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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी को बदलती वैश्विक व्यवस्था का साफ संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि जी-7 अब अकेले दुनिया पर शासन करने या अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपना प्रभुत्व जमाने का दावा नहीं कर सकता।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि फ्रांस में आयोजित हो रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत समेत उभरती शक्तियों की भागीदारी वैश्विक व्यवस्था में हो रहे परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जी-7 अब अकेले अंतरराष्ट्रीय मामलों पर प्रभुत्व स्थापित करने या दुनिया पर शासन करने का दावा नहीं कर सकता।

यूरोप की छह दिवसीय यात्रा के दौरान आयरलैंड के ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि आज की दुनिया में जी-7 को अपनी पुरानी सोच से आगे निकलना होगा। भारत जैसे उभरते देशों को शामिल करना समूह की नई वास्तविकता और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दिखाता है।

कार्नी ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब पारंपरिक जी-7 ढांचे से आगे जाकर व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर जी-7 ने कभी दुनिया पर शासन किया भी था, तो अब वह ऐसा नहीं करता और न ही ऐसा दिखावा कर सकता है।

52वां जी-7 शिखर सम्मेलन आज से शुरू

बता दें कि फ्रांस के प्रसिद्ध रिसॉर्ट शहर एवियन में मंगलवार से 52वां जी-7 शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है। इस बार सम्मेलन में केवल सात पारंपरिक सदस्य देशों के अलावा भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या और कई खाड़ी देशों के नेता भी शामिल हो रहे हैं। कार्नी ने इन अतिथि देशों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये राष्ट्र वैश्विक मुद्दों पर चर्चा में ‘व्यापक दृष्टिकोण और समावेशी समाधान’ प्रदान करेंगे, जिससे फैसले अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सकेंगे।

नई विश्व व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने का अवसर

प्रधानमंत्री कार्नी ने इस सम्मेलन को नई विश्व व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने का मौका बताया। उन्होंने जनवरी में दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) में दिए गए अपने भाषण का हवाला देते हुए कहा कि बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच मध्यम शक्तियों (Middle Powers) के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। पुरानी व्यवस्था अब पर्याप्त नहीं रही है, इसलिए नई वास्तविकताओं को स्वीकार करते हुए वैश्विक सहयोग का नया मॉडल विकसित करना होगा।

इस जी-7 शिखर सम्मेलन में निम्नलिखित अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है…

  • वैश्विक आर्थिक स्थिरता और व्यापार
  • ऊर्जा सुरक्षा तथा स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण
  • स्वास्थ्य सुरक्षा और महामारी तैयारी
  • यूक्रेन व मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का शासन और नियमन

एआई प्रौद्योगिकी के तेज विकास पर चिंता जताते हुए मार्क कार्नी ने चेतावनी दी कि यह क्षेत्र अभी भी वैश्विक स्तर पर काफी हद तक अनियमित है। उन्होंने कहा कि सामान्य मानक, नैतिक दिशानिर्देश और सुरक्षा उपाय तय करना सम्मेलन की प्राथमिकताओं में शामिल होगा ताकि एआई से जुड़े संभावित जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके।

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