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पेट्रोल-डीजल के दाम अगर कम होने की उम्मीद लगा रहे हैं तो छोड़ दीजिए क्योंकि, कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर के पार चला गया है। वैसे भी भारत जिस क्रूड ऑयल बास्केट का आयात करता है, उसकी कीमत 21 सितंबर 2026 को ही बढ़कर $117.4 प्रति बैरल हो गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में इसका औसत करीब $66 प्रति बैरल था।
आज गुरुवार सुबह 6 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 0.61 डॉलर प्रति बैरल गिरकर 102.47 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। जबकि, WTI 48 सेंट टूटकर 91.68 डॉलर प्रति बैरल पर था। इससे पहले बुधवार को ब्रेंट 3.83 डॉलर प्रति बैरल उछलकर 103.08 डॉलर पर बंद हुआ। जबकि, अमेरिकी कच्चे तेल का बेंचमार्क WTI भी मामूली रूप से बढ़कर 92.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
क्यों नहीं कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
आप जिन सरकारी कंपनियों के पंपों पर पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं, उन्हें मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल पर करीब ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद मई से ही घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। बेंचमार्क दिल्ली में आज भी पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये लीटर है। जबकि, इस बीच दुनिया के कई देशों में पेट्रोल डीजल के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है।
आम लोगों को राहत, कंपनियों पर आफत
कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल को लेकर आम लोगों को राहत मिल रही है। दाम स्थिर हैं और यह राहत सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के लिए आफत बल रही है। ICRA का अनुमान है कि मौजूदा कीमतों पर तीनों सरकारी कंपनियों को रोजाना नुकसान ₹530 करोड़ तक पहुंच सकता है।
कच्चे तेल फिर क्यों आया उबाल
कच्चे तेल में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और सप्लाई से जुड़ी परेशानियां प्रमुख वजह हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश धमकियों के दबाव में बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने किसी सार्थक वार्ता को फिर शुरू करने से पहले कई शर्तें भी रखी हैं। इससे अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
अमेरिका में डीजल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल के साथ पेट्रोलियम उत्पादों, खासकर डीजल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसे देखते हुए अमेरिकी प्रशासन देश से डीजल के निर्यात पर अंकुश लगाने के विकल्प पर विचार कर रहा है। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी डीजल निर्यात पर रोक के समर्थन की बात कही थी।
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