Home rss business hindi गौतम अडानी को रिश्वत मामले में बड़ी राहत, अमेरिकी कोर्ट ने खारिज...

गौतम अडानी को रिश्वत मामले में बड़ी राहत, अमेरिकी कोर्ट ने खारिज किया केस

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को सोमवार को खारिज कर दिया। यह फैसला अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा मामला वापस लेने के फैसले के बाद आया है। ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला जज निकोलस गारौफिस ने सरकारी वकीलों की इस दुर्लभ अपील को मंजूरी दे दी, हालांकि उन्होंने पहले इसके पीछे के कारणों को समझने की कोशिश की थी।

जज ने अडानी से यह भी पूछा था कि क्या मामला खारिज करने के बदले में उन्हें कोई वादा या प्रलोभन दिया गया था। गौरतलब है कि साल 2024 में आरोप सामने आने से पहले अडानी ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था, लेकिन जज ने स्पष्ट किया कि इस निवेश प्रस्ताव का न्याय विभाग के फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

फैसले के बाद अडानी ने क्या कहा

अदालत के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता के साथ स्वागत करता हूं और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरा सम्मान रखता हूं। इस चुनौतीपूर्ण दौर में सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारी आस्था अटूट रही।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने हम पर, व्यवस्था पर और भारत की न्याय क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। हम अपना काम जारी रखेंगे, राष्ट्र के लिए निर्माण, स्थायी मूल्य सृजन और एक बड़े उद्देश्य की पूर्ति। यही हमारी प्रतिबद्धता है। जय हिंद।”

आखिर क्या था मामला?

साल 2024 में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके बेटे सागर अडानी सहित अन्य पर आरोप लगे थे कि उन्होंने भारत में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी ताकि उनकी कंपनी को एक सोलर एनर्जी प्लांट लगाने की मंजूरी मिल सके। इसके बाद अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का भी आरोप था, क्योंकि कंपनी ने अपनी भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों के बारे में भ्रामक जानकारी दी थी।

न्याय विभाग ने कहा था कि मामला कानूनी रूप से कमजोर

इस साल मई में अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से इस मामले को खारिज करने का अनुरोध किया था। 4 जुलाई को न्याय विभाग ने अदालत को बताया कि “यह मामला पहले कभी नहीं उठाया जाना चाहिए था।”

विभाग ने साफ कहा कि यह मामला कानूनी रूप से कमजोर है और ज्यादातर भारत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि “अमेरिका का दुनिया का पुलिस बनना कूटनीतिक तनाव पैदा कर सकता है और घरेलू मुद्दों पर खर्च होने वाले संसाधनों को बर्बाद करता है।” न्याय विभाग ने यह भी कहा कि “भारत अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं को ब्रुकलीन या वॉशिंगटन के वकीलों से बेहतर संभाल सकता है।”

इनपुट: ब्लूमबर्ग, ANI

SOURCE : LIVE HINDUSTAN