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अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद होर्मुज में बारूदी सुरंग के गंभीर खतरे के कारण सामान्य जहाज आवागमन बहाल होने में अभी 40 से 50 दिन का समय लग सकता है। समुद्री सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पूर्ण सफाई अभियान पूरा होने तक शिपिंग कंपनियां, तेल टैंकर और बीमा फर्मों को अत्यधिक सतर्क रहना होगा।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है, लेकिन क्षेत्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों के गंभीर खतरे के कारण सामान्य जहाज आवागमन बहाल होने में अभी भी 40 से 50 दिन का समय लग सकता है। पश्चिमी समुद्री सुरक्षा अधिकारियों ने शिपिंग कंपनियों, तेल टैंकर ऑपरेटरों और बीमा फर्मों को पूर्ण सफाई अभियान पूरा होने तक अत्यधिक सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि शुक्रवार से होर्मुज पूरी तरह से खुला रहेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि होर्मुज पर आखिर सच क्या है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पांच प्रमुख पश्चिमी समुद्री सुरक्षा सूत्रों ने आकलन किया है कि पारंपरिक माइनस्वीपर जहाजों और अत्याधुनिक अंडरवाटर ड्रोन्स की मदद से चलाए जा रहे बारूदी सुरंगों की खोज एवं सफाई अभियान में कम से कम एक महीने से अधिक समय लगेगा। इस अभियान के पूरा होने के बाद ही अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां, शिपिंग फर्म्स और तेल निगम इस रूट पर आवागमन शुरू करने का पर्याप्त आत्मविश्वास हासिल कर सकेंगे।

विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेल के भंडार वर्तमान में 2003 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने की कगार पर हैं। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के हालिया अनुमान के मुताबिक, फारस की खाड़ी से निर्यात होने वाला हर बैरल तेल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का सबसे संवेदनशील चोक पॉइंट माना जाता है, जहां से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) गुजरती है।

सुरक्षित मार्ग तैयार करना जरूरी

समुद्री सुरक्षा क्षेत्र की प्रमुख संस्था BIMCO के मुख्य सुरक्षा अधिकारी जैकब लार्सन ने कहा कि हम अभी भी इस बिंदु से जहाजों के लिए आवागमन शुरू करना बेहद जोखिम भरा मानते हैं। बारूदी सुरंग-मुक्त सुरक्षित मार्ग तैयार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि पूरे क्षेत्र में बारूदी सुरंगों का खतरा अभी भी मौजूद है और आने वाले समय में भी बना रह सकता है।

बता दें कि संघर्ष शुरू होने से पहले होर्मुज विश्व की दैनिक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत और LNG आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता था। ईरान ने संघर्ष के दौरान होर्मुज पर नियंत्रण के प्रयास में नौसैनिक बारूदी सुरंगों के इस्तेमाल की खुली धमकी दी थी, हालांकि उसने कभी स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि उसकी नौसेना ने कितनी और कहां खदानें बिछाईं।

होर्मुज के बड़े हिस्से में बारूदी सुरंगें

वहीं, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरानी बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को निशाना बनाया और इन बारूदी सुरंगों को गंभीर सुरक्षा खतरा बताया। 2 जून को अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति की सुनवाई में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि ईरान ने होर्मुज के बड़े हिस्से, खासकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।

जर्मनी की नौसेना ने 11 जून को जारी आधिकारिक पत्र में जानकारी दी कि होर्मुज के आसपास चार अलग-अलग क्षेत्रों में समुद्री बारूदी सुरंगें पाई गई हैं। इस रिपोर्ट में ब्रिटिश और अमेरिकी नौसेनाओं की खुफिया जानकारी का हवाला दिया गया, हालांकि जर्मनी ने इन बारूदी सुरंगों की पूर्ण तैनाती की स्वतंत्र पुष्टि करने में असमर्थता जताई।

तेल कीमतों पर बढ़ता दबाव

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि सफाई अभियान जितना लंबा चलेगा, वैश्विक तेल कीमतों पर उतना ही अधिक दबाव पड़ेगा। फिलहाल कई जहाजरानी कंपनियां वैकल्पिक मार्गों का सहारा ले रही हैं, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं। पूरी दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि होर्मुज स्ट्रेट कब पूरी तरह सुरक्षित होकर सामान्य जहाज आवागमन के लिए तैयार होगा।

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