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बच्चों को एडिक्ट बना रहा सोशल मीडिया, US में Meta की मुश्किलें बढ़ीं; अमेरिकी कर रहे बैन की मांग

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त सरकारी नियंत्रण और 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एज-वेरिफिकेशन की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही बैन की मांग कर रहे हैं…

सोशल मीडिया अब रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम या व्हाट्सऐप खोलकर अपनों की खबर लेते हैं। करोड़ों लोग इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों के कारोबारी तरीकों पर ज्यादा सरकारी नियंत्रण चाहते हैं। इसमें छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए एज-वेरिफिकेशन टूल्स की अनिवार्यता भी शामिल है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब मेटा प्लेटफॉर्म्स और गूगल के यूट्यूब जैसी कंपनियों पर युवा यूजर्स के साथ व्यवहार को लेकर कानूनी दबाव बढ़ रहा है।

सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त निगरानी

पोल में लगभग 61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त निगरानी जरूरी है। इनमें 71 प्रतिशत डेमोक्रेट और 62 प्रतिशत रिपब्लिकन शामिल हैं। स्वतंत्र मतदाताओं का समर्थन अपेक्षाकृत कम रहा। पोल में 66 प्रतिशत लोगों ने उन कानूनों का समर्थन किया जिनके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 16 साल से कम उम्र के बच्चों को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए एज-वेरिफिकेशन टूल का इस्तेमाल करना होगा। रिपब्लिकन में समर्थन सबसे ज्यादा (74 प्रतिशत) रहा, जबकि डेमोक्रेट्स में यह 69 प्रतिशत था।

किसी को तो यह करना ही होगा

टेनेसी के 60 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर जेम्स बॉसरडेट, जिन्होंने 2024 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था, कहते हैं कि वे आमतौर पर सरकार का लोगों की जिंदगी में हस्तक्षेप कम रखना चाहते हैं, लेकिन सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती एक अपवाद है। बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी को तो यह करना ही होगा। क्या यह सरकार का काम है? मैं नहीं चाहता कि यह हो, लेकिन मुझे लगता है कि शायद यह होना चाहिए। अमेरिकी कांग्रेस ने अब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई व्यापक कानून पारित नहीं किया है।

बच्चों को एडिक्ट बना रहा सोशल मीडिया

पोल में पाया गया कि 85 प्रतिशत अमेरिकी मानते हैं कि सोशल मीडिया बच्चों के लिए नशे की लत पैदा कर सकता है। इतने ही लोग मानते हैं कि इसका इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वाशिंगटन डीसी के 34 वर्षीय क्रिस्टोफर चेन कहते हैं कि सोशल मीडिया कंपनियों का किशोरों पर बहुत ज्यादा प्रभाव है और टेक कंपनियां यूजर्स को दिखने वाली सामग्री पर अत्यधिक नियंत्रण रखती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि नियमन कैसा होना चाहिए, लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए।

73 वर्षीय पाउला डिक कहती हैं कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों को गलत कंटेंट से दूर रखने में बेहतर काम कर सकती हैं और उनके ऐप्स पर सरकार की ज्यादा निगरानी होनी चाहिए। कैनसस में रहने वाली डिक, जिन्होंने 2024 में ट्रंप को वोट दिया था, बताती हैं कि वे अपने पोते-पोतियों को यूट्यूब नहीं देखने देतीं, लेकिन बच्चे फिर भी पहुंच बनाने के तरीके खोज लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास माता-पिता द्वारा लगाए गए ब्लॉक्स से बचने के तरीके हैं। इस मामले में वे काफी होशियार हैं।

यूजर्स को सोशल मीडिया पसंद है

वहीं, ज्यादातर अमेरिकी सोशल मीडिया को पसंद भी करते हैं। 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर बिताया गया समय मजेदार होता है, जबकि सिर्फ 35 प्रतिशत ने इसे तनावपूर्ण बताया। लोग इस बात पर बंटे हुए हैं कि वे इसका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं। 52 प्रतिशत का कहना है कि वे रोज सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा समय बिताते हैं, जबकि 43 प्रतिशत इससे इनकार करते हैं। बता दें कि इस ऑनलाइन पोल में 4505 अमेरिकियों ने भाग लिया था।

बुधवार को एक मुकदमे पर होगी सुनवाई

बता दें कि वकीलों के आरोपों पर बुधवार को एक मुकदमे की सुनवाई शुरू होने की उम्मीद है। आरोप है कि मेटा ने अपने प्रोडक्ट्स युवा यूजर्स को आदी बनाने के लिए डिजाइन किए हैं। मेटा इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि अगर राज्य जीत गए तो कंपनी पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है। न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने गुरुवार को मेटा को टीन मेंटल हेल्थ फंड में 567 मिलियन डॉलर देने और युवा यूजर्स के लिए प्लेटफॉर्म के कामकाज में बदलाव का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि कंपनी बच्चों की भलाई को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है।

देशभर के कानून निर्माता टेक कंपनियों के युवाओं पर प्रभाव पर नजर रखे हुए हैं। एक दर्जन से ज्यादा राज्यों ने नाबालिगों के सोशल मीडिया एक्सेस को नियंत्रित करने वाले कानून पास कर दिए हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने के लिए यह जरूरी है। मेटा, टिकटॉक और स्नैप जैसे दिग्गजों का समर्थन करने वाले ट्रेड ग्रुप नेटचॉइस ने इन कानूनों के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं। उनका तर्क है कि उम्र सत्यापन अनिवार्य करने वाले कानून मुक्त अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN