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इन केंद्रीय कर्मचारियों के परिवार के लिए अब 100% पेंशन, सरकार ने किया साफ

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आप रेलवे कर्मचारी हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, रेलवे ने रेल सर्विस (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स 2026 को लेकर एक अहम नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें रेलवे सेवा के दौरान कर्मचारी की मौत या दिव्यांगता होने पर मिलने वाली पेंशन और फैमिली पेंशन के नियमों को स्पष्ट किया गया है। आइए जानते हैं कि इसका फायदा किसे और कब मिलेगा?

किसे 100 फीसदी पेंशन?

रेलवे पेंशन नियमों के तहत ड्यूटी के दौरान हिंसक घटनाओं, प्राकृतिक आपदा, आतंकी या उग्रवादी हमले और कुछ युद्ध जैसी परिस्थितियों में कर्मचारी की मौत होने पर परिवार को कर्मचारी के वेतन का 100 फीसदी तक फैमिली पेंशन मिल सकेगी। वहीं, नियमों के तहत न्यूनतम दिव्यांगता पेंशन और फैमिली पेंशन 18,000 रुपये प्रति माह तय की गई है। इनका लाभ उन रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा जो रेलवे सर्विस (पेंशन) रूल्स, 2026 के दायरे में आते हैं। कुछ निर्धारित शर्तों और विकल्प के आधार पर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जुड़े कर्मचारियों को भी इन प्रावधानों का लाभ मिल सकता है। अगर किसी रेलवे कर्मचारी को ऐसी दिव्यांगता के कारण सेवा से हटना पड़ता है, जो इन श्रेणियों के तहत आती है, तो दिव्यांगता पेंशन में सर्विस एलिमेंट और डिसेबिलिटी एलिमेंट शामिल होंगे।

फैमिली पेंशन के लिए पात्रता में सबसे पहले विधवा या विधुर को रखा गया है। इसके बाद निर्धारित शर्तों के तहत आश्रित बच्चों, गोद लिए गए और सौतेले बच्चों, माता-पिता और आश्रित भाई-बहनों को पात्रता दी गई है।

पेंशन फायदे इन मामलों में लागू होंगे

-जब कोई रेलवे कर्मचारी नौकरी से जुड़ी परिस्थितियों के कारण विकलांग हो गया हो।

– जब किसी रेलवे कर्मचारी की नौकरी से जुड़ी परिस्थितियों के कारण मौत हो गई हो

– जब कोई परिवार खास पेंशन पाने का हकदार हो

(इसमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं जो नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आते हैं लेकिन जिन्होंने 2025 के NPS नियमों के तहत संबंधित फायदों को चुना था।)

नई व्यवस्था की बड़ी खासियत यह है कि कर्मचारी या उसके परिवार को असाधारण दिव्यांगता पेंशन या फैमिली पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित कार्यालय प्रमुख को हर ऐसे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई शुरू करनी होगी। मेडिकल रिपोर्ट मिलने के तीन महीने के भीतर मामला सक्षम प्राधिकारी के सामने भेजना होगा। अगर कार्यालय प्रमुख की देरी से प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लगता है, तो केवल इसी आधार पर दावे को खारिज नहीं किया जा सकेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN