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मिडिल ईस्ट में रचा इतिहास: लेबनान ने खत्म की मौत की सजा, संसद से पास हुआ ऐतिहासिक बिल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लेबनान मौत की सजा को औपचारिक रूप से खत्म करने वाला मिडिल ईस्ट का पहला देश बन गया है। संसद ने इस ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी देते हुए देश में फांसी की प्रथा को कानूनी रूप से खत्म कर दिया है।

लेबनान मंगलवार को मौत की सजा को औपचारिक रूप से समाप्त करने वाला मिडिल ईस्ट का पहला देश बन गया है। यह ऐतिहासिक फैसला देश की संसद द्वारा पारित किया गया, जिसने मौत की सजा को कानूनी रूप से खत्म करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। संसद अध्यक्ष के कार्यालय ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि लेबनान में मौत की सजा समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किए गए कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के साथ लेबनान मिडिल ईस्ट में पहला ऐसा देश बन गया है जिसने इस प्रथा को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है। गौरतलब है कि देश में 2004 के बाद से किसी भी कैदी को फांसी की सजा नहीं दी गई, लेकिन कानूनी प्रावधान अब तक कायम थे।

बहुमत से पारित हुआ कानून

लेबनान की संसद में इस विधेयक पर मतदान के दौरान ज्यादातर सांसदों ने समर्थन किया। विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने हालांकि सख्त अपराधों के लिए सख्त सजाओं की जरूरत पर जोर दिया, लेकिन अंत में बहुमत के साथ कानून पारित हो गया। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश को क्षेत्रीय स्तर पर मानवाधिकारों का अग्रणी देश बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। न्याय मंत्री आदिल नासर ने इस कदम को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया।

उन्होंने बताया कि मौत की सज़ा के कानूनी अस्तित्व के कारण पहले बेरूत उन देशों से संदिग्धों का प्रत्यर्पण नहीं करवा पा रहा था, जहां मौत की सज़ा को गैरकानूनी माना जाता है। कई यूरोपीय और अन्य देशों में यह सजा प्रतिबंधित होने के कारण लेबनान को अंतरराष्ट्रीय सहयोग में बाधाओं का सामना करना पड़ता था। नासर ने कहा कि नया कानून न केवल मानवाधिकारों की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा।

मौत की सजा अब आजीवन कारावास में बदल जाएंगी

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान शोधकर्ता रामजी कैस ने न्यूज एजेंसी एएफपी को दिए बयान में इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम देश में मानवाधिकारों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रयास है। यह क्रूर और मनमानी सजा से स्पष्ट रूप से अलग है, जिसे कभी लागू नहीं किया जाना चाहिए था। इस दौरान कैस ने जोर देते हुए बताया कि मौत की सजा न केवल मानवीय गरिमा के खिलाफ है, बल्कि न्याय प्रणाली में त्रुटियों के कारण निर्दोष लोगों को भी प्रभावित कर सकती है।

बता दें कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने लंबे समय से लेबनान से मौत की सजा खत्म करने की मांग की थी। कई रिपोर्टों में बताया गया था कि मौत की सजा अक्सर राजनीतिक दबाव, गरीब वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ ज्यादा इस्तेमाल की जाती रही है। नए कानून के लागू होने के बाद मौजूदा मौत की सजा की सजाएं भी आजीवन कारावास में बदल दी जाएंगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN