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सड़कें पिघलीं, रेड लाइट पिघलीं, पिघल गए गाड़ियों के टायर, यूरोप में गर्मी ने मचाया कहर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूरोप भीषण गर्मी से सुलग रहा है, जहाँ जर्मनी में एक्सप्रेसवे टूट गए हैं और ट्राम सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं। इटली-जर्मनी में ट्रैफिक लाइटें पिघलने के वीडियो सामने आए हैं। लू के कारण महाद्वीप में 1300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, जबकि युद्धग्रस्त यूक्रेन में पावर ग्रिड पर भारी दबाव है।

यूरोप इस समय एक अभूतपूर्व और जानलेवा लू की चपेट में है, जिसने पूरे महाद्वीप को भट्टी की तरह तपा दिया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि कई देशों से सड़कों और ट्रैफिक लाइटों के पिघलने के वीडियो सामने आ रहे हैं। इस रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने वहां के बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, परिवहन नेटवर्क और पावर ग्रिडों को पूरी तरह घुटनों पर ला दिया है, क्योंकि यूरोपीय देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर इतनी भीषम गर्मी को बर्दाश्त करने के लिए कभी बनाया ही नहीं गया था और वहां एयर कंडीशनिंग (AC) भी बहुत आम नहीं है।

जर्मनी में टूटकर बिखरने लगे हाईवे, बंद हुआ ट्रांसपोर्ट

जर्मनी में गर्मी का सबसे बुरा असर उसके ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर पड़ा है।

जर्मनी के बर्लिन को पश्चिमी हिस्से से जोड़ने वाले A2 मोटरवे का एक बड़ा हिस्सा गर्मी के कारण टूटकर बिखर गया। पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, हाईवे के लगातार टूटने के कारण एक के बाद एक इंटरचेंज को बंद करना पड़ रहा है। पूर्वी राज्य ब्रैंडनबर्ग के जीसार इलाके में तो हाईवे की हालत इतनी खराब हो गई है कि वहां गाड़ियों का चलना अब सुरक्षित नहीं रहा।

थम गए ट्राम के पहिए: लीपजिग शहर में बहुत ज्यादा तापमान के कारण डामर और कोलतार की सतहें पिघलने लगीं, जिसके चलते ट्राम सर्विस को पूरी तरह रोकना पड़ा।

बर्लिन में वाटर कैनन: राजधानी बर्लिन में स्थिति इतनी विकट हो गई कि पुलिस को सड़कों पर आम लोगों को राहत देने और ठंडा करने के लिए पानी की बौछारें चलानी पड़ीं।

फ्रांस और इटली: पिघलती सड़कें और ट्रैफिक लाइटें

फ्रांस में भी सड़कें पिघलने, बड़े पैमाने पर बिजली गुल होने और ट्रेनों की देरी के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

पिघलती लाइटें: सोशल मीडिया पर इटली और जर्मनी के कई ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें तेज धूप और गर्मी की वजह से प्लास्टिक की तरह पिघलती हुई दिखाई दे रही हैं।

मौतों का खौफनाक आंकड़ा और डूबने की घटनाएं

संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्वास्थ्य एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 21 जून के बाद से अब तक पूरे यूरोप में गर्मी के कारण 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।

गर्मी से निजात पाने के लिए जलाशयों में उतरने वाले लोगों के साथ हादसे हो रहे हैं। फ्रांस में 18 जून से अब तक डूबने के कारण 74 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पोलैंड में अकेले पिछले रविवार को 17 लोग डूब गए। इसके अलावा, बाल्कन देशों में सोमवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसके चलते बोस्निया के जंगलों में लगी भीषण आग से दमकलकर्मी जूझ रहे हैं।

डेनमार्क और युद्धग्रस्त यूक्रेन पर भी मार

चौंकाने वाली बात यह है कि पर्याप्त बिजली ग्रिड क्षमता के लिए मशहूर डेनमार्क भी इस बार हांफ रहा है। वहां के ऊर्जा मंत्रालय ने माना है कि कई इलाकों में ग्रिड की क्षमता पूरी तरह इस्तेमाल हो चुकी है और बिजली की बढ़ती मांग के आगे ग्रिड विस्तार की योजनाएं छोटी पड़ रही हैं।

दूसरी तरफ, रूस के साथ पिछले चार साल से युद्ध झेल रहा यूक्रेन अब इस भयंकर गर्मी की दोहरी मार झेल रहा है। यूक्रेन के कम से कम पांच बड़े क्षेत्रों (इवानो-फ्रैंकिवस्क से लेकर फ्रंटलाइन पर मौजूद जापोरीझझिया तक) में मंगलवार को बिजली के इस्तेमाल पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। बिजली कंपनी ‘यास्नो’ के सीईओ सर्गी कोवलेंको ने बताया कि चार साल से युद्ध और हवाई हमलों को झेल रहे उनके बिजली उपकरणों के लिए यह भीषण गर्मी अब तक की सबसे बड़ी और गंभीर परीक्षा साबित हो रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN