Source :- LIVE HINDUSTAN
क्या आप भी कुछ दिनों बाद अपने लक्ष्य और आदतों से भटक जाते हैं? मशहूर कॉमेडियन स्टीव मार्टिन की सफलता की कहानी और मनोविज्ञान का एक खास नियम बताता है कि लंबे समय तक प्रेरित और लगातार बेहतर कैसे बना जा सकता है।
साल 1955 में, कैलिफोर्निया के डिज्नीलैंड में एक 10 साल के लड़के ने गाइडबुक बेचने की नौकरी शुरू की। एक साल के भीतर वह डिज्नी की मैजिक शॉप में काम करने लगा। जल्दी ही उसे एहसास हुआ कि उसे जादू से ज्यादा मंच पर प्रदर्शन करना पसंद है।
किशोरावस्था में उसने लॉस एंजिल्स के छोटे-छोटे क्लबों में स्टैंड-अप कॉमेडी करना शुरू किया। शुरुआत में दर्शक कम होते थे। अक्सर लोग उसकी तरफ ध्यान भी नहीं देते थे। शुरुआत में उसकी प्रस्तुति सिर्फ एक-दो मिनट की होती थी, जो धीरे-धीरे बढ़कर 9 साल की उम्र तक 20 मिनट की हो गई। इसके बाद अगले एक दशक तक वह लगातार बदलाव, प्रयोग और अभ्यास करता रहा। टीवी के लिए लिखा और धीरे-धीरे टॉक शो में नजर आने लगा। सत्तर के दशक के मध्य तक वह ‘द टूनाइट शो’ और ‘सैटरडे’ नाइट लाइव जैसे बड़े कार्यक्रमों का नियमित हिस्सा बन चुका था।
आखिरकार, लगभग 15 वर्षों की अथक मेहनत के बाद उसे ऐतिहासिक सफलता मिली। उसके एक-एक शो को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ने लगी। अपने लगातार अभ्यास की बदौलत वह अपने समय के सबसे सफल कॉमेडियन बन गए- स्टीव मार्टिन।
प्रेरित कैसे रहें?
- स्टीव मार्टिन की आत्मकथा ‘बोर्न स्टैंडिंग अप’ यह समझने का दिलचस्प अवसर देती है कि लोग लंबे समय तक अपनी आदतों पर टिके कैसे रहते हैं? उनके शब्दों में, ‘10 साल सीखने में, 4 साल खुद को तराशने में और 4 साल असाधारण सफलता हासिल करने में लगे।’
- आखिर ऐसा क्या है कि कुछ लोग ही अपने अभ्यास और आदतों पर टिके रहते हैं, जबकि अधिकांश लोग बीच रास्ते में ही प्रेरणा खो देते हैं? हम ऐसी आदतें कैसे विकसित करें, जो हमें लगातार आकर्षित करती रहें?
- मनोवैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों ने वर्षों तक इस प्रश्न का अध्ययन किया है। एक निष्कर्ष बार-बार सामने आया है- यदि आप प्रेरित बने रहना चाहते हैं, तो आपको ऐसे काम करने चाहिए, जो आपकी क्षमता के ठीक आसपास की चुनौती प्रस्तुत करें, ना बहुत आसान, ना बहुत कठिन।
अपनी प्रगति को मापिए
- यदि आप लंबे समय तक प्रेरित बने रहना चाहते हैं, तो मेहनत और खुशी के बीच संतुलन को समझना होगा। मनोवैज्ञानिक गिल्बर्ट ब्रिम के अनुसार, ‘मानवीय खुशी के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है, ऐसे कार्यों पर काम करना जो ना बहुत कठिन हों और ना बहुत आसान।’
- खुशी और उत्कृष्ट प्रदर्शन के इस मेल को ‘फ्लो’ कहा जाता है। फ्लो वह मानसिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति किसी काम में इतना डूब जाता है कि बाकी दुनिया जैसे गायब हो जाती है। खिलाड़ी, कलाकार और प्रदर्शनकारी अक्सर इसे ‘जोन में होना’ कहते हैं, लेकिन इस अवस्था तक पहुंचने के लिए केवल सही स्तर की चुनौती पर्याप्त नहीं है। इसके साथ अपनी प्रगति का एहसास भी जरूरी है।
- मनोवैज्ञानिक जोनाथन हाइट बताते हैं कि फ्लो की अवस्था में पहुंचने की एक प्रमुख शर्त यह है कि व्यक्ति को हर कदम पर यह पता चलता रहे कि वह कैसा प्रदर्शन कर रहा है। जब हमें अपनी प्रगति दिखाई देती है, तो प्रेरणा अपने आप बढ़ती है। स्टीव मार्टिन दर्शकों की हंसी से तुरंत जान जाते कि वे सफल हो गए हैं। संभवतः इसी कारण वे अगले कई हफ्तों तक और अधिक मेहनत करने के लिए तैयार हो जाते थे।
- जीवन के दूसरे क्षेत्रों में प्रगति मापने के तरीके अलग हो सकते हैं। मसलन, व्यवसाय में बिक्री के आंकड़े यह बताते हैं कि आप आगे बढ़ रहे हैं या नहीं। सेहत के क्षेत्र में वजन, फिटनेस या दौड़ने की क्षमता आपकी प्रगति का संकेत देती है। मस्तिष्क को प्रेरित बने रहने के लिए अपनी उपलब्धियों को देखने का कोई ना कोई तरीका चाहिए। सही दिशा में हो रही अपनी छोटी-छोटी जीत को देखने की समझ होना जरूरी है।
लक्ष्य बनाना आसान है, लेकिन उन पर टिके रहना मुश्किल। हममें से ज्यादातर लोगों का उत्साह कुछ ही दिनों में फीका पड़ जाता है। हम या तो बहुत मुश्किलें देखकर निराश हो जाते हैं या बहुत आसान काम करके ऊब जाते हैं। यहीं पर काम आता है ‘गोल्डीलॉक्स नियम’। यह नियम बताता है कि इंसानी दिमाग को प्रेरित रखने के लिए उचित चुनौती की जरूरत होती है, ना बहुत कठिन, ना ही बहुत आसान।
प्रेरणा के दो सरल सूत्र
- गोल्डीलॉक्स नियम का पालन कीजिए और ऐसे काम चुनिए, जो आपकी क्षमता को उचित चुनौती दें।
- अपनी प्रगति को मापिए और अगर संभव है, तो प्रतिक्रिया प्राप्त कीजिए। जीवन को बेहतर बनाने की इच्छा रखना आसान है, लेकिन उस दिशा में लगातार बने रहना कहीं अधिक कठिन है। यदि आप लंबे समय तक प्रेरित रहना चाहते हैं, तो ऐसी चुनौती से शुरुआत कीजिए, जो आपकी पहुंच में हो। अपनी प्रगति को नियमित रूप से देखिए और फिर इसी प्रक्रिया को दोहराते रहिए। यही निरंतर सुधार और स्थायी प्रेरणा का सबसे भरोसेमंद रास्ता है।
(हिंदुस्तान अखबार के सहयोग से)
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