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UPI अब भी आम आदमी के लिए फ्री, सरकार ने बताया 15 अक्टूबर से किस पर लगेगा चार्ज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

UPI के नए नियम 15 अक्टूबर से लागू हो रहे हैं। पूरे देश में इसको लेकर बहुत चर्चाएं हैं। पान की दुकान से लेकर मॉल के बड़े-बड़े शो रूम तक में सबसे अधिक चर्चा यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर हो रही है। आम आदमी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जितनी मुंह उतनी बातें। अब मोदी सरकार के वित्त मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों का कन्फ्यूजन दूर करने का प्रयास किया है।

वित्त मंत्रालय के पोस्ट के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो रहा नया नियम केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं। यानी आप जब किसी को पैसे भेजेंगे या दुकान पर 2000 रुपये तक का पेमेंट करेंगे, तो आपसे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।

किस पर शुल्क नहीं लगेगा?

  • किसी भी व्यक्ति, दोस्त या रिश्तेदार को पैसे भेजने पर नया नियम कोई असर नहीं डालेगा, चाहे कितनी भी रकम हो, ट्रांजैक्शन फ्री होगा।
  • दुकानदार को 2000 रुपये तक का पेमेंट फ्री।
  • छोटे व्यापारियों के लिए जो zero-MDR में आते हैं, यूपीआई पेमेंट फ्री।
  • इससे लगभग 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

तो MDR चार्ज किस पर लगेगा?

दुकानदार को 2000 रुपये से ऊपर का पेमेंट, लेकिन कुछ खास सेक्टरों में रेट अलग हैं…

  • सामान्य मर्चेंट पर 0.4% MDR, लेकिन 75,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये।
  • जरूरी सेवाएं जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, फ्यूल, कृषि इनपुट के लिए 2000 से ऊपर पर सिर्फ 5 रुपये फ्लैट चार्ज।
  • कैपिटल मार्केट जैसे म्यूचुअल फंड, शेयर ब्रोकर, डीलर के लिए 0.02% MDR, अधिकतम 300 रुपये।

इसे उदाहरण से ऐसे समझें

  • 3,000 रुपये के पेमेंट पर 0.4% यानी 12 रुपये व्यापारी देगा।
  • 50,000 रुपये पर 0.4% यानी 200 रुपये।
  • 1,00,000 रुपये पर 0.4% यानी 400 रुपये, लेकिन कैप 300 रुपये है, तो 300 रुपये।

ग्राहकों से शुल्क नहीं लेना है?

क्या ग्राहकों से कोई चार्ज लेना है? तो इसका दोटूक जवाब है, बिल्कुल नहीं। सरकार ने बैंकों से कहा है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें। UPI ऐप भी कोई प्लेटफॉर्म फीस या छिपा चार्ज नहीं ले सकते। बैंक और NPCI की दैनिक सीमा (1 लाख से 5 लाख) सिर्फ सुरक्षा के लिए है, यह शुल्क की सीमा नहीं है।

MDR क्या है?

MDR एक तरह का शुल्क है जो व्यापारी से लिया जाता है, जब वह UPI से पैसे लेता है। यह सरकार या NPCI नहीं लेते, बल्कि बैंकों और पेमेंट ऐप कंपनियों के बीच बाँटा जाता है ताकि UPI सिस्टम चलता रहे और बेहतर होता रहे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN