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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/09/18/1200x900/cbfc_guidelines_18_09_1789738250019_r668_1789738258532_RpEH_3b643cc8-51a5-4292-b712-01b917f360d3_5zv6.pngसरकार ने हाल ही में सीबीएफसी का पुनर्गठन किया है। प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी समेत 18 सदस्य बोर्ड में शामिल हुए हैं। इस पुनर्गठन के साथ-साथ फिल्मों में दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर भी नई गाइडलाइन्स भी जारी की गई हैं।
किसी भी फिल्म को रिलीज करने से पहले उस फिल्म को सीबीएफसी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के पास भेजा जाता है। सीबीएफसी बोर्ड के सदस्य फिल्म को देखते हैं और उसे सर्टिफिकेट देते हैं। इतना ही नहीं, अगर फिल्म में कुछ ऐसा कंटेंट है जो लोगों को परेशान कर सकता है, किसी को आहत करता है तो सीबीएफसी उस कंटेंट को फिल्म से हटाने का आदेश दे सकती है। अब फिल्म में दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर सीबीएफसी की नई गाइडलाइन्स सामने आई हैं। इन गाइडलाइन्स की सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है और कुछ लोगों की सीबीएफसी पर भड़ास निकली है।
फिल्मों की वजह से नहीं खराब होने चाहिए दूसरे देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण रिश्ते
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को बोर्ड का पुनर्गठन किया। इसी के साथ फिल्मों के लिए नई गाइडलाइन्स भी जारी की गई हैं। नई गाइडलाइन्स के मुताबिक, फिल्मों की वजह से भारत के दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। ये नियम उन फिल्मों पर लागू होता है जिनकी कहानी भारत और किसी दूसरे देश के बीच तनाव या सैन्य संघर्ष पर आधारित है।
हिंसा को लेकर क्या कहा गया?
इन नई गाइडलाइन्स में हिंसा को लेकर भी आदेश दिए गए हैं। फिल्ममेकर्स वो सीन नहीं दिखा पाएंगे जिसमें किसी भी तरह से हिंसा का महिमामंडन किया गया हो। इतना ही नहीं, फिल्ममेकर्स को इस चीज का ध्यान भी रखना होगा कि अपराधियों के अपराध करने के तरीके को इस तरह से न दिखाया जाए जिससे किसी भी प्रकार से अपराध करने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिले। फिल्म में ऐसे शब्द भी नहीं होने चाहिए जो लोगों को अपराध करने के लिए उकसाएं।
ड्रग्स के इस्तेमाल पर डिस्केलमर जरूरी
फिल्म में आपने कई बार देखा किरदारों को ड्रग्स का सेवन करते हुए दिखाया जाता है। अब फिल्ममेकर्स अगर ऐसे सीन्स दिखा रहे हैं तो उन्हें डिस्केलमर जरूर डालना होगा। अगर फिल्म में नशीले पदार्थों या साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी से जुड़े दृश्य दिखाए जाते हैं, तो उनके साथ डिस्क्लेमर देना होगा। डिस्केलमर में फिल्ममेकर्स को लिखना होगा- “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No To Drugs”
चाइल्ड अब्यूज को लेकर भी सख्ती
गाइडलाइन्स में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और ऐसी हिंसा जो कहानी के लिए जरूरी नहीं है या जिसे आसानी से टाला जा सकता है, उसे लेकर भी सतर्क रहने को कहा गया है। वहीं, ऐसे कंटेंट को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है जो लोगों की भावनाओं या संवेदनशीलता को ठेस पहुंचा सकती है। फिल्मों में ऐसे दृश्य या शब्द पेश न करने की बात भी है जो सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, गैर-वैज्ञानिक या राष्ट्र-विरोधी रवैये को बढ़ावा देते हों।
फिल्म टाइटल्स को लेकर क्या कहा?
फिल्मों के टाइटल को लेकर भी बोर्ड को सतर्क रहने का आदेश दिया गया है। आदेश में लिखा है कि बोर्ड को फिल्मों के टाइटल पर भी सावधानी बरतनी होगी। बोर्ड को ध्यान रखना होगा कि फिल्म के टाइटल अश्लील, भड़काऊ नहीं होने चाहिए। फिल्मों के टाइटल में जारी की गाइडलाइन्स के मुताबिक ही होने चाहिए।
क्या बोले सोशल मीडिया यूजर्स?
मंत्रालय द्वारा सीबीएफसी के लिए जारी की गई गाइडलाइन्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। लोग इन गाइडलाइन्स पर भड़क गए हैं। एक यूजर ने इन गाइडलाइन्स के बारे में बात करते हुए लिखा- सेंसरशिप पहले से ही खराब थी, और अब तो ये और खराब होने वाली है। एक ने लिखा- धुरंधर जैसी फिल्मों को फिर कैसे रिलीज होने दिया गया? एक ने लिखा- इंडिया नें कभी अच्छी फिल्में नहीं बन बाएंगी अगर इस संस्था को बंद नहीं किया गया तो।
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