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मैक्सिको की ऐतिहासिक जीत पर लगा दाग, फीफा वर्ल्ड कप मैच के दौरान लगे समलैंगिक विरोधी नारे

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मैक्सिको की चेक गणराज्य के खिलाफ विश्व कप फुटबॉल के ग्रुप चरण के आखिरी मैच में जीत को दर्शकों की एक अपमानजनक टिप्पणी ने दागदार बना दिया जिसके कारण पहले भी देश के फुटबॉल महासंघ पर जुर्माना और अन्य प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।

माटेओ शावेज और जूलियन क्विनोनेस ने दूसरे हाफ की शुरुआत में छह मिनट के अंतराल में गोल किए जिससे मैक्सिको ने चेक गणराज्य को 3-0 से हराकर पहली बार वर्ल्ड कप फुटबॉल के ग्रुप चरण के अपने तीनों मैच जीते। मैक्सिको की चेक गणराज्य के खिलाफ विश्व कप फुटबॉल के ग्रुप चरण के आखिरी मैच में जीत को दर्शकों की एक अपमानजनक टिप्पणी ने दागदार बना दिया जिसके कारण पहले भी देश के फुटबॉल महासंघ पर जुर्माना और अन्य प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।स्पेनिश भाषा में कहे गए इस अपशब्द का शाब्दिक अर्थ ‘पुरुष वेश्या’ होता है। यह अपशब्द एज़्टेका स्टेडियम में पहले हाफ के आखिर में तब सुना गया जब चेक गणराज के गोलकीपर मातेज कोवर ने गोल किक ली थी। इस नारे की वजह से फीफा द्वारा लगाए गए जुर्माने के तौर पर मैक्सिको को लाखों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। यह नारा लगभग 25 साल पहले लोकप्रिय हुआ था और गोलकीपरों को गोल किक मारते समय उनका ध्यान भंग करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

यह नारा 2014 में ब्राजील में हुए विश्व कप के दौरान वायरल हुआ और पिछले दो विश्व कप के दौरान भी इसे सुना गया था।

मैक्सिको पहले ही नॉकआउट राउंड में अपनी जगह पक्की कर चुका था लेकिन उसने अपना विजय अभियान जारी रखते हुए शान से अगले दौर में कदम रखा। चेक गणराज्य केवल एक अंक ही हासिल कर पाया और वह टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

अपने पहले विश्व कप में खेल रहे 22 वर्षीय शावेज़ ने 55वें मिनट में पहला गोल किया और क्विनोनेस ने 61वें मिनट में टूर्नामेंट का अपना दूसरा गोल दागा। अल्वारो फिडाल्गो ने दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में मैक्सिको के खाते में एक गोल और जोड़ा।

मैक्सिको का इससे पहले ग्रुप चरण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दो जीत और एक ड्रॉ का था, जो उसने 1986 और 2002 में हासिल किया था। दोनों में टीम के मौजूदा कोच जेवियर अगुइरे शामिल थे। पहले में एक मिडफील्डर और दूसरे में मैक्सिको के कोच के रूप में।

ग्रुप ए का विजेता बन चुका मैक्सिको मंगलवार को एज़्टेका स्टेडियम में राउंड-ऑफ-32 के मैच में एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेलेगा जिसका अभी तक निर्धारण नहीं हुआ है।

मैक्सिको ने इस विशाल स्टेडियम में खेले गए नौ विश्व कप मैचों में से एक भी मैच नहीं हारा है। बुधवार को यह स्टेडियम 80,824 दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। एल ट्राइ (मैक्सिको की टीम का उपनाम) को एज़्टेका स्टेडियम में केवल दो बार हार का सामना करना पड़ा है, जिनमें से उसे आखिरी हार छह सितंबर, 2013 को होंडुरास के खिलाफ विश्व कप क्वालीफाइंग मैच में मिली थी।

इस मैच में मैक्सिको के अतीत और भविष्य दोनों की झलक देखने को मिली। गिलबर्टो मोरा 17 साल की उम्र में विश्व कप में शुरुआती लाइनअप में जगह बनाने वाले मैक्सिको के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने।

दूसरी तरफ 40 वर्षीय गोलकीपर गुइलेर्मो ‘मेमो’ ओचोआ 77वें मिनट में मैदान पर उतरे और अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो के साथ छह विश्व कप में खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

पिछले नवंबर में पनामा के खिलाफ मैत्री मैच में मिली हार के बाद से मैक्सिको 11 मैचों में अपराजित रहा है। अगुइरे ने अपनी टीम का भरपूर उपयोग करते हुए टूर्नामेंट में 26 में से 25 खिलाड़ियों को मौका दिया है। बुधवार को खेले गए मैच में शावेज़ उन पांच खिलाड़ियों में से एक थे जिन्होंने पिछले गुरुवार को दक्षिण कोरिया के खिलाफ 1-0 की जीत में शुरुआती लाइनअप में जगह नहीं बनाई थी।

13 नंबर की जर्सी पहनने वाले ओचोआ मैक्सिको के लिए अपने संभावित अंतिम मैच में आखिरी 13 मिनट और इंजरी टाइम तक खेले। वह 13 जुलाई को 41 साल के हो जाएंगे और उन्होंने कहा है कि वह विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से संन्यास लेने की योजना बना रहे हैं।

वह 2006 और 2010 के टूर्नामेंट में स्थानापन्न खिलाड़ी थे और 2014, 2018 और 2022 में मैक्सिको के लिए शुरुआती लाइनअप में शामिल थे। राउल रेंगल इस साल मैक्सिको के पहली पसंद के गोलकीपर हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN