Source :- BBC INDIA
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जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उसकी तय कक्षा में पहुंचा दिया है.
यह जीएसएलवी की 19वीं उड़ान थी. इसरो के मुताबिक़, इस मिशन में 4 मीटर व्यास वाले कंपोजिट पेलोड फेयरिंग का इस्तेमाल किया गया.
ईओएस-05 एक अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट है. यानी इसका काम अंतरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें लेना और उसकी निगरानी करना है.
इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि ईओएस-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है, जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से तस्वीरें लेगा.
आसान भाषा में कहें तो यह सैटेलाइट पृथ्वी से हज़ारों किलोमीटर की ऊंचाई पर ऐसी कक्षा में रहेगा, जहां से यह एक बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है.
आम तौर पर कम ऊंचाई वाली कक्षाओं में घूमने वाले सैटेलाइट किसी इलाके के ऊपर से गुजरते समय तस्वीर लेते हैं. ईओएस-05 की कक्षा उसे किसी इलाके को ज्यादा लगातार देखने की क्षमता देती है.
इसमें अलग-अलग तरह के सेंसर हैं, जो विजिबल, इंफ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल तस्वीरें लेने में मदद करेंगे.
भारत के पास पहले से कई अर्थ-ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट हैं. लेकिन ईओएस-05 की खासियत यह है कि इसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग के लिए बनाया गया है. यही इसे महत्वपूर्ण बनाता है.
कम ऊंचाई पर घूमने वाले सैटेलाइट किसी जगह की तस्वीर लेने के बाद आगे निकल जाते हैं और कुछ समय बाद फिर उसी इलाके के ऊपर आते हैं.
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट एक बड़े इलाके को लगातार देख सकता है. इससे मौसम, प्राकृतिक आपदाओं और बड़े स्तर पर होने वाले बदलावों की निगरानी में मदद मिल सकती है.
SOURCE : BBC NEWS




