Home World News hindi 11 साल बाद पाकिस्तान की नौसेना में शामिल हुई पहली चीनी पनडुब्बी,...

11 साल बाद पाकिस्तान की नौसेना में शामिल हुई पहली चीनी पनडुब्बी, भारत के दोस्त ने लगाया था अड़ंगा

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

चीन में बनने वाली अन्य तीन पनडुब्बियों पीएनएस शुशुक, पीएनएस मंगरो और पीएनएस गाजी को लॉन्च तो कर दिया गया है, लेकिन वे अभी भी उन्नत समुद्री परीक्षणों से गुजर रही हैं।

चीन के साथ पनडुब्बी समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक दशक से भी अधिक समय बाद पाकिस्तान ने आखिरकार अपनी पहली पनडुब्बी को नौसेना में शामिल कर लिया है। यह सौदा पाकिस्तान के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे महंगा रक्षा अधिग्रहण है। अप्रैल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 8 हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों की खरीद का समझौता हुआ था। समझौते के तहत 4 पनडुब्बियों का निर्माण चीन में होना था और इन्हें 2022-2023 से पहले पाकिस्तान को सौंपा जाना था। वहीं बाकी 4 पनडुब्बियों को साल 2028 तक कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स में असेंबल किया जाना था। तय समयसीमा बीतने के बाद साल 2026 तक पाकिस्तान नौसेना में केवल एक ही पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर (PNS Hangor) शामिल हो सकी है।

क्यों फेल हुई डिलीवरी की समयसीमा?

चीन में बनने वाली अन्य तीन पनडुब्बियों पीएनएस शुशुक, पीएनएस मंगरो और पीएनएस गाजी को लॉन्च तो कर दिया गया है, लेकिन वे अभी भी उन्नत समुद्री परीक्षणों से गुजर रही हैं। इस तरह बिना एक भी पनडुब्बी सौंपे चीन में निर्माण की मूल समयसीमा खत्म हो गई।

जर्मनी का निर्यात लाइसेंस देने से इनकार

इस देरी की सबसे बड़ी वजह जर्मनी द्वारा इन पनडुब्बियों के लिए चुने गए ‘MTU इंजन’ के निर्यात लाइसेंस को रोकने का फैसला रहा। जर्मनी के इस इनकार के बाद पाकिस्तान और चीन को मजबूरन चीनी निर्मित ‘CHD-620 इंजन’ का उपयोग करना पड़ा। आपको बता दें कि भारत और जर्मनी के काफी अच्छे और गहरे रिश्ते हैं।

इसके अलावा, कोरोना महामारी के प्रभाव और एक बिल्कुल नए पनडुब्बी डिजाइन को एकीकृत करने में आने वाली तकनीकी दिक्कतों के कारण भी काम में काफी देरी हुई। अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि सभी 8 पनडुब्बियों की डिलीवरी मूल समयसीमा से कई साल बाद यानी 2028 और 2030 के बीच पूरी हो पाएगी। हालांकि, पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने संशोधित समयसीमा को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

घरेलू निर्माण पर बड़े सवाल

पाकिस्तान में असेंबल होने वाली बाकी 4 पनडुब्बियों का भविष्य और भी अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। पांचवीं पनडुब्बी का निर्माण दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था। छठी पनडुब्बी के निर्माण की शुरुआत फरवरी 2025 में ही रखी जा सकी है।

पाकिस्तान ने साल 2008 में अगोस्टा 90B-क्लास की पनडुब्बी पीएनएस हमजा का घरेलू स्तर पर निर्माण किया था, लेकिन नया हैंगोर-क्लास प्रोजेक्ट लागत और तकनीक दोनों ही मामलों में उससे कहीं ज्यादा बड़ा और जटिल है।

5 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम खर्च

इस पूरे हैंगोर-क्लास पनडुब्बी खरीद कार्यक्रम की अनुमानित लागत 4 अरब डॉलर से 5 अरब डॉलर लगभग 33,000 से 41,000 करोड़ रुपये के बीच है, जो इसे पाकिस्तान के इतिहास का सबसे महंगा नौसैनिक कार्यक्रम बनाती है। आमतौर पर इतने बड़े रक्षा सौदों में समयसीमा चूकने या लागत बढ़ने पर आर्थिक जुर्माना लगाने की शर्त होती है। हालांकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इस समझौते में ऐसी किसी भी दंडात्मक शर्त के होने या चीन पर जुर्माना लगाए जाने की बात को पूरी तरह गुप्त रखा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN