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यूक्रेन हथियार डील में ‘इंडियन कनेक्शन’, ₹7818160000 फंसे; एस्टोनिया के रक्षा मंत्री का इस्तीफा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। विवाद उस सौदे को लेकर है, जिसमें यूक्रेन के लिए तोपखाने के गोले खरीदने हेतु यूरोपीय संघ की करीब 70 मिलियन यूरो की राशि उन कंपनियों को अग्रिम दी गई, जिनका पहले गोले बनाने या बेचने का कोई अनुभव नहीं था।

विदेशी कंपनियों से हथियार सौदों में दलाली और अनियमितताओं के चलते दुनिया के कई देशों में मंत्रियों से लेकर सैन्य कमांडरों तक को इस्तीफा देना पड़ा है। कई बार तो पूरी सरकारें सत्ता से हाथ धो बैठी हैं। अब यूरोपीय देश एस्टोनिया में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उस विवाद के बाद उठाया गया, जिसमें यूक्रेन के लिए तोपखाने के गोले खरीदने के नाम पर यूरोपीय संघ की करीब 70 मिलियन यूरो (लगभग 781 करोड़ भारतीय रुपये) की राशि उन कंपनियों को एडवांस दी गई, जिनका पहले तोप के गोले बनाने या बेचने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। इस सौदे में भारतीय कंपनी से जुड़े हित भी बताए जा रहे हैं।

इस्तीफे के बाद पेवकुर ने कहा कि भले ही सौदे की बारीकियों में उनकी सीधी भूमिका न रही हो, लेकिन रक्षा क्षेत्र की राजनीतिक जिम्मेदारी उन्हें स्वीकार करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री का काम अनुबंधों की हर पंक्ति पढ़ना या गोला-बारूद गिनना नहीं होता, फिर भी इस मामले में राजनीतिक जवाबदेही उन पर आती है।

क्या था विवादित सौदा?

एस्टोनियाई सार्वजनिक प्रसारक ईआरआर और स्थानीय अखबार ईस्ती एक्सप्रेस की रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में एस्टोनियाई रक्षा निवेश केंद्र ने यूक्रेन के लिए बड़े कैलिबर तोपखाने के गोले खरीदने के कई अनुबंध किए। इन सौदों के तहत यूरोपीय संघ की यूरोपीय शांति सुविधा से करीब 70 मिलियन यूरो का अग्रिम भुगतान किया गया। अनुबंध इटली में पंजीकृत कंपनी डाटासल एसआरएल से जुड़े थे।

रिपोर्टों में कहा गया है कि इस कंपनी का अधिग्रहण भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशंस ने किया था। संबंधित कंपनियों का पहले तोप के गोले बेचने का कोई कोई इतिहास नहीं था। पहला अनुबंध अगस्त 2024 में हुआ और उसके बाद कई किस्तों में अग्रिम राशि भेजी गई। शुरुआती खेप नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचनी थी, लेकिन समय पर निर्धारित गुणवत्ता वाली आपूर्ति नहीं हो सकी।

एस्टोनियाई अधिकारियों का कहना है कि जो सामग्री बाद में मिली, वह पर्याप्त गुणवत्ता की नहीं थी या अधूरी थी। इसलिए गोले यूक्रेन के मोर्चे तक नहीं भेजे गए। एस्टोनिया ने अनुबंध रद्द करने और अग्रिम राशि वापस लेने की कोशिश की। मामला अब घरेलू अदालत के साथ-साथ स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय मध्यस्थता न्यायालय में भी विचाराधीन है।

दूसरी ओर, कंपनी पक्ष का दावा है कि उसने बड़ी मात्रा में सामग्री दे दी थी और एस्टोनिया द्वारा अनुबंध अचानक समाप्त किए जाने से उसे नुकसान हुआ। विवाद अभी अदालत और मध्यस्थता के स्तर पर चल रहा है।

पेवकुर ने क्या कहा?

2022 से रक्षा मंत्री रहे पेवकुर ने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि मंत्री मोजे और गोला-बारूद की गिनती नहीं करते, न ही वे खुद अनुबंध वार्ता करते हैं। लेकिन नेशनल ऑडिट ऑफिस की रिपोर्ट, खासकर सशस्त्र बलों और रक्षा निवेश केंद्र की गतिविधियों को लेकर, राजनीतिक जिम्मेदारी का सवाल खड़ा करती हैं।

इस दौरान उन्होंने दोहराया कि यूक्रेन को समर्थन देने का मूलभूत फैसला राजनीतिक स्तर पर लिया जाता है, जबकि ठेकेदार चुनने और अनुबंध तैयार करने का काम खरीद एजेंसी का होता है। उनके अनुसार, उन्होंने संबंधित अनुबंध पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़े थे, क्योंकि रक्षा मंत्री आमतौर पर हर खरीद सौदे की बारीकियों में नहीं जाते हैं।

ऑडिट रिपोर्ट और आलोचना

बता दें कि पिछले महीने एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखापरीक्षा कार्यालय ( National Audit Office) ने देश के रक्षा खर्च, सैन्य निवेश और खरीद प्रक्रिया की तीखी आलोचना की थी। रिपोर्ट में रक्षा निवेश केंद्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। गोला-बारूद सौदा इसी व्यापक आलोचना के बीच सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गया। विपक्ष और मीडिया ने पूछा कि बिना अनुभव वाली कंपनी को इतनी बड़ी अग्रिम राशि कैसे मंजूर हुई और निगरानी तंत्र कहां चूक गया।

यूरोपीय संघ का पैसा और वसूली का सवाल

यूरोपीय शांति सुविधा यूरोपीय संघ का वित्तपोषण साधन है। इसे 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण से पहले संघर्ष रोकने, शांति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया था। बाद में इसका इस्तेमाल यूक्रेन को सैन्य सहायता और खरीद के जरिए समर्थन देने के लिए तेजी से बढ़ा।

यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगांड ने कहा कि ब्रसेल्स एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। जांच की जा रही है कि क्या एस्टोनिया को यूरोपीय शांति सुविधा की 70 मिलियन यूरो की राशि वापस करनी होगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपाय और वसूली प्रक्रियाएं मौजूद हैं, ताकि करदाताओं का पैसा सही तरीके से खर्च हो। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत कब होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN