Source :- LIVE HINDUSTAN
8th Pay Commission: 8वें वित्त आयोग का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। आयोग के पास 18 महीने का समय था। जिसमें से 10 महीने का समय बीत चुका है। अब पे कमीशन के पास 8 महीने का समय और है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इन 10 महीनों में क्या-क्या हुआ?
कई शहरों में हुई मीटिंग (8th Pay Commission next meeting)
पे कमीशन की तरफ से लगातार अलग-अलग शहरों में मीटिंग की जा रही है। 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ में आयोग की मीटिंग थी। उसके पहले चेन्नई और पुडुचेरी में भी पे कमीशन की मीटिंग हो चुकी है। इसके अलावा दिल्ली, लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता, जम्मू में भी आयोग मीटिंग कर चुका है।
अब अगली मीटिंग बेंगलुरू में
8वें वित्त आयोग की अगली मीटिंग बेंगलुरू में 7 और 8 अक्टूबर को है। इसके बाद 8वें पे कमीशन की कुछ अन्य राज्यों में भी मीटिंग प्रस्तावित है।
फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने पर जोर (8th Pay Commission fitment Factor)
लगभग हर एक मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े संगठनों की तरफ से अधिक फिटमेंट फैक्टर रखने की मांग हुई है। कुछ संगठनों ने तो 4 के करीब फिटमेंट फैक्टर की डिमांड 8वें पे कमीशन से की है। बता दें, जितना अधिक फिटमेंट फैक्टर होगा उतना बेसिक पे बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए 2 फिटमेंट फैक्टर आयोग तय करता है तो ऐसे में लेवल एक कर्मचारियों का मिनिमम बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर 36000 रुपये हो जाएगा।
डीए को लेकर भी अलग है डिमांड (8th Pay Commission DA demands list)
कुछ संगठनों ने मांग की है कि कर्मचारियों का डीए जब 25 प्रतिशत तक पहुंचे तो इसे बेसिक पे में मिला दें। मौजूदा समय में ऐसा कोई भी नियम नहीं है। इस समय केंद्रीय कर्मचारियों का बेसिक पे 60 प्रतिशत है। इसके अलावा संगठनों ने आयोग से डिमांड की है कि हर 6 महीने के डाटा के हिसाब से डीए का फैसला हो। यह अभी 12 महीने के औसत को देखा जाता है।
HRA में बढ़ोतरी की भी मांग
संगठनों ने डिमांड की है कि शुरुआती लेवल के कर्मचारियों को अधिक एचआरए दिया। मौजूदा एचआरए उनके लिए दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा शुरुआती लेवल के कर्मचारियों को मिलाकर एक नया लेवल बनाया जाए।
इसके अलावा फैमिली यूनिट को 5 करने की भी मांग लगातार उठ रही है। अब देखना है कि आयोग की तरफ से कितनी डिमांड्स को माना जाता है।
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