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‘मिर्जापुर’ के गाने पर विवाद, दिल्ली हाई कोर्ट में आई जनहित याचिका; महाराणा प्रताप से बताया कनेक्शन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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गाने का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि राजस्थानी गायक रैपरिया बालम के इस गीत का मिर्जापुर मूवी में गैंगस्टरों, नशेड़ी बलात्कारियों के साथ इस्तेमाल अत्यंत आपत्तिजनक एवं जन भावनाओं को आहत करने वाला है।

रिपोर्ट- हेमलता कौशिक

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के एक गाने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। जिसमें अदालत से फिल्म के क्लाइमेक्स में दिखाए गए ‘शूरवीर’ गाने को हटाने की मांग की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में इस गाने का इस्तेमाल गलत तरीके से गैंगस्टरों की तारीफ करने और उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए किया जा रहा है, जबकि यह गीत राजस्थान की धरती के वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की वीरता को समर्पित है।

प्रशांत कुमार सिंह नाम के शख्स की तरफ से दायर इस जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि यह ट्रैक मूल रूप से राजस्थान के महान प्रतापी राजा ‘महाराणा प्रताप’ की वीरता और उनकी महानता को श्रद्धांजलि देने के लिए लिखा गया था, लेकिन फिल्म में इस गाने का इस्तेमाल काल्पनिक गैंगस्टरों का महिमामंडन करने के लिए अनुचित तरीके से किया गया है।

सांस्कृतिक विरासत को पहुंच रहा गहरा नुकसान

याचिकाकर्ता प्रशांत सिंह ने इस गाने को हटाने की मांग करते हुए कहा कि फिल्म में अपराधियों की पृष्ठभूमि में एक राष्ट्रीय नायक को समर्पित गीत का उपयोग किया गया है, जिससे कि देश की सांस्कृतिक विरासत को गहरा नुकसान पहुंच रहा है। याचिका में इस बात को भी जोर देकर कहा गया कि अगर फिल्म में इस गाने को इस्तेमाल किया गया तो गाने का मूल सांस्कृतिक संदर्भ गंभीर रूप से विकृत हो जाएगा, और सार्वजनिक स्मृति में एक भ्रामक जुड़ाव पैदा करेगा, जो कि महाराणा प्रताप की विरासत को काल्पनिक गैंगस्टरों के साथ जोड़ेगा।

क्लाइमेक्स से गाना हटाने का निर्देश देने की मांग

याचिका में फिल्म के क्लाइमेक्स से ट्रैक को हटाने या बदलने का निर्देश देने की मांग की गई है, साथ ही इसमें ऐतिहासिक या सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से जुड़े गीतों के इस्तेमाल को लेकर उचित दिशानिर्देश तैयार करने की भी मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिनेमैटोग्राफिक कार्यों में उनके उपयोग से आपराधिक, असामाजिक या अन्यथा विपरीत आचरण के साथ अवांछनीय या भ्रामक जुड़ाव न हो। साथ ही कलात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संतुलित किया जा सके।

राजस्थान के भाजपा नेता ने भी उठाया यही मुद्दा

इससे एक दिन पहले राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी महाराणा प्रताप को समर्पित इस गीत को गैंगस्टर और अपराधी किरदारों वाले दृश्यों के साथ दिखाए जाने पर आपत्ति जताई थी और फिल्म से इसे हटाने की मांग की थी। अपनी इस मांग को लेकर राठौड़ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखा है।

महाराणा को समर्पित गीत को आपराधिक चरित्रों के साथ दिखाया

राठौर ने यह पत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा- ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को समर्पित ‘शूरवीर’ गीत को फिल्म ‘मिर्जापुर द मूवी’ में गैंगस्टर एवं आपराधिक चरित्रों के साथ जोड़कर प्रस्तुत किए जाने के विरोध में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस गीत को हटाने और भविष्य में ऐतिहासिक महापुरुषों से जुड़े गीतों, प्रतीकों और संदर्भों के गलत उपयोग की अनुमति नहीं दिये जाने की मांग की है।’

गीत में गैंगस्टरों, नशेड़ियों व बलात्कारियों को दिखाना बेहद अपमानजनक

राजस्थान विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राठौड़ ने इस पत्र में कहा कि राजस्थानी गायक रैपरिया बालम के शूरवीर गीत का मिर्जापुर मूवी में गैंगस्टरों, नशेड़ी बलात्कारियों के साथ प्रयोग अत्यंत आपत्तिजनक एवं जन भावनाओं को आहत करने वाला है। राठौड़ ने दावा किया कि इस तरह का चित्रण महाराणा प्रताप के सम्मान तथा उनसे जुड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी अपमान करता है।

‘शूरवीर और गैंगस्टर के चरित्र एवं मूल्यों में स्पष्ट अंतर’

आगे उन्होंने कहा कि ‘शूरवीर और गैंगस्टर के चरित्र एवं मूल्यों में स्पष्ट अंतर है। वीरता, त्याग, धर्म, स्वाभिमान और राष्ट्रभूमि के प्रति समर्पण को अपराध, हिंसा और गैंग संस्कृति से जोड़कर प्रस्तुत करना दुर्भाग्यपूर्ण है।’ भाजपा नेता ने मांग की है कि बोर्ड ‘मिर्जापुर द मूवी’ में शूरवीर गीत को हटाते हुए भविष्य में यह सुनिश्चित करें कि ऐतिहासिक महापुरुषों से जुड़े गीतों, प्रतीकों और संदर्भों का उपयोग ऐसे रूप में किये जाने की अनुमति नहीं दी जाए जिससे सर्व समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचे। (भाषा इनपुट के साथ)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN