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इन 6 ब्लूचिप शेयरों पर ₹18000 करोड़ का उल्टा दांव, ‘बड़ों’ ने बेचा, ‘छोटों’ ने खरीदा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

शेयर बाजार में गिरावट के दौरान खरीदारी करना कई निवेशकों की पसंदीदा रणनीति होती है। जून तिमाही में रिटेल इन्वेस्टर्स ने इसी रणनीति पर बड़ा दांव लगाया। उन्होंने इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और आईटीसी जैसे बड़े शेयरों में करीब 17,914 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि इस दौरान इन सभी शेयरों में गिरावट आई थी।

इसे बाजार की भाषा में कॉन्ट्रेरियन बेट यानी बाजार की मौजूदा दिशा के उलट निवेश माना जा सकता है। सवाल है कि क्या ये दांव आने वाले समय में रिटेल इन्वेस्टर्स को फायदा देगा?

इंफोसिस में सबसे ज्यादा खरीदारी

छह कंपनियों में सबसे ज्यादा खरीदारी इंफोसिस में हुई। रिटेल इन्वेस्टर्स ने करीब 3,864 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज में 3,764 करोड़ रुपये और टीसीएस में 3,291 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई।

कंपनी रिटेल इन्वेस्टर्स की खरीदारी (करोड़ रुपये में) गिरावट
इन्फोसिस 3864 20%
रिलायंस इंडस्ट्रीज 3764 4%
एचसीएल टेक 1923 20%
ITC 1920 0.26%
विप्रो 3152 9%

इन आंकड़ों के अनुसार, चार आईटी कंपनियों इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल टेक में ही करीब 12,230 करोड़ रुपये लगाए गए।

बड़े निवेशक बेच रहे थे, खुदरा निवेशक खरीद रहे थे

इस खरीदारी को खास इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान बड़े संस्थागत निवेशकों का रुख कई मामलों में अलग था। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में करीब 26,011 करोड़ रुपये की बिक्री की। वहीं विप्रो में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 6,058 करोड़ रुपये और म्यूचुअल फंड्स ने करीब 5,321 करोड़ रुपये की बिक्री की। इसके उलट रिटेल इन्वेस्टर्स ने विप्रो में 3,152 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

गिरे शेयरों में नए निवेशकों की भी एंट्री

इन कंपनियों में रिटेल इन्वेस्टर्स की संख्या भी बढ़ी। विप्रो में करीब 4.08 लाख, रिलायंस में 2.20 लाख, इंफोसिस में 2.04 लाख, टीसीएस में 1.50 लाख और एचसीएल टेक में 1.41 लाख नए खुदरा निवेशक जुड़े। इससे संकेत मिलता है कि गिरते बड़े शेयरों को कई छोटे निवेशकों ने लंबी अवधि के मौके के तौर पर देखा।

लेकिन आंकड़ा एक बड़ी चेतावनी भी दे रहा है

गिरे हुए शेयर खरीदने की रणनीति हमेशा काम करे, ऐसा जरूरी नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जून तिमाही में जिन 1,130 कंपनियों में रिटेल इन्वेस्टर्स ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, उनके शेयर औसतन 24% चढ़े। इसके उलट, जिन 1,051 कंपनियों में रिटेल इन्वेस्टर्स ने हिस्सेदारी घटाई, वे औसतन 35.79% चढ़ीं।

यानी इस अवधि में रिटेल इन्वेस्टर्स द्वारा बेचे गए शेयरों ने खरीदे गए शेयरों की तुलना में औसतन 11.57 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन किया। यह आंकड़ा भविष्य में भी यही होगा, इसकी गारंटी नहीं है, लेकिन यह जरूर बताता है कि केवल गिरावट देखकर शेयर खरीदना सफल रणनीति साबित नहीं हुई।

सबसे बड़ा दांव आईटी सेक्टर पर

रिटेल इन्वेस्टर्स के करीब 18,000 करोड़ रुपये के दांव में सबसे बड़ा हिस्सा आईटी कंपनियों का है। यही इस रणनीति का सबसे बड़ा जोखिम भी है। इसीलिए विशेषज्ञों की राय में पूरे आईटी सेक्टर पर एक साथ दांव लगाने के बजाय चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है।

आईटी कंपनियों की कमाई काफी हद तक अमेरिका और यूरोप के कॉरपोरेट टेक्नोलॉजी खर्च पर निर्भर करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल और वैश्विक टेक खर्च को लेकर अनिश्चितता के कारण इन कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।

क्या इन शेयरों में मौका भी है?

जोखिम के बावजूद बड़ी कंपनियों के मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर कुछ विशेषज्ञ सकारात्मक हैं। क्वांटम म्यूचुअल फंड के क्रिस्टी मथाई के मुताबिक बड़े शेयरों के वैल्यूएशन अपने औसत स्तर से नीचे हैं, इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका बन सकता है। हालांकि, निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है।

अब क्या तय करेगा 18,000 करोड़ के दांव का भविष्य?

आने वाले समय में इन शेयरों के प्रदर्शन का फैसला सिर्फ इस बात से नहीं होगा कि वे पहले कितना गिर चुके हैं। असल परीक्षा कंपनियों की कमाई और भविष्य के कारोबार की होगी।

खासकर आईटी कंपनियों में अगर अमेरिका और यूरोप से टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ता है और कमाई में सुधार आता है तो रिटेल इन्वेस्टर्स का यह कॉन्ट्रेरियन दांव सफल हो सकता है। लेकिन अगर वैश्विक टेक खर्च कमजोर रहा और कंपनियों की कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, तो केवल सस्ते वैल्यूएशन के आधार पर की गई खरीदारी दबाव में आ सकती है।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN