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PF के नियम में 12 साल बाद बड़ा बदलाव…टेक होम सैलरी पर क्या असर, जानें सबकुछ

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नौकरीपेशा लोगों को कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF की अहमियत के बारे में बखूबी पता है। अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 12 साल बाद EPF को लेकर एक ऐसा फैसला लिया है जिसका फायदा लाखों कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर सरकार का फैसला क्या है और इसका फायदा क्या होगा।

क्या है फैसला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए सैलरी लिमिट को मौजूदा के 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। ऐसे में अब जिस कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25000 रुपये तक होगी उन सभी को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाएगा।

क्या है सामाजिक सुरक्षा से मतलब?

दरअसल, यहां सामाजिक सुरक्षा का मतलब कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना और EPFO की बीमा सुरक्षा योजना से है। मौजूदा व्यवस्था में 20 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली पात्र कंपनियों में ₹15,000 प्रति माह तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को EPF और EPS के दायरे में शामिल करना अनिवार्य था। इससे ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी इन स्कीम से बाहर रहने का विकल्प चुन सकते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई लिमिट लागू होने के बाद ₹15,000 से ज्यादा और ₹25,000 तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए भी EPF और EPS के दायरे में शामिल होना अनिवार्य हो सकता है।

कर्मचारी पर कैसे पड़ेगा असर?

मान लीजिए आशीष की बेसिक सैलरी ₹20000 है। चूंकि अभी ₹15000 की लिमिट है तो ऐसे में आशीष EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज से बाहर है। अभी आशीष पर निर्भर है कि वह EPS और EPF कंट्रीब्यूशन के विकल्प को चुनता है या नहीं। हालांकि, अब नई ₹25000 की लिमिट लागू होने के बाद आशीष के लिए कंट्रीब्यूशन अनिवार्य हो जाएगा। वहीं, आशीष EPFO की बीमा सुरक्षा के दायरे में भी रहेगा।

टेक होम सैलरी पर भी पड़ेगा असर?

नई लिमिट लागू होने से उन कर्मचारियों के टेक होम यानी इन हैंड सैलरी पर असर पड़ सकता है जिनकी बेसिक सैलरी 15 हजार रुपये से 25 हजार रुपये के बीच है। मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹25,000 है। 12 प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारी का योगदान करीब ₹3,000 प्रति महीने होगा। यानी कर्मचारी की सैलरी से करीब 3000 रुपये PF के लिए जा सकते हैं। नियोक्ता यानी कंपनी भी निर्धारित नियमों के मुताबिक योगदान करती है।

आसान भाषा में कहें तो 25 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के हाथ में थोड़े कम पैसे आ सकते हैं लेकिन भविष्य के लिए PF और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा। बता दें कि ₹15000 प्रति माह तक की बेसिक सैलरी वालों को 12% का कंट्रीब्यूशन करना होता है। रकम के हिसाब से यह ₹1800 प्रति माह तक का होता है। इतना ही योगदान कंपनी भी करती है। कहने का मतलब है कि नए नियम का सबसे ज्यादा असर 15 हजार से 25 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा।

कर्मचारी और कंपनी का कितना कंट्रीब्यूशन?

सामान्य नियम के मुताबिक ईपीएफओ से जुड़ा कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत EPF में जमा करता है और कंपनी भी कुल 12 प्रतिशत योगदान करती है। हालांकि, कंपनी का पूरा पैसा EPF में नहीं जाता। कंपनी के योगदान का एक हिस्सा EPS यानी पेंशन योजना में और बाकी EPF में जाता है। कंपनी के 12% योगदान में से आम तौर पर 8.33% EPS (पेंशन) में और बाकी 3.67% EPF में जाता है।

51 लाख कर्मचारी आएंगे दायरे में

इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के ईपीएफओ के अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा दायरे में आने की उम्मीद है। इस फैसले से सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच साल में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कंपनियों का भी खर्च बढ़ेगा। ज्यादा कर्मचारियों के PF खातों में योगदान करना होगा। यानी उनकी कुल पेरोल कॉस्ट बढ़ सकती है।

12 साल बाद बदलाव

वेतन सीमा में यह बदलाव 12 साल बाद किया गया है। इससे कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को भविष्य निधि, पेंशन और संबंधित बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा। बता दें कि ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक नहीं बदली थी। इसके बाद सितंबर, 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN