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प्रशांत महासागर में उठा फ्रांस के आकार का महाविनाशकारी ‘टाइफून बावी’ ताइवान और चीन की ओर बढ़ रहा है। 200kmph की रफ्तार वाले इस तूफान के कारण ताइवान, चीन और जापान में हाई अलर्ट जारी है।
प्रशांत महासागर में उठा शक्तिशाली टाइफून बावी गुरुवार को ताइवान के दक्षिण-पूर्व में पहुंच गया है। हालांकि रात भर में इसकी हवाओं की गति में मामूली कमी आई है और यह 200 किलोमीटर प्रति घंटे के करीब पहुंच गई है, लेकिन इसका खतरा अभी भी बहुत बड़ा है। प्रशासन ने इसे कई वर्षों में सबसे शक्तिशाली तूफान बताते हुए निवासियों से जरूरी सामानों का स्टॉक करने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की है।
तूफान का विशाल आकार और संभावित रास्ता
वर्तमान में यह तूफान अपने सबसे चौड़े बिंदु पर लगभग 1,000 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह आकार में लगभग फ्रांस देश की चौड़ाई के बराबर है।
चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, यह तूफान ताइवान के उत्तरी हिस्से को छूते हुए शनिवार शाम को चीन के पूर्वी फुजियान प्रांत के तटों से टकराएगा।
ताइवान के केंद्रीय मौसम प्रशासन के अधिकारी जेसन चांग ने बताया कि आकार के लिहाज से यह 1987 के बाद ताइवान से टकराने वाला सबसे बड़ा तूफान है। हाल के वर्षों में इतने बड़े आकार के तूफान आना बहुत दुर्लभ रहा है।
जलवायु परिवर्तन और ‘अल नीनो’ का प्रभाव
भारत के पड़ोसी देश और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले चीन में हाहाकार मचा है। इसके अलावा, जापान और ताइवान जैसे देश जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार विनाशकारी मौसमी घटनाओं का सामना कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के लिए यह साल विशेष चिंता का विषय है क्योंकि ‘अल नीनो’ प्रभाव के उभरने की उम्मीद है। अल नीनो के कारण समुद्र का तापमान बढ़ता है, जिससे इस तरह के टाइफून अधिक बार और कहीं ज्यादा विनाशकारी रूप में आते हैं।
एक्यूवेदर के अनुसार, अगर टाइफून बावी अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखता है, तो यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2024 में आए ‘सुपर टाइफून कोंग-रे’ के बाद सबसे शक्तिशाली तूफान बन जाएगा।
देशों की तैयारियां और चेतावनियां
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने फेसबुक के जरिए जनता से अपील की है कि वे भोजन और टॉर्च जैसे जरूरी सामानों का स्टॉक कर लें। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें ‘इमरजेंसी ग्रैब बैग’ तैयार करने का तरीका बताया गया है, जो किसी भी संकट के दौरान तीन दिनों तक जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने अपने सबसे दक्षिणी हिस्से, ओकिनावा प्रांत के निवासियों को शुक्रवार और शनिवार के लिए हाई अलर्ट पर रखा है। यहां तेज हवाएं चलने, भूस्खलन, बाढ़ और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की चेतावनी जारी की गई है।
चीन और ताइवान पर मंडराता खतरा
एक्यूवेदर के अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान विशेषज्ञ जेसन निकोल्स ने बताया कि गुरुवार से हवा की गति थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह एक बेहद खतरनाक तूफान बना रहेगा जो शुक्रवार से सोमवार के बीच ताइवान और पूर्वी चीन में भारी तबाही मचा सकता है।
विशेषज्ञों की राय: तबाही की आशंका
इंपीरियल कॉलेज लंदन के उष्णकटिबंधीय चक्रवात अनुसंधान वैज्ञानिक, जियांगबो फेंग ने इस तूफान की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा: “हमें बावी पर बहुत बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इसने खुले प्रशांत महासागर के ऊपर एक लंबा समय बिताया है, जहां इसने समुद्र के गर्म पानी से भारी मात्रा में ऊर्जा और नमी सोख ली है।” उन्होंने चेतावनी दी कि जब यह तूफान तटीय इलाकों से टकराएगा, तो नुकसान विनाशकारी हो सकता है। तूफान के रास्ते (ट्रैक) में एक छोटा सा बदलाव भी इसके प्रभाव को गंभीर रूप से बदल सकता है।
क्या भारत पर भी इसका असर होगा?
मौसम विज्ञान के डेटा के अनुसार, टाइफून बावी का भारत पर सीधा कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दरअसल यह महातूफान प्रशांत महासागर में बना है और इसका ट्रैक उत्तर-पश्चिम की ओर यानी ताइवान, पूर्वी चीन और दक्षिणी जापान है, इसलिए भारत के किसी भी तटीय इलाके में इसके टकराने की कोई आशंका नहीं है।
हालांकि, मौसम विज्ञान के नजरिए से प्रशांत महासागर के इतने विशाल तूफानों का एशियाई मौसम प्रणालियों पर अप्रत्यक्ष असर जरूर देखने को मिलता है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, टाइफून बावी के विशाल घेरे के कारण फिलीपींस और दक्षिण-चीन सागर के आसपास चलने वाला दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Habagat) काफी तीव्र हो गया है। बावी के असर से वहां भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। इसका मतलब है कि तूफान ने उस क्षेत्र के मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा दे दी है, जो आमतौर पर भारतीय सिस्टम से नमी को दूर ले जाता है।
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