Source :- LIVE HINDUSTAN
करीब 6 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत और चीन के बीच हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकी ला (Shipki La) दर्रे से पारंपरिक सीमा व्यापार एक बार फिर शुरू हो गया है। कोविड-19 महामारी और सीमा पर बढ़े तनाव के कारण साल 2020 में इस ऐतिहासिक व्यापार मार्ग को बंद कर दिया गया था। अब इसके दोबारा खुलने से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को रोजगार, व्यापार और पर्यटन के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
30 नवंबर तक खुला रहेगा यह व्यापारिक मार्ग
करीब 3,930 मीटर की ऊंचाई पर सतलुज घाटी में स्थित शिपकी ला दर्रा सदियों पुराने सिल्क रूट का हिस्सा रहा है। यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है। इस साल यह व्यापारिक मार्ग 30 नवंबर तक खुला रहेगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और पर्यटन उद्योग को सीधा फायदा मिलने की संभावना है।
बार्टर सिस्टम के तहत कारोबार
इस व्यापार की सबसे खास बात यह है कि यहां आज भी बार्टर सिस्टम (वस्तु विनिमय) के तहत कारोबार होता है, यानी यहां सामान के बदले सामान का आदान-प्रदान किया जाता है, न कि नकद लेनदेन। भारतीय व्यापारी अपना माल सड़क मार्ग से सीमा तक पहुंचाते हैं, जिसके बाद सामान को खच्चरों और अन्य भारवाहक जानवरों के जरिए तिब्बत की ओर तय स्थान तक ले जाया जाता है।
72 घंटे के अंदर भारत लौटना अनिवार्य
व्यापार प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए बने छुप्पन ट्रेड मार्ट (Chhuppan Trade Mart) का उद्घाटन भी किया गया है। यहां कस्टम क्लियरेंस और व्यापारियों का पंजीकरण किया जाएगा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में केवल रजिस्टर्ड व्यापारियों को ही अनुमति मिलेगी। उन्हें सीमा पार व्यापार पूरा करके 72 घंटे के अंदर भारत लौटना अनिवार्य होगा।
आयात-निर्यात में क्या होगा शामिल?
इस व्यापार व्यवस्था के तहत भारत से सूखे मेवे, मसाले, चाय, कॉफी, अनाज, हथकरघा उत्पाद, तांबे के बर्तन, प्रोसेस्ड फूड और औषधीय जड़ी-बूटियां निर्यात की जा सकेंगी। वहीं, तिब्बत से पश्मीना, कच्ची ऊन, याक के बाल, भेड़ की खाल, कालीन, चाइना क्ले और पारंपरिक हर्बल उत्पाद भारत लाए जा सकेंगे। हालांकि, इस बार घोड़े, बकरी और भेड़ जैसे जीवित पशुओं के व्यापार की अनुमति नहीं दी गई है, क्योंकि जिले में अभी क्वारंटीन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट का मानना है कि शिपकी ला व्यापार मार्ग का दोबारा खुलना सिर्फ आर्थिक ही नहीं बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और भारत-चीन के बीच पारंपरिक सीमा व्यापार को नई गति मिलेगी। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ताओं के बाद यह कदम रिश्तों में नरमी का संकेत भी माना जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में सीमावर्ती व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को इससे नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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