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यूरोप में सड़कें पिघल रहीं, अस्पताल भर रहे… फिर भी घरों में AC नहीं; जानें चौंकाने वाले कारण

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, सड़कें पिघल रही हैं, रेल सेवाएं ठप हो रही हैं और अस्पताल मरीजों की भीड़ से जूझ रहे हैं। लेकिन इस महाद्वीप के ज्यादातर घरों, स्कूलों और दफ्तरों में आज भी एयर कंडीशनिंग नहीं है।

यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस महाद्वीप के अधिकांश घरों, स्कूलों और कार्यालयों में आज भी एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है। दुनिया के सबसे गर्म देशों से आने वाले पर्यटक हैरान हैं कि इतनी आधुनिक सुविधाओं वाले यूरोप में कूलिंग सिस्टम क्यों नहीं अपनाया गया। बताया जाता है कि जलवायु चिंताओं, ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और शोर की आशंका ने यूरोप को लंबे समय से एयर कंडीशनिंग से दूर रखा है, लेकिन रिकॉर्डतोड़ गर्मी अब इस पुरानी नीति को सीधे चुनौती दे रही है।

बुनियादी ढांचा चरमरा गया

दरअसल, इस बार गर्मी ने पूरे यूरोप के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कें पिघल रही हैं, ट्राम की पटरियां टूट रही हैं, रेल सेवाएं ठप हो गई हैं, बिजली की मांग बढ़ने से संकट गहरा गया है और अस्पताल बढ़ती मरीज संख्या से जूझ रहे हैं। कई देशों में तापमान के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद एयर कंडीशनिंग को लेकर यूरोप का रवैया बेहद जटिल बना हुआ है।

अमेरिकी मॉडल से परहेज

यूरोपीय योजनाकार बाहरी एसी यूनिट्स की कतारों को न सिर्फ अनाकर्षक मानते हैं, बल्कि इन्हें ऐतिहासिक इलाकों की खूबसूरती के लिए खतरा भी समझते हैं। पेरिस की उप महापौर ऑड्रे पुलवर ने कहा कि हमारा लक्ष्य इतालवी, ब्राजीलियाई या अमेरिकी शहरों जैसा नहीं है, जहां इमारतों की दीवारें कन्वेक्टर यूनिट्स से भरी रहती हैं। ये यूनिट्स भारी शोर, गर्मी और प्रदूषण फैलाती हैं। पेरिस जैसे शहरों में हॉसमैन-युग की प्रसिद्ध इमारतों के चूना पत्थर वाले अग्रभागों पर एसी यूनिट लगाने के प्रस्ताव को आसानी से खारिज कर दिया जाता है।

इतना ही नहीं कई यूरोपीय देशों में एयर कंडीशनर लगाना केवल मालिक का एकतरफा फैसला नहीं होता। अपार्टमेंट में रहने वालों को पड़ोसियों और स्थानीय प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ती है। फ्रांस में कानून भवन निर्माण संघों को यह अधिकार देता है कि यदि एसी यूनिट शोर की निर्धारित सीमा (लगभग हल्की हवा जितनी) का उल्लंघन करती है तो वे आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। शोर संबंधी मामलों के विशेषज्ञ वकील क्रिस्टोफ सैन्सन ने बताया कि उनकी फर्म वर्तमान में एयर कंडीशनिंग से जुड़े 100 से अधिक मुकदमे संभाल रही है। उन्होंने कहा कि यह ऐसी ध्वनि है जो कंक्रीट को भेद सकती है और बेहद परेशान करने वाली होती है।

विकल्पों पर जोर

यूरोप लंबे समय से एयर कंडीशनरों को ऊर्जा-गहन मशीन मानता रहा है, जो उसके जलवायु लक्ष्यों को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए सरकारें बेहतर इन्सुलेशन, प्राकृतिक वेंटिलेशन, शटर, पेड़ों का आवरण और शहरी हरियाली जैसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (IPCC) अत्यधिक गर्मी में लोगों की सुरक्षा के लिए एयर कंडीशनिंग को सबसे प्रभावी उपाय मानता है।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की जलवायु वैज्ञानिक राधिका खोसला ने कहा कि इसे हर जगह नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करना चाहिए। फ्रांस की जलवायु मंत्री मोनिका बारबट ने साफ कहा कि मैं उन लोगों से भयभीत हूं जो कहते हैं कि हर जगह एसी लगा दो। क्या इससे जंगल की आग रुकेगी? क्या फसलें बच जाएंगी?

40 डिग्री के लिए तैयार नहीं यूरोप

यूरोप के अधिकांश भवन और बुनियादी ढांचे ठंडी जलवायु को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। फ्रांस में केवल 25 प्रतिशत घरों और ब्रिटेन में महज 5 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनिंग है, जबकि इटली में यह आंकड़ा 56 प्रतिशत है। हालिया गर्मी में हजारों स्कूल बंद कर दिए गए, दफ्तरों ने कामकाज घटाया और रेल सेवाएं प्रभावित रहीं। अर्थशास्त्रियों ने इसे महामारी काल के लॉकडाउन की याद दिलाने वाला बताया। पेरिस में पिछले सप्ताह तापमान 40 डिग्री पार कर गया, जो 19वीं शताब्दी में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद केवल चौथी बार हुआ है।

एसी अब राजनीतिक मुद्दा बन गया

गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनिंग अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। फ्रांस की अति दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने कहा कि यह भीषण गर्मी जानलेवा है। हमें पूरे देश में व्यापक एयर कंडीशनिंग योजना लागू करनी होगी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच बदलाव के संकेत भी दिख रहे हैं। इंग्लैंड में पोर्टेबल एसी यूनिट्स की बिक्री बढ़ रही है और लंदन के मेयर सादिक खान ने स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों में कूलिंग सिस्टम लगाने की वकालत की है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN