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9 महीनों में 1,000 से ज्यादा जवान ढेर! पाकिस्तान में सुरक्षाबलों पर मंडर रहा ये कैसा खतरा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यह आंकड़ा केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फ्रंटियर कोर (FC), पुलिस और लेवीज के जवान भी शामिल हैं। इसी अवधि में 650 से ज्यादा आम नागरिकों की भी जान गई है। 

पाकिस्तान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। साल 2026 देश के सुरक्षाबलों के लिए पिछले ढाई दशकों में सबसे घातक और खौफनाक साल साबित हो रहा है। साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल (SATP) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 15 सितंबर 2026 के बीच ही 1,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी हिंसक वारदातों और आत्मघाती हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं।

यह आंकड़ा केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फ्रंटियर कोर (FC), पुलिस और लेवीज के जवान भी शामिल हैं। इसी अवधि में 650 से ज्यादा आम नागरिकों की भी जान गई है। साल 2009 के बाद यह तीसरा मौका है जब पाकिस्तानी फौज और पुलिस को इतनी भारी संख्या में अपने जवानों की लाशें उठानी पड़ी हैं।

केपीके और बलूचिस्तान बने ‘डेथ जोन’

पाकिस्तानी हुकूमत के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बने हैं दो पश्चिमी प्रांत- खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान। इन दोनों इलाकों में विद्रोही गुटों ने फौज के कैंप, पुलिस थानों, कॉनवॉय और सरकारी इमारतों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर रखे हैं।

अकेले अगस्त के महीने में देश भर में करीब 190 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए। वहीं सितंबर के पहले पांच दिनों में ही 15 से ज्यादा बड़ी वारदातें हो गईं।

2018 से 2022 के बीच कुछ शांति रही, लेकिन अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही पाकिस्तान में हिंसा का ग्राफ तेजी से ऊपर भागा है।

TTP का शरिया कानून और डूरंड लाइन का विवाद

खैबर पख्तूनख्वा में तबाही मचाने के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का हाथ है।

यह वही गुट है जो डूरंड लाइन (पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा) के दोनों तरफ रहने वाले पश्तून आबादी वाले इलाकों को जोड़कर अपना अलग साम्राज्य बनाना चाहता है। टीटीपी का साफ एजेंडा है कि वह इस पूरे इलाके में पाकिस्तान के संविधान को उखाड़ फेंक कर अपना सख्त शरिया कानून लागू करे।

बलूचिस्तान में ‘जाफर एक्सप्रेस’ से लेकर रेल-रोड नेटवर्क पर हमले

दूसरी तरफ, बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य विद्रोही गुटों ने पाकिस्तानी सेना और सरकारी तंत्र की नाक में दम कर रखा है।

प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध बलूचिस्तान में विद्रोही लगातार IED ब्लास्ट, घात लगाकर हमले और सुरक्षा चौकियों पर कब्जा कर रहे हैं।

बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली प्रमुख ट्रेन ‘जाफर एक्सप्रेस’ को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।

साल 2000 में जब से आतंकवाद के आंकड़ों का रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ था, तब से लेकर अब तक पाकिस्तान में उग्रवादी हिंसा में 78,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अपने ही बोए आतंकवाद के बीज का यह कड़वा फल आज इस्लामाबाद के हुक्मरानों को भुगतना पड़ रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN