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कांच और प्लास्टिक नहीं चूड़ियां बनाने के लिए 6 तरह के मैटेरियल होते हैं इस्तेमाल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कांच की चूड़ी सुहाग और सौभाग्य की निशानी मानी जाती है। लेकिन केवल कांच ही नहीं भारत के अलग-अलग हिस्सों में सुहागिन महिलाओं के लिए कांच के अलावा इन मैटेरियल से बनी चूड़ियों को शुभ माना जाता है।

महिलाओं का शृंगार चूड़ी के बिना अधूरा लगता है। विवाहित हो या फिर अविवाहित हाथों में कंगन और चूड़ी तो सबको भाती है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि चूड़ियां आखिर कांच की ही क्यों बनती है? तो हम बता दें कि चूड़ियां केवल कांच नहीं बल्कि पूरे भारत में अलग-अलग मैटेरियल से बनाई जाती है। अब आप बंगालियों की शंख से बनी चूड़ियों के बारे में तो थोड़ा बहुत जानती होंगी। लेकिन क्या ये जानती हैं कि चूड़ियां भारत के हर राज्य में सुहाग और सौभाग्य से जुड़ी हैं और अलग-अलग मैटेरियल से बनी हुई पहनी जाती हैं। आमतौर पर ये 6 तरह की चूड़ियां काफी फेमस है।

कांच की चूड़ियां

यूपी, बिहार और उत्तरी राज्यों में कांच से बनी चूड़ियों को सुहाग की निशानी माना जाता है। शादी के बाद माना जाता है कि महिलाओं को हमेशा कांच की चूड़ियां ही पहननी चाहिए। केवल सोना, लोहा या किसी मेटल से बनी चूड़ी को पहनना अशुभ होता है।

लाख के कंगन

राजस्थान में लाख के मोटे कंगनों को हमेशा से पहना जाता है। ये कंगन हाथ के बने होते हैं और काफी मजबूत रहते हैं। लाख एक तरह की नेचुरल रेजिन होती है, जिसे आग में पिघलाकर गोल कंगन का आकार दिया जाता है और कई तरह के डिजाइन और पैटर्न इस पर सजाते हैं।

बांस की चूड़ियां

भारत के नॉर्थ ईस्ट हिस्से में बांस की चूड़ियों को पहनने का ट्रेडिशन है। चूंकि इस एरिया में बांस ज्यादा होते हैं तो बाकी सारी चीजों की तरह की बांस की चूड़ियां भी बनाई जाती थीं। अब ये बांस की चूड़ी, ब्रेसलेट हैंडमेड होने की वजह से काफी महंगे दामों में मार्केट में मिलते हैं।

शंख और सीप से बनी चूड़ियां

बंगालियों में शाख-पोला सुहागिन महिलाओं को पहनाया जाता है। शाख जो सफेद रंग की चूड़ी होती है वो शंख से बनाई जाती है। वहीं लाल रंग की चूड़ियों को कोरल यानी मूंग से बनाया जाता है। बंगाल समुद्री एरिया है तो वहां पर आसानी से शंख और सीप मिलती है। जिनकी चूड़ियां बनाना बंगाल की पुरानी परंपरा है।

सोने की चूड़ियां

केरल, कर्नाटक जैसे दक्षिण भारत के राज्यों में सोने से बनी खोखली चूड़ियों को पहनने की परंपरा है। जैसे कर्नाटक में सोने के ब्रेसलेट पहने जाते हैं तो वहीं केरल में मोटे और चौड़े सोने के कंगन पहनने की परंपरा होती है।

हाथी दांत से बने चूड़े

चूंकि हाथी के दांत अब पूरी तरह से बैन हो चुके हैं इसलिए अब प्लास्टिक जैसे मैटेरियल से चूड़ा बनाए जाने लगे। लेकिन पुराने समय में शादी में दुल्हन के हाथ में पहनाए जाने वाले चूड़े हाथी दांत के बने होते थे।

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