Home rss business hindi हायर पेंशन का इंतजार कर रहे पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर, BJP...

हायर पेंशन का इंतजार कर रहे पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर, BJP सांसद ने उठाए ये 5 बड़े सवाल; PM मोदी से की अपील

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) के तहत हायर पेंशन (Higher Pension) का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक अहम मुद्दा सामने आया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद अजीत माधवराव गोपछडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हायर EPS पेंशन (Higher EPS Pension) से जुड़े पेंडिंग मामलों में हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने कहा है कि पात्र पेंशनर्स के मामलों का निपटारा एक समान और तय समयसीमा में होना चाहिए। उन्होंने प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतों, अलग-अलग अदालतों में चल रहे मामलों और पेंशन के असमान भुगतान जैसे मुद्दों को उठाया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

हायर EPS पेंशन (Higher EPS Pension) का मामला नवंबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खास तौर पर चर्चा में आया था। अदालत ने पात्र मौजूदा कर्मचारियों को अधिक वेतन के आधार पर EPS में योगदान कर हायर पेंशन (Higher Pension) का विकल्प देने का रास्ता स्पष्ट किया था। इसके बावजूद कई कर्मचारियों और पेंशनर्स को प्रक्रिया संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सांसद गोपछडे ने खास तौर पर EPF स्कीम के पैरा 26(6) का मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार, इसी प्रावधान से जुड़े दस्तावेजी और प्रशासनिक सवाल कई मामलों में हायर पेंशन (Higher Pension) के दावों की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।

सांसद ने यह भी बताया कि उन्होंने 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा में हायर पेंशन (Higher Pension) के समान क्रियान्वयन को लेकर सवाल पूछा था। सरकार की ओर से बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एग्जेम्पशन और अनएक्जेमपटेड इस्टैब्लिशमेंट (Unexempted Establishments) में समान रूप से लागू करने के लिए EPFO ने कार्रवाई की है। यह मामला बाद में पार्लियामेंट्री एसोरेंस नं- 271/72 (Parliamentary Assurance No. 271/72) से जुड़ा, जिसे सांसद ने अभी भी पेंडिंग बताया है। उनका कहना है कि अगर व्यवस्था समान रूप से लागू हो चुकी है, तो समान स्थिति वाले पेंशनर्स को अलग-अलग अदालतों का रुख क्यों करना पड़ रहा है, इस पर भी स्पष्टता जरूरी है।

गोपछ़डे ने हायर EPS पेंशन (Higher EPS Pension) से जुड़े लगातार चल रहे मुकदमों का भी मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार, अलग-अलग हाईकोर्ट में पैरा 26(6), एक्जेमपटेड इस्टैब्लिशमेंट, ट्रस्ट नियमों, पुराने योगदान और न्यायिक निर्देशों के क्रियान्वयन से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि जब किसी मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट हो जाए, तो समान स्थिति वाले सभी पात्र पेंशनर्स तक उसका लाभ पहुंचाने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए। इससे एक ही तरह के मामलों में बार-बार मुकदमेबाजी की जरूरत कम हो सकती है।

सांसद ने EPS-1995 की फाइनेंशियल और एक्चुरियल एस्टेब्लिशमेंट की भी समीक्षा की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने कुछ BHEL और SAIL से जुड़े ट्रस्टों में समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को अलग-अलग पेंशन लाभ मिलने की शिकायतों का जिक्र किया है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की एक समान जांच से नियमों के क्रियान्वयन में स्पष्टता आ सकती है। यह मुद्दा ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है, जब सितंबर 2026 में EPFO के लिए वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की घोषणा की गई है, जिससे सामाजिक सुरक्षा कवरेज और पेंशन व्यवस्था पर भी चर्चा बढ़ी है।

प्रधानमंत्री से सांसद की प्रमुख मांगों में पैरा 26(6) से जुड़ी दिक्कतों का समाधान, पात्र पेंशनर्स के साथ समान व्यवहार, अदालतों में बार-बार जाने की जरूरत कम करने के लिए प्रभावी तंत्र, EPS-1995 की वित्तीय समीक्षा और हायर पेंशन (Higher Pension) के पात्र मामलों का समयबद्ध निपटारा शामिल है। साथ ही उन्होंने पार्लियामेंट्री एसोरेंश नं. 271/72 की रिव्यू और उसे पूरा करने की मांग की है। अब इस मामले में सरकार और EPFO की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर हायर EPS पेंशन (Higher EPS Pension) का इंतजार कर रहे पेंशनर्स की नजर रहेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN