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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/27/1200x900/Diljit_and_Naseer_1782541280022_1782541283554_ed9124af-8477-48b6-ab07-f1e2332421f3.jpgChaand Par Match Hai: दिलजीत दोसांझ और नसीरुद्दीन शाह का वो सीन बहुत से लोग नहीं समझ पाए, जिसमें नसीरुद्दीन शाह दिलजीत से कहते हैं कि ‘चांद पर मैच है, तुम गए हो कभी चांद पर’? यह सीन फनी तो लगा, लेकिन इसका मतलब क्या था?
इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ सुपरहिट साबित हुई है। तकरीबन 70 करोड़ रुपये की लागत में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ऑलरेडी 60 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। फिल्म को रिलीज हुए अभी महज 2 हफ्ते हुए हैं और हर बढ़ते दिन के साथ इसका बज बढ़ता जा रहा है। फिल्म को क्रिटिक्स ने खूब सराहा है और इसकी कहानी से लेकर सिनेमैटोग्राफी और इम्तियाज अली की स्टोरीटेलिंग लोगों को खूब भा रही है। हालांकि हमेशा की तरह इम्तियाज अली की फिल्म के कुछ सीन्स ऐसे हैं, जिन्हें आपने एन्जॉय तो किया, लेकिन शायद आप उनका असल मतलब नहीं समझ पाए। तो चलिए आज ऐसे ही कुछ सीन्स को डिकोड करते हैं।
‘चांद पर मैच है’
फिल्म में जब नसीरुद्दीन शाह (कीनू) का किरदार दिलजीत दोसांझ (निर्वैर) से कहता है कि ‘चांद पर मैच है’, तो इस सीन पर थिएटर में आपको ठहाके सुनाई पड़ते हैं। लेकिन बहुत से लोग इसे डिकोड नहीं कर पाए। आखिर कीनू अपने पोते से ऐसा क्यों कहता है? भारत-पाक बंटवारे का दर्द झेल चुका कीनू असल में उस दौर की बात कर रहा होता है। चांद से उसका मतलब उस बंटवारे से पहले के खुशहाल पाकिस्तान (सरगोदा) से होता है और मैच से मतलब उस दौर में हंसी-खुशी एक साझ रह रही सभी कौमों से होता है। ज्यादातर लोगों को लगा कि नसीरुद्दीन शाह का किरदार डिमेंशिया की बीमारी के चलते बस यूं ही कुछ बड़बड़ा रहा है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी 1947 के बैकड्रॉप और वर्तमान समय में एकसाथ चलती है। कहानी मृत्युशैया (डेथबेड) पर बड़े एक बुजुर्ग की है, जो उस दौर में की अपनी गलतियों के चलते घुट रहा है। साथ ही मरने से पहले एक बार अपनी प्रेमिका (जिया) को देखना चाहता है और उसे अपने दिल की बात कहना चाहता है। यह गिल्ट उसे मरने नहीं दे रहा कि वह उसे पाकिस्तान में छोड़कर बंटवारे के समय भारत चला आया था। फिल्म में शायद आपने यह भी नोटिस किया हो कि कीनू बार-बार दंगाईयों के लिए मार्शियन (मंगल ग्रह के लोग) शब्द इस्तेमाल करता है, लेकिन आखिर ऐसा क्यों? क्या वह अपनी बीमारी की वजह से ऐसा कर रहा है? जवाब है नहीं।
‘मंगल ग्रह के लोग आए हैं’
कीनू खुशहाल पाकिस्तान और बंटवारे के दर्द की यादें दिल में लिए जी रहा है उसने अपनी आंखों के सामने अपने पड़ोसियों को कातिल बनते देखा। वो लोग जिनके साथ वो पला-बड़ा था, उन्हें नफरत की आग में जलते देखा। उस वक्त वह छोटा था और उसका दिमाग यह स्वीकार नहीं कर पाया कि हांड़-मांस का बना इंसान इतना निर्दयी कैसे हो सकता है? इसलिए उसके सबकॉन्शियस में यह बैठ गया कि ये इस दुनिया के लोग ही नहीं हैं। बुढ़ापे में भी वह बार-बार इसीलिए इस शब्द को ढाल बनाकर मार्शियन शब्द का इस्तेमाल करता है।
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