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तो VFX नहीं थे कमल हासन के ये सीन? जानिए 1989 में कैसे हुई फिल्म ‘अप्पू राजा’ की शूटिंग

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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Appu Raja: कमल हासन की साल 1989 में आई फिल्म अप्पू राजा में उन्हें बौना दिखाया गया था। लेकिन सवाल यह है कि उस दौर में जब VFX था ही नहीं, तब मेकर्स ने यह करिश्मा किया कैसे? जी नहीं, यह कोई बॉडी डबल नहीं था।

साल 1989 में आई फिल्म ‘अप्पू राजा’ असल में तमिल फिल्म ‘अपूर्व सागोधरर्गल’ का हिंदी डब वर्जन था। कहानी राजा और अप्पू नाम के दो जुड़वा भाईयों की है। इनमें से एक की हाइट अच्छी है और दूसरा बौना है। बचपन में ही दोनों भाई बिछड़ जाते हैं। कहानी अप्पू के अपने पिता की हत्या करने वाले क्रिमिनल से बदला लेने के बारे में भी है। तो इस तरह यह फिल्म तमिल-तेलुगू ही नहीं, बल्कि हिंदी वर्जन से भी अच्छी कमाई करने में कामयाब रही। लेकिन सवाल यह उठता है कि उस वक्त जब VFX नहीं था, तब कैसे मेकर्स ने फिल्म के लीड एक्टर कमल हासन को बौना दिखाया?

बिना VFX कैसे बनाया गया 4 फीट का अप्पू?

यह फिल्म इस बात का अच्छा उदाहरण है कि कैसे उस दौरान के फिल्ममेकर्स काफी क्रिएटिव थे। वो हर सीन को परफेक्शन के साथ करने के लिए काफी ज्यादा तरकीबें और मेहनत लगाते थे। फिल्म ‘अप्पू राजा’ के लिए भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया था। इस फिल्म को बनाने में ही सबसे बड़ी मुसीबत यह थी की कमल हासन की असल हाइट 5.8 फीट है और उन्हें इस फिल्म में एक बौने का रोल भी प्ले करना था। कमल हासन को जो किरदार (अप्पू) निभाना था, उसकी हाइट सिर्फ 4 फीट 5 इंच दिखानी थी। तो फिर यह कमाल किया कैसे गया?

डायरेक्टर ने लगाया था गजब का दिमाग

डायरेक्टर एसएस राव और सिनेमैटोग्राफर पीसी श्रीराम ने मिलकर इसके लिए कुछ गजब के तिकड़म खोज निकाले। तो चलिए समझते हैं कि आखिर यह कमाल 1989 में बिना VFX के किया कैसे गया। पहली तरकीब थी घुटनों के बल चलना। कमल हासन साहब को इस फिल्म में ज्यादातर जगह पर घुटनों के बल चलाया गया। उन्हें इस तरह के कपड़े पहनाए जाते थे, जिससे वह बौने दिखें। उनके घुटनों पर खासतौर पर बनाए गए जूते लगाए जाते थे ताकि देखने वाले को ऐसा लगे कि वह अपने पैरों पर खड़े हैं और उनकी हाइट इतनी ही है।

कैमरा पर क्यों नहीं दिखते कमल के पांव?

अब सवाल यह उठता है कि अगर ऐसा था तो उनके पैरों का घुटनों से नीचे का हिस्सा क्यों नहीं दिखता है? ऐसा इसलिए क्योंकि मेकर्स कैमरा को या तो जमीन के समानांतर या फिर उससे नीचे के लेवल पर रखा करते थे, इस वजह से पीछे का पैर दिखता ही नहीं था। साइड के शॉट लेने के लिए जमीन के नीचे लंबाई में गड्ढा खोदा जाता था, ताकि साइड से देखने वाले को जमीन समान दिखे, लेकिन असल में यह गड्ढा होता था। तो इस तरह कमल हासन गड्ढे में चल रहे होते थे। फिल्म जीरो में शाहरुख खान को भी इसी तरकीब से बौना दिखाया गया था। ज्यादातर शॉट में तो कमल हासन के पैर दिखाए ही नहीं जाते थे। जहां दिखाना होता वहां नकली पैर होते थे, जिन्हें कोई और मूव करता था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN