उस सीमा पर स्थित है जहां कैरेबियन प्लेट और साउथ अमेरिकन प्लेट आपस में रगड़ खाती हैं।
क्योंकि ये सभी इलाके एक-दूसरे से हजारों किलोमीटर दूर अलग-अलग टेक्टोनिक सिस्टम का हिस्सा हैं, इसलिए ये किसी एक बड़ी चेन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह अलग-अलग घटनाएं हैं।
एक्सपर्ट्स की राय: “यह महज एक अनोखा इत्तेफाक”
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर विलियम बार्नहार्ट ने ‘द गार्डियन’ अखबार से बात करते हुए इस टाइमिंग को महज एक “संयोग” बताया है।
उन्होंने कहा, “भूकंप पूरी दुनिया में हर दिन आते हैं, लेकिन ज्यादातर इंसानी बस्तियों से दूर होते हैं। पिछला हफ्ता थोड़ा अजीब और अनोखा था क्योंकि कुछ काफी बड़े भूकंप ऐसी जगहों पर आए जहां लोगों ने उन्हें सीधे तौर पर महसूस किया। यह सच है कि एक बहुत बड़ा भूकंप दुनिया के दूसरे हिस्सों में छोटे झटके पैदा कर सकता है, लेकिन इतनी दूरी पर यह सिर्फ एक इत्तेफाक है।”
वहीं UCLA के प्रोफेसर मार्टिन हडसन ने भी माना कि हजारों मील की दूरी पर इस तरह एक के बाद एक भूकंपों का आना बेहद असामान्य बात है, लेकिन यह कोई वैश्विक तबाही का संकेत नहीं है।
इसलिए, धरती भले ही डरावने तरीके से डोल रही हो, लेकिन किसी महा-विनाश की अफवाहों पर ध्यान न दें, यह महज प्रकृति की प्लेटों की अपनी-अपनी हलचल का एक संयोग है।
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