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NCERT की नई कक्षा 9 की पुस्तक में 1975 की आपातकाल को प्रमुख लोकतांत्रिक चुनौती बताया गया

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The National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने अपनी कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक, “Understanding Society: India and Beyond” में 1975-77 के एमरजेंसी काल पर एक अनुभाग शामिल किया है। यह कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में एमरजेंसी अवधि को पहली बार सम्मिलित करने का संकेत है, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक प्रमुख चुनौती के रूप में इसकी महत्ता को दर्शाता है।

**एमरजेंसी का ऐतिहासिक संदर्भ**

जून 1975 में, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक उथल-पुथल का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था। इस अवधि में मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और कई राजनीतिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पाठ्यपुस्तक में उल्लेख है कि एमरजेंसी आंतरिक उथल-पुथल के आधार पर लागू की गई थी, जिसके कारण बेरोजगारी, महंगाई, और कथित दुराचार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।

**लोकतांत्रिक संस्थानों पर प्रभाव**

एमरजेंसी के दौरान, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ा। नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, जो एक बड़ी चिंता थी। पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि नागरिकों की आज़ादी सीमित कर दी गई और प्रेस को सेंसर किया गया, जिससे संविधान पर सीधा हमला हुआ।

**जयप्रकाश नारायण की भूमिका**

पाठ्यपुस्तक में एमरजेंसी के खिलाफ जन आंदोलनों को संगठित करने में प्रमुख राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक जयप्रकाश नारायण की भूमिका भी उजागर की गई है। ‘लोक नायक’ के नाम से प्रसिद्ध नारायण के प्रयास विशेषकर बिहार और गुजरात में उल्लेखनीय थे, जहां उन्होंने छात्रों और नागरिकों को सरकार के कार्यों के विरोध में एकजुट किया।

**लोकतंत्र की पुनःस्थापना**

एमरजेंसी 1977 में समाप्त कर दी गई, जिससे आम चुनाव कराए गए, जिनके माध्यम से नागरिकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इन चुनावों में सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाया और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के महत्व को रेखांकित किया।

**व्यापक शैक्षिक सुधार**

कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में एमरजेंसी को शामिल करने का निर्णय इसके घोषणा को 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लिया गया है। यह परिवर्तन NCERT के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शैक्षिक सामग्री को अपडेट करना और विद्यार्थियों को भारत के लोकतांत्रिक सफर की समग्र समझ प्रदान करना है। संशोधित पाठ्यपुस्तक में लोकतंत्र के सामने अन्य चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता को भी शामिल किया गया है।

**राजनीतिक प्रतिक्रियाएं**

पाठ्यपुस्तक में एमरजेंसी को शामिल करने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे “इतिहास को अपनी मनमर्जी के अनुसार प्रस्तुत करने” का प्रयास कर रहे हैं, जिससे इतिहास की प्रस्तुति में राजनीतिक पक्षपात दिखाई देता है। उन्होंने एमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के सामने आई अभूतपूर्व चुनौतियों पर जोर दिया।

**निष्कर्ष**

NCERT की कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में एमरजेंसी को जोड़ना भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण काल को युवाओं को समझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमरजेंसी के दौरान सामने आई चुनौतियों का अध्ययन करके छात्र लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व और भारतीय लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती को गहराई से समझ सकते हैं।