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जावेद अख्तर ने साहिर लुधियानवी के कफन का पैसा दे कर चुकाया था 200 रुपये का कर्ज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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गीतकार साहिर लुधियानवी ने अपनी मौत के बाद जावेद अख्तर को उधार दिए 200 रुपए वसूल लिए थे। ये सोच कर जावेद अख्तर खूब रोए। एक बेटे की तरह उनके जनाजे पर सारा इंतजाम किया।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गुलजार और जावेद अख्तर का नाम गूंजने से पहले कुछ ऐसे भी गीतकार हुए जिन्होंने अपनी नज्मों और गीतों में आत्मा उतार कर रख दी हो। उन्हीं गीतकार, शायर में से एक थे साहिर लुधियानवी। 40 के दशक से लेकर 1980 तक वो फिल्मों में गीत लिखते गए। उनके लिखे गीतों ने ऑडियंस के दिलों में एक अलग जगह बनाई। साहिर का इंडस्ट्री में कई लोगों के साथ अच्छा रिश्ता रहा। लेकिन जावेद अख्तर से उनका खास कनेक्शन रहा। दोनों के बीच का रिश्ता ऐसा था कि साहिर की मौत पर जावेद अख्तर को उनसे उधार लिए पैसे चुकाने पड़े।

साहिर और जावेद अख्तर का रिश्ता

ये बात 1960 के दशक की है। उस दौर में एक नया लड़का जावेद अख्तर फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के लिए स्ट्रगल कर रहा था। रहने और खाने का कोई ठिकाना नहीं था तो साहिर लुधियानवी ने उस नए लड़के को अपने घर में रहने की जगह दी। जावेद अख्तर, साहिर को अपना गुरु मानते और लेखनी के कई गुण उनके साथ रहते हुए सीख रहे थे। वहीं साहिर के लिए जावेद बेटे जैसे थे। वो न सिर्फ उनका ध्यान रखते बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें पैसे भी दिया करते।

वो 200 रुपए का उधार

ये बात 60 के दशक की है। साहिर को एहसास हुआ कि जावेद अख्तर को पैसों की जरूरत है। ऐसे में उनकी खुद्दारी और मान सम्मान को बनाए रखते हुए उन्होंने 200 रुपए टेबल के पास छोड़ दिए। 200 रुपए उस दौर की बड़ी कीमत थी। इसका अंडा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 100 का छुट्टा लेने के लिए लोग बैंक जाया करते थे। जावेद अख्तर ने वो 200 रुपए लिए और ऐसे ही वक्त आगे बढ़ गया।

जावेद अख्तर का करियर निकल पड़ा

जावेद अख्तर को फिल्मों में काम मिलने लगा, सलीम खान के साथ उनकी जोड़ी हिट हो गई। वो इंडस्ट्री के टॉप लेखकों में से एक बन गए। पैसों की किल्लत अब खत्म हो चुकी थी। अब अच्छा दौर शुरू हो गया था। ऐसे में अब जब कभी जावेद अख्तर अपने गुरु साहिर से मिलते तो उनके दिए उन 200 रुपए का जिक्र जरूर करते। जावेद कहते हैं कि अब वो 200 रुपए नहीं लौटाएंगे। मजाक में जवाब देते हुए साहिर भी कहते, ‘बेटे वो 200 रुपए तो मैं तेरे से लेकर रहूंगा’।

दोस्त के घर हुई साहिर की मौत

ऐसे ही वक्त बीतता गया। फिर आई 25 अक्टूबर की शाम। उस समय उनके एक डॉक्टर कपूर नाम के भी दोस्त हुआ करते थे। साहिर को खबर मिली कि उनके दोस्त डॉक्टर कपूर की तबीयत ठीक नहीं है। ऐसे में एक अच्छे दोस्त की तरह साहिर अपने उस दोस्त के घर जा पहुंचे। उन्हें हंसाने और एंटरटेन करने का सिलसिला शुरू हुआ और दोनों बिस्तर पर ही ताश खेलने लगे। कोई बाजी हार रहा था तो किसी को जीत मिल रही थी। तभी डॉक्टर कपूर ने ध्यान दिया कि साहिर के चेहरे का रंग कुछ बदल रहा है। उन्होंने अपने दोस्त को पुकारा। साहिर को हार्ट अटैक आया था। अपने आखिरी समय में साहिर ने कहा, ‘चेहरे पर चेचक के हजार दाग सही डॉक्टर कपूर, जिंदगी खूबसूरत है, मैं मरना नहीं चाहता’। साहिर गिर पड़े। डॉक्टर कपूर ने संभालने की कोशिश, कमरे में शोर मच गया। भागते हुए उनका ड्राइवर अनवर आया और अपने मालिक के मृत शरीर को उठाकर वापस उनके घर लेकर पहुंचा।

रात भर रोते रहे जावेद अख्तर

जावेद अख्तर को खबर लगी तो वो सबसे पहले साहिर के घर पहुंचे। रात हो चुकी थी। धीरे-धीरे इंडस्ट्री में साहिर की मौत की खबर फैलने लगी थी। लेकिन रात भर जावेद उनकी डेथ बॉडी के पास बैठे रहे। वो बस रोते रहे। सुबह हुई। इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों का हुजूम उनके घर की तरफ बड़ा। जनाजा निकाला गया। साहिर लुधियानवी के मृत शरीर को अब कब्र में दफनाया जाना था। इस दौरान जावेद अख्तर ने अपने पिता सामान साहिर के अंतिम समय में वो सब कर रहे थे जो एक बेटा करता।

साहिर ने मरने के बद वसूल लिए अपने 200 रुपए

साहिर के मृत शरीर को दफनाया गया। उनके अंतिम दर्शन कर जनाजे में शामिल भीड़ अब लौटने लगी थी। जावेद अख्तर घंटों वहीं रहे। कुछजब सब लौट रहे थे तो जावेद अख्तर अपने गुरु को आखिरी सलाम कर आगे बढ़ने लगे। तभी पीछे से उर्दू लेखिका वाजिदा तबस्सुम के पति अशफाक ने आवाज दी। उन्होंने कहा, ‘जावेद कुछ पैसे हैं?’ मैं सुबह जल्दी में आया तो बटुआ घर छोड़ आया। कफन के पैसे देने हैं’, जावेद अख्तर ने पूछा कितने चाहिए, ‘अशफाक बोले 200 रुपए’। जावेद ये सुनकर सन्न रह गए। ये वही 200 रुपए उधार के थे जो कभी साहिर ने उन्हें दिए थे। वो अक्सर कहते थे कि ये पैसे तो मैं लेकर रहूंगा। आखिर हुआ भी वही। साहिर ने जावेद को दिए वो पैसे अपने कफन के लिए ले लिए। ये सोच कर जावेद अख्तर उनकी कब्र पर खूब रोए।’

साहिर की लिखी नज्म

साहिर के चले जाने के बाद जब भी जावेद अख्तर उनका जिक्र करते हैं, अक्सर भावुक हो जाते हैं। और उनकी लिखी इस नज्म को पढ़कर सुनने वालों को उनकी फनकारी के किस्से सुनाते हैं। साहिर ने लिखा था,

‘कल और आएंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले,

मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले,

कल कोई मुझको याद करे, क्यों कोई मुझको याद करे,

मसरूफ ज़माना मेरे लिए, क्यों वक्त अपना बर्बाद करे।’

SOURCE : LIVE HINDUSTAN