Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका संग चल रही बातचीत के बीच ईरान में एक खुलासे से खलबली मच गई है। यहां एक सीक्रेट लेटर लीक हो गया जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरानी नेताओं ने बातचीत के दौरान सुप्रीम लीडर द्वारा खींची गई लकीर को पार कर दिया।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सामने सत्ता संभालते ही पहली बड़ी अग्निपरीक्षा आ खड़ी हुई है। इस साल की शुरुआत में अपने पिता की जगह देश की कमान संभालने वाले मोजतबा के बारे में अब तक माना जा रहा था कि पूरी व्यवस्था पर उनका मजबूत कंट्रोल है। हालांकि, हाल ही में एक सीक्रेट लेटर के लीक होने से हड़कंप मच गया है। चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि ईरान के भीतर और सत्ता के गलियारों में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे विवाद की शुरुआत ईरान के कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन के ईरानी सरकारी टेलीविजन पर दिए एक इंटरव्यू से हुई। नबावियन ने लाइव टीवी पर दावा किया कि उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर मोजतबा खामेनेई द्वारा लिखे गए बेहद गोपनीय पत्र देखे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के राजनयिक अमेरिका के साथ बातचीत में उन सीमाओं को लांघ रहे हैं, जो खुद सर्वोच्च नेता ने तय की थीं।
जांच की उठ रही मांग
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद इंटरव्यू को बीच में ही अचानक काट दिया गया और बाद में इसे रिकॉर्ड से भी हटा दिया गया। अब ईरान में इस बात की जांच की मांग उठ रही है कि यह बेहद संवेदनशील जानकारी आखिर लीक कैसे हुई। वहीं यह सवाल भी है कि क्या बातचीत करने वाले अधिकारियों ने उनके निर्देशों को नजरअंदाज किया, या फिर विरोधी गुट उनके नाम का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर कर रहे हैं।
लीक हुई जानकारी के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका से बातचीत आगे बढ़ाने के लिए 11 सख्त शर्तें रखी थीं। इन शर्तों में लिखा था कि ईरान को अमेरिका की तरफ से मुआवजा मिलना चाहिए और उस पर लगे सारे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। वहीं यूरेनियम एनरिचमेंट के अधिकार को बरकरार रखा जाए और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को तुरंत बहाल किया जाए। इसके अलावा मोजतबा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर एकाधिकार चाहते थे। खामेनेई चाहते थे कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन पर पूरी तरह ईरान का एकाधिकार हो। वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूला जाए, दुश्मन देशों के जहाजों पर पाबंदी लगे और उस टोल से होने वाली कमाई को देश की जनता, शहीदों के परिवारों और पूर्व सैनिकों में बांटा जाए।
कट्टरपंथियों को किस बात का डर?
इस विवाद के पीछे ईरान के कट्टरपंथी धड़े की गहरी छटपटाहट छिपी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कट्टरपंथी ताकतों को डर है कि अगर अमेरिका के साथ कोई समझौता सफल हो जाता है, तो देश के भीतर उदारवादी गुट मजबूत हो जाएंगे। इससे उन विचारधारा-आधारित पावर सेंटर्स का प्रभाव कम हो जाएगा जो सालों से पश्चिम के साथ टकराव की बदौलत फल-फूल रहे हैं। राजनीति विश्लेषक बाबक दोरबेइकी का कहना है कि कट्टरपंथी ताकतें हमेशा टकराव के माहौल में ही जिंदा रहती हैं। शांति या समझौते का माहौल उनके राजनीतिक वजूद के लिए खतरा है।
कमजोर पड़ रहे मोजतबा?
हालांकि फिलहाल सीधे तौर पर मुजतबा खामेनेई की गद्दी को चुनौती नहीं है, क्योंकि कोई भी गुट खुलकर उनके खिलाफ नहीं बोल रहा है। हर कोई खुद को खामेनेई की शर्तों का ‘सच्चा रक्षक’ बताकर दूसरे गुट को नीचा दिखाने में लगा है। लेकिन इस घटना से यह संकेत मिल रहे हैं कि मोजतबा को अपने पिता की कुर्सी तो मिल गई है, पर अलग-अलग विरोधी गुटों के बीच संतुलन बनाने और अपनी बात को आंख मूंदकर मनवाने का वह हुनर और रुतबा पाना अभी बाकी है। ईरान की इस पूरी व्यवस्था में मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता बनना वैसे भी कई सवाल खड़े कर रहा था। अब तक युद्ध और प्रतिबंधों के दबाव में यह असंतोष दबा हुआ था, लेकिन इस लीक ने उसे सतह पर ला दिया है।
बातचीत पर क्या अपडेट?
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सार्वजनिक धमकियों के बाद ईरानी राजनयिक एक बार बातचीत छोड़कर बाहर भी निकल आए, जिसके बाद मध्यस्थों को अप्रत्यक्ष तरीके से बातचीत आगे बढ़ानी पड़ी। हालांकि, एक संयुक्त बयान के मुताबिक शुरुआती सत्र सकारात्मक और रचनात्मक रहा था, लेकिन आंतरिक बगावत ने अब ईरान की स्थिति को कमजोर कर दिया है।
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