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ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग खत्म हो चुकी है। दोनों देशों ने समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। लेकिन इस डील को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गले से नहीं उतार पा रहे। वजहें कई हैं… पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

अमेरिका और ईरान के बीच बीते 4 महीनों से जारी जंग खत्म हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने गुरुवार को समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। 100 दिनों से भी अधिक समय से भीषण तबाही झेलने के बाद पूरी दुनिया इस युद्ध के खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। ऐसे में यह समझौता बेहद जरूरी था। हालांकि एक शख्स है जिसके लिए यह समझौता किसी बुरे सपने से कम नहीं। ये शख्स हैं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू।

नेतन्याहू इस डील से खुश नहीं, ये बात जगजाहिर है। लेकिन आखिर क्यों? इजरायली प्रधानमंत्री अगर चाहें भी तो भी वे इस समझौता का समर्थन नहीं कर सकते। इसके पीछे कई वजहें हैं। नेतन्याहू इस समय ऐसी स्थिति में फंस गए हैं जहां से उनका लौटना मुश्किल मालूम पड़ता है। हालात यह हैं कि देश में विपक्षी पार्टियां तो उन पर हमलावर हैं ही, उनके अपने भी उनसे खुश नहीं हैं। आइए समझते हैं कैसे नेतन्याहू के लिए मामला फंसता चला जा रहा है।

चुनाव से पहले बड़ा झटका

दरअसल इस साल अक्टूबर के अंत से पहले इजरायल में आम चुनाव होने हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही नेतन्याहू पर घरेलू स्तर पर राजनीतिक दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने हाल ही में संसद में इजरायली PM की तीखी आलोचना की। लैपिड ने कहा कि नेतन्याहू दो बेहद मुश्किल रास्तों के बीच फंस गए हैं। उन्होंने कहा, “या तो वो हमारे सबसे बड़े सहयोगी (अमेरिका) के साथ सीधा टकराव मोल लें। या फिर इजरायली हितों का पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर दें।”

ट्रंप के समझौते को ना मानने की मांग

नेतन्याहू को सिर्फ विपक्ष से ही नहीं, बल्कि अपनी सरकार के भीतर शामिल कट्टर दक्षिणपंथी मंत्रियों से भी आलोचना झेलनी पड़ रही है। ये सहयोगी दल किसी भी ऐसे समझौते का विरोध कर रहे हैं जो इजरायल की सैन्य आजादी को सीमित करता हो। बता दें कि US ईरान डील के तहत ईरान ने शर्त रखी है कि लेबनान सहित दूसरे सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान बंद होने चाहिए। अमेरिका ने इस शर्त को मंजूरी भी दे दी है। इससे इजरायली कट्टरपंथी नेता भड़क उठे हैं और आजादी पर हमला बता रहे हैं।

इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया पर इस डील का खुलकर विरोध किया। उन्होंने लिखा, “ट्रंप का समझौता हमारे लिए बाध्यकारी नहीं है। हम इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं, क्योंकि यह हमारी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता है।” इस बीच नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार का मुकदमा भी चल रहा है जिसने उनकी राजनीतिक स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।

ट्रंप नहीं दे रहे भाव?

इजरायली प्रधानमंत्री को सबसे तगड़ा झटका ट्रंप से मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान युद्ध को लेकर दोनों के बीच कई दिनों से मतभेद चल रहे थे। नेतन्याहू इस जंग को जारी रखकर देश में ‘टोटल विक्ट्री’ वाला नॉरेटिव चला सकते थे, जिससे उन्हें चुनाव में भी मदद मिलती। हालांकि ट्रंप ने समझौता कर उनके इस प्लान पर पानी फेर दिया है। दूसरी तरफ ट्रंप बीते कुछ दिनों में नेतन्याहू को कई बार खुलेआम भला-बुरा कह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने एक फोन कॉल के दौरान नेतन्याहू को ‘पागल’ तक कह दिया। इसके अलावा उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग भी किया। जाहिर है इससे नेतन्याहू की देश में छवि कमजोर हो रही है। नेतन्याहू को डर था कि ट्रंप उनकी मांगों को नजरअंदाज कर ईरान संग समझौता न कर लें, लेकिन हुआ ठीक ऐसा ही।

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