Source :- LIVE HINDUSTAN
USTR द्वारा मार्च 2026 में शुरू की गई इस जांच में उन देशों को शामिल किया गया है, जिनसे अमेरिका का 99.4% आयात होता है, और यह जांच की गई कि क्या ये देश जबरन मजदूरी से बने सामान को दुनिया में सप्लाई करने की अनुमति देते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीदें जब 99% तक पहुँच चुकी थीं, ठीक उसी समय वॉशिंगटन ने भारत को करारा झटका दिया। वहां से आई एक खबर ने व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। दरअसल, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित 60 देशों की एक ऐसी बदनाम लिस्ट जारी की है, जिन्हें ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) से जुड़ी चिंताओं के कारण अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। USTR ने बुधवार को भारत को उन देशों में शामिल किया, जिन पर जबरन श्रम से जुड़े सामान को दुनिया भर में सप्लाई करने से रोकने की चिंताओं को लेकर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। यह एक व्यापारिक और मानवाधिकार संबंधी मामला है। USTR का आरोप है कि भारत समेत 60 देशों ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। इस कारण अमेरिका ने भारतीय सामानों के निर्यात पर 12.5 % का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है।
यह प्रस्ताव 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों में से एक के बाद आया है। अपनी जांच के नतीजों के आधार पर, USTR ने प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। बड़ी बात यह है कि यह कदम तब आया है, जब भारत और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी नई दिल्ली में तीन दिवसीय व्यापार वार्ता में व्यस्त हैं और उसे अंतिम रूप देने की कोशिशों में जुटे हैं।
क्यों निशाने पर है भारत?
USTR की जांच में पाया गया है कि भारत उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जो जबरन श्रम द्वारा निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने में विफल रही हैं। अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की यह विफलता अमेरिकी व्यापार पर एक अनुचित बोझ डालती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया, “जबरन मज़दूरी से जुड़े आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता से संबंधित भारत के कार्य, नीतियां और प्रथाएं अनुचित हैं और अमेरिकी वाणिज्य पर बोझ डालती हैं या उसे प्रतिबंधित करती हैं।”
लिस्ट में कौन-कौन से देश?
USTR की इस लिस्ट में भारत के अलावा चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन,नॉर्वे, कनाडा, मैक्सिको, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, स्विटजरलैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंडत कजाकिस्तान, इजरायल, जॉर्डन, तुर्की, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, इराक आदि देश शामिल हैं। इनमें कनाडा, यूरोपीय संघ, मैक्सिको, पाकिस्तान, ब्रिटेन और इंडोनेशिया (कुल छह) जैसे देशों जिन्होंने आंशिक रूप से कानून बनाए हैं, उन पर 10%अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है और शेष भारत, चीन, रूस, जापान और ब्राजील सहित बाकी बचे 54 देशों पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
भारत कैसे प्रभावित हो रहा है?
चूंकि भारत के पास जबरन श्रम आयात पर पूर्ण प्रतिबंध का कोई कानून नहीं है, इसलिए अमेरिका ने भारतीय माल पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव रखा है। अतिरिक्त शुल्क लागू होने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा। इससे अमेरिका में भारतीय उत्पादों की मांग कम होने की आशंका है, जिससे भारत का निर्यात प्रभावित होगा। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और सार्वजनिक समीक्षा के लिए खुला है। अगर यह लागू होता है तो भारतीय उत्पादों के लिए यह बड़ा झटका होगा।
चीन से जुड़ा है असली पेच
थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) के अनुसार, इस जांच का मुख्य केंद्र वे उत्पाद हैं जिनमें चीन से आयातित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है। इनमें सोलर पैनल सबसे आगे है। भारत के सोलर निर्यात में अक्सर चीन से आने वाले पॉलिसिलिकॉन या सोलर सेल का उपयोग होता है, जो शिनजियांग क्षेत्र में जबरन श्रम के आरोपों से घिरे हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों को भी लिस्ट में रखा गया है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा उद्योग भी चीनी घटकों और धागों पर निर्भर है। यदि इनकी सप्लाई चेन में श्रम उल्लंघन पाया जाता है, तो भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
क्या है धारा 301 और प्रस्तावित दंड?
अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत यह जांच की गई है। इसके निष्कर्षों के आधार पर, USTR ने दो प्रस्ताव रखे हैं। पहला यह कि जो देश जबरन मजदूरी को रोकने के उपाय कर रहे हैं, उन पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए और दूसरा यह कि जो देश इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं, उन पर 12.5% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाए। अमेरिकी राजदूत जेमीसन ग्रीयर का कहना है कि अमेरिकी कामगारों को वैश्विक स्तर पर एक समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए यह कार्रवाई जरूरी है।
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