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दिल्ली की एक अदालत ने 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज और ठग सुकेश चंद्रशेखर सहित 17 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। 

दिल्ली की एक अदालत ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज एवं 15 अन्य के खिलाफ 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) प्रशांत शर्मा ने कहा कि पहली नजर में आरोपियों के खिलाफ रिकॉर्ड पर पर्याप्त सबूत हैं। इन सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ गंभीर संदेह पैदा होता है। इन पर मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत अपराध का आरोप लगाया जाना चाहिए जो पीएमएलए की धारा 4 के तहत दंडनीय है।

सरकारी अधिकारी बन ठगी

मालूम हो कि चंद्रशेखर को 2017 में दिल्ली पुलिस और 2021 में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर जेल के भीतर से एक संगठित आपराधिक गिरोह चला रहा था। उस पर आरोप हैं कि वह प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारियों सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बनकर लोगों से ठगी कर रहा था।

आरोपियों में कौन-कौन शामिल?

आरोपियों में सुकेश चंद्रशेखर उर्फ ​​सुकाश चन्द्रशेखर के अलावा उनकी पत्नी लीना मारिया पॉल उर्फ ​​लीना पॉलोज, जैकलीन फर्नांडीज, दीपक रमनानी, प्रदीप रमदानी, बी. मोहनराज, अरुण मुथु, डी. कमलेश कोठारी और पिंकी ईरानी शामिल हैं। अन्य आरोपियों में पूजा सिंह, धर्म सिंह मीना, महेंद्र प्रसाद सुंद्रियाल, सुंदर बोरा, कोमल पोद्दार, जितेंद्र नरूला, अविनाश कुमार और जय प्रकाश सिंघल शामिल थे।

भारी मात्रा में रकम उगाही के आरोप

आरोप है कि फर्जी कॉल, एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन और मनगढ़ंत पहचान का उपयोग करके शिकायतकर्ता अदिति सिंह और उनके परिवार के सदस्यों को भारी मात्रा में धनराशि देने के लिए प्रेरित किया गया।

200 करोड़ रुपये से अधिक ठगे

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी ने जबरन वसूली, धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और आपराधिक धमकी के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय अर्जित की और उसके बाद अपने सहयोगियों की मदद से उसे छिपाया, अपने पास रखा।

इन कामों में किया इस्तेमाल

आरोपियों पर रकम को छिपाने के लिए तमाम दांवपेच भी अपनाए गए। आरोपियों ने रकम ट्रांसफर की, कई स्तरों पर इसे दिखाया। इसको व्हाइट मनी यानी बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया। इसमें दावा किया गया कि अपराध से प्राप्त धन का उपयोग संपत्ति, महंगे वाहन, महंगे और विलासितापूर्ण उपहार आदि की खरीद में किया गया था।

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