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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/06/1200x900/surr_1780752554342_1780752568636_7184aa9a-ccbf-40c8-8c16-e74d07b264e3.jpgशम्मी कपूर और मोहम्मद रफी ने साथ में कई हिट गाने दिए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा गाना भी था जिसको लेकर शम्मी खिलाफ हो गए थे।
मोहमम्द रफी एक ऐसे स्टार सिंगर थे जिनके आवाज के सामने अच्छे से अच्छा स्टार तक झुक जाता था। अब हम आपको मोहम्मद रफी और शम्मी कपूर के एक किस्से के बारे में बताते हैं। रफी साहब का एक गाना था जिसे सुनने के बाद शम्मी कपूर कुछ खफा हो गए थे। इतना ही नहीं वह चाहते थे कि यह गाना भी बदल जाए, लेकिन जब गाने को मिलता रिस्पॉन्स उन्होंने देखा तो वह भी हैरान हो गए थे।
किस गाने को लेकर हो रहा था बवाल
बात 1962 की फिल्म प्रोफेसर की है। संगीतकार शंकर जयकिशन ने एक गाने के लिए खूबसूरत धुन तैयार की। वो गाना था आवाज देके हमें तुम बुलाओ। इस गाने को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने साथ में गाया था। गाना काफी परफेक्ट था और सबने इसकी तारीफ की, लेकिन फिर फिल्म के हीरो शम्मी कपूर ने इसमें अड़चन डालनी शुरू कर दी।
शम्मी कपूर को क्या थी दिक्कत
शम्मी को इस चीज से दिक्कत थी कि गाने के शुरू में हिरोइन गा रही हैं और उनका स्क्रीन टाइम भी कम है। उन्होंने कहा मैं तो इस गाने में हूं ही नहीं सही से। वह इस गाने को बदलवाना चाहते थे।
राज कपूर ने फिर शम्मी को समझाया
यह मामला काफी बड़ा हो गया तब राज कपूर बीच में आए। राज कपूर ने शम्मी को कहा कि इस गाने को ऐसे ही रहने दो, इस पर भरोसा करो।
जब गाने को मिले रिस्पॉन्स से शम्मी हुए हैरान
इसके बाद फिल्म का प्रीमियर हुआ और इंडस्ट्री के बड़े दिग्गज इसमें शामिल थे। थिएटर में फिर यह गाना बजा और लता की आवाज को सब शांति से सुन रहे थे, फिर तभी आई मोहम्मद की लाइन…और आरडी बर्मन, देव आनंद और महमूद सभी इस लाइन को सुनकर खड़े होकर ताली बजाने लगे। शम्मी कपूर जो वहीं बैठे थे, वह भी यह देखकर हैरान हो गए।
रफी और शम्मी के साथ में गानें
बता दें कि मोहम्मद रफी ने शम्मी के लिए कई हिट गाने गाए हैं जैसे चाहे कोई मुझे जंगली कहे, बदन पे सितारे, तारीफ करूं क्या उसकी, बार-बार देखो हजार बार देखो, तुमने मुझे देखा होकर मेहरबान, दीवाना मुझसा नहीं, ये चांद सा रोशन चेहरा।
रफी के निधन पर आए थे
मोहम्मद रफी को लेकर लोगों में इस कदर दीवानगी थी कि उनके ज्यादातर गानें सुपरहिट होते थे। इतना ही नहीं जिस दिन रफी साहब का निधन हुआ, उस दिन भारी बारिश हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद 10 हजार लोग आए थे।
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