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10 साल नौकरी नहीं फिर भी ले सकते हैं पेंशन, बड़े काम की EPFO की ये स्कीम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS), 1995 काफी अहम है। यह न सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन स्कीम के तौर पर बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए सोशल-सिक्योरिटी सिस्टम के तौर पर भी बनाया गया है। इस योजना की कुछ शर्तें भी हैं जिसकी बहुत कम लोगों को जानकारी रहती है। आइए विस्तार से जान लेते हैं।

10 साल की नौकरी नहीं होने पर भी पेंशन

उदाहरण के लिए एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम के तहत यदि कोई कर्मचारी कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी कर लेता है तो वह 58 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन का हकदार बनता है। वहीं, सदस्य 50 साल की उम्र से ही जल्दी पेंशन लेने का विकल्प भी चुन सकते हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है क्योंकि इसे सामान्य रिटायरमेंट की उम्र से पहले लिया जा रहा होता है। नौकरी के दौरान स्थायी और पूरी तरह से विकलांग होने की स्थिति में भी पेंशन मिलती है। इस स्थिति में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 वर्ष की न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त लागू नहीं होती।

नॉमिनेशन से पेंशन की पात्रता?

EPF में जमा रकम के मामले में, नॉमिनेशन यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि पैसे किसे मिलेंगे लेकिन EPS के फायदे मुख्य रूप से कानूनी पात्रता नियमों के आधार पर मिलते हैं। EPS के तहत पेंशन का फायदा आम तौर पर स्कीम में बताए गए पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है, न कि सिर्फ नॉमिनेशन के आधार पर। टीमलीज रेगटेक के सह-संस्थापक और सीईओ ऋषि अग्रवाल के मुताबिक, कर्मचारियों और उनके परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब नौकरी के दौरान रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए होते हैं।

कई मामलों में कर्मचारियों की EPS सदस्यता, सेवा रिकॉर्ड, योगदान विवरण या नौकरी बदलने के दौरान ट्रांसफर रिकॉर्ड में त्रुटियां पाई जाती हैं। इसके अलावा नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते और केवाईसी से जुड़ी गलतियां भी पेंशन क्लेम में देरी का कारण बनती हैं।

ऋषि अग्रवाल ने कहा, “फॉर्म 11 में दी गई जानकारी या पात्रता तय करने में हुई गलतियों की वजह से कर्मचारियों को गलती से EPS में शामिल किया जा सकता है या उससे बाहर रखा जा सकता है। ये समस्याएं अक्सर पेंशन का दावा (क्लेम) करने पर ही सामने आती हैं। एक और आम समस्या सर्विस हिस्ट्री का अधूरा होना है। जिन कर्मचारियों ने कई बार नौकरी बदली है, उनके सर्विस रिकॉर्ड मर्ज नहीं हुए हो सकते हैं, ट्रांसफर अधूरे हो सकते हैं या कॉन्ट्रिब्यूशन हिस्ट्री में गड़बड़ी हो सकती है। इन वजहों से पेंशन प्रोसेस और वेरिफिकेशन में देरी हो सकती है।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN