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50 साल बाद सरकारिया आयोग का मुद्दा तमिलनाडु विधानसभा में फिर उठा

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सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में उस समय हंगामा मच गया, जब मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने Sarkaria Commission रिपोर्ट और हालिया ED निष्कर्षों से जुड़े एक दशक पुराने आरोपों को फिर से उठाते हुए DMK पर व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। सुबह 9:33 बजे शुरू हुए अपने तीखे संबोधन में Vijay ने DMK नेताओं की तीन पीढ़ियों—M. Karunanidhi, M.K. Stalin, Udhayanidhi Stalin और पूर्व केंद्रीय मंत्री Murasoli Maran—पर निशाना साधते हुए उन पर गहराई तक जड़ जमा चुके भ्रष्ट आचरण में शामिल होने का आरोप लगाया।

## ऐतिहासिक आरोप फिर सुर्खियों में

Vijay ने Veeranam जलापूर्ति योजना की Sarkaria Commission द्वारा की गई जांच के निष्कर्षों को फिर से उठाया। इस योजना की जांच आयोग ने 1970 के दशक में की थी। उनके अनुसार, आयोग की रिपोर्ट में बताया गया था कि Karunanidhi के नेतृत्व वाली सरकार ने कथित तौर पर Murasoli Maran से जुड़े हितों के टकराव के साक्ष्यों के बावजूद Sathyanarayana Brothers कंपनी के पक्ष में निविदाएं निर्देशित की थीं। Vijay ने आगे दावा किया कि DMK ने ठेकेदारों से 2.5% कमीशन की मांग की और रिश्वत का भुगतान ऋण की EMI की तरह किस्तों में—1970 से 1974 के बीच सात भुगतानों में—किया गया।

उल्लेखनीय है कि आयोग ने इस बात पर संदेह जताया था कि Karunanidhi ने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। हालांकि, रिपोर्ट में पक्षपात और प्रशासनिक कदाचार के आरोपों को शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार पाया गया, लेकिन कथित धनराशि स्वीकार करने में उनकी व्यक्तिगत संलिप्तता निर्णायक रूप से स्थापित नहीं की गई।

## ED के हालिया खुलासे और ‘पार्टी फंड’ के आरोप

ऐतिहासिक आरोपों के साथ-साथ Vijay ने Enforcement Directorate (ED) और Directorate of Vigilance and Anti-Corruption (DVAC) के हालिया दस्तावेज भी पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया कि Stalin और उनके बेटे Udhayanidhi सहित नेताओं को DMK के पिछले शासन के दौरान पार्टी फंड संग्रह से जुड़ी योजनाओं से सीधे लाभ मिला।

उन्होंने दावा किया कि पूर्व मंत्री—विशेष रूप से K. N. Nehru और V. Senthilbalaji—पर जिलों में ठेकेदारों, बार मालिकों और अन्य कारोबारियों से रिश्वत वसूलने में शामिल होने के आरोप हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ठेकेदारों से अनुबंध मूल्य का 10% तक “पार्टी फंड” के रूप में भुगतान करने को कहा जाता था, जो EMI चुकाने जैसा था।

## राज्य विधानसभा में हंगामा: विरोध और वॉकआउट

इन आरोपों के तुरंत बाद विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। DMK विधायकों ने विरोध किया और विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin ने जवाब देने का अवसर मांगा। Speaker J.C.D. Prabhakar ने यह मांग खारिज कर दी, जिसके बाद हंगामा बढ़ गया और DMK विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।

Udhayanidhi ने Vijay के भाषण को राजनीतिक छवि और सोशल मीडिया प्रभाव के लिए तैयार किया गया एक सुनियोजित प्रदर्शन बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने कानून-व्यवस्था और हालिया दिनदहाड़े हुई हत्याओं जैसे गंभीर मुद्दों से बचते हुए ऐतिहासिक घोटालों और ED की फाइलों पर ध्यान केंद्रित करना चुना।

## Sarkaria Commission ने वास्तव में क्या पाया

Sarkaria Commission के अनुसार Veeranam मामले में प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

– **पक्षपात और हितों का टकराव**: साक्ष्यों से संकेत मिला कि Karunanidhi ने Sathyanarayana Brothers को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए निविदाएं उनके पक्ष में निर्देशित कीं। Maran और Purushothaman नामक एक ठेकेदार के बीच संबंधों का उल्लेख किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर फैसलों को अनुचित रूप से प्रभावित किया।
– **कथित रिश्वत और चंदा**: 29 लाख रुपये के भुगतान का आरोप लगाया गया, जो कथित तौर पर सात किस्तों में किया गया था। अतिरिक्त आरोपों में Murasoli भवन के निर्माण के लिए लगभग 59,202 रुपये मूल्य की सामग्री बिना किसी भुगतान के उपलब्ध कराना शामिल था।
– **अंतिम फैसले के लिए अपर्याप्त साक्ष्य**: मजबूत संदेह के बावजूद, आयोग ने पाया कि Karunanidhi के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए उपलब्ध साक्ष्य पर्याप्त रूप से पुष्ट नहीं थे। आयोग ने कहा कि सह-साजिशकर्ताओं से मिले साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भौतिक पहलुओं में पुष्टि नहीं हुई थी।

## राजनीतिक दांव और प्रतिक्रियाएं

Vijay का हस्तक्षेप तमिलनाडु विधानसभा के हालिया सत्रों में सबसे आक्रामक विरोधाभासी राजनीतिक वक्तव्यों में से एक है। ऐतिहासिक आरोपों को ताजा ED दावों के साथ जोड़ते हुए उन्होंने DMK को Karunanidhi के नेतृत्व में उसकी जड़ों से लेकर वर्तमान नेतृत्व तक भ्रष्टाचार से परिभाषित पार्टी के रूप में पेश किया।

इसके जवाब में DMK सदस्यों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। उन्होंने उद्धृत ED दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और Vijay की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह अपराध, पुलिस व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। वॉकआउट ने गहरे असंतोष का संकेत दिया, जबकि विपक्ष ने जोर देकर कहा कि विधानसभा की प्राथमिकताएं बयानबाजी नहीं, बल्कि शासन द्वारा तय होनी चाहिए।

## संदर्भ: अब यह क्यों महत्वपूर्ण है

– **ऐतिहासिक संदर्भ**: Veeranam घोटाला 1970 के दशक की शुरुआत का है, जब Karunanidhi मुख्यमंत्री थे। बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच 1976 में राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके बाद Sarkaria Commission की स्थापना की गई।
– **साक्ष्य बनाम अभियोजन**: व्यापक दस्तावेजीकरण के बावजूद, आयोग के निष्कर्षों के आधार पर कोई आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं हुआ, मुख्यतः इसलिए कि साक्ष्यों को अपर्याप्त माना गया था। यह अंतर DMK के बचाव का केंद्रीय आधार बना हुआ है।

## आगे की राह

विधानसभा में हुए इस टकराव ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं:

– क्या राज्य सरकार ED और DVAC के दस्तावेजों के आधार पर कानूनी कार्यवाही शुरू करेगी?
– क्या DMK इन फाइलों का खंडन कर पाएगी या इनके खिलाफ प्रतिप्रमाण पेश करेगी?
– ये राजनीतिक टकराव तमिलनाडु के आगामी विधायी और चुनावी परिदृश्य को किस तरह प्रभावित करेंगे?

राष्ट्रपति शासन एक बार फिर चर्चा का स्थायी प्रतीक बन चुका है और संवैधानिक इतिहास आज की राजनीति को प्रभावित करता जा रहा है। ऐसे में Sarkaria Commission की विरासत केवल अभिलेखीय इतिहास नहीं रह गई है—वह अब भी राजनीतिक रूप से जीवंत है।

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