Source :- LIVE HINDUSTAN
अहमदी का एक गाना तेजी से वायरल हुआ था और यूट्यूब पर इसे लाखों बार देखा गया। हालांकि इस कॉन्सर्ट के कुछ दिनों बाद ही अहमदी और दूसरे संगीतकारों को हिरासत में लिया गया। अब कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है।
एक देश ऐसा भी। यहां एक गायिका को कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। वजह सिर्फ इतनी है कि उसने यह गाना बिना हिजाब पहने गाया था। अब तक आपने भी इस देश के नाम का अंदाजा लगा लिया होगा। जी हां, यह मामला ईरान का है। हाल ही में ईरान की एक फीमेल सिंगर, फिल्ममेकर और म्यूजिशियन परस्तू अहमदी को बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर कॉन्सर्ट टेलीकास्ट करने के लिए 74 कोड़ों की सजा सुनाई गई है।
दरअसल 2024 में उनके यूट्यूब चैनल पर लाइवस्ट्रीम किए गए इस प्रोग्राम को लेकर ईरान में खूब बवाल हुआ था। अब इस मामले में प्रोडक्शन टीम के आठ दूसरे म्यूजिशियन को भी कोड़े मारने की सजा दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक क़ोम प्रांत की एक आपराधिक अदालत ने परस्तू अहमदी पर दो साल तक देश छोड़ने और दो साल तक किसी भी ऐसी गतिविधि में हिस्सा लेने पर भी प्रतिबंध लगाया है। अहमदी पर इंटरनेट पर कथित तौर पर अश्लील और अनैतिक सामग्री बनाने और टेलीकास्ट के जरिए सार्वजनिक रूप से शालीनता को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
29 वर्षीय परस्तू अहमदी ने दिसंबर 2024 में अपने यूट्यूब चैनल पर एक गाना टेलीकास्ट किया था। इसके बोल थे, “अज खून-ए जवानान-ए वतन” (वतन के नौजवानों के खून से)। यह टेलीकास्ट देखते ही देखते खूब वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों बार देखा गया। हालांकि कॉन्सर्ट पॉपुलर होने के कुछ ही दिनों बाद अहमदी और उनकी टीम के दूसरे कलाकारों को हिरासत में ले लिया गया। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था। इसके बाद वीडियो के प्रकाशन को लेकर उनके खिलाफ आधिकारिक मामला दर्ज किया गया।
कौन हैं परस्तू अहमदी?
परस्तू अहमदी का जन्म 21 मार्च 1997 को हुआ था। उन्होंने सूरेह इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से फिल्म डायरेक्शन में डिग्री हासिल की है। वे खुद को एक स्वतंत्र गायिका बताती हैं और ईरान में उन्हें इस्लामी हुकूमत से टक्कर लेने वालों की आवाज मानी जाती हैं। अहमदी ने अपने इस विवादित यूट्यूब कार्यक्रम को एक काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। इस टेलीकास्ट के दौरान उन्होंने बिना हिजाब के एक स्लीवलेस ड्रेस पहनी थी। वहीं उन्होंने जो गाना गाया उसे ईरान में आजादी के संघर्ष से जुड़ा एक ऐतिहासिक देशभक्ति गीत माना जाता है।
बता दें कि ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है और वहां के सख्त नियम महिलाओं को दर्शकों के सामने अकेले गाने की इजाजत भी नहीं देते। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सजा इस बात का संकेत है कि ईरान में हालात अब भी नहीं बदले हैं। अमेरिका स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घांदेहरी ने कहा है कि परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा सुनाया जाना सरकार की दमनकारी सोच को दिखाता है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




