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25 साल में निफ्टी के लिए सबसे खराब सितंबर, अक्टूबर में क्या होगा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • निफ्टी ने सितंबर सीरीज में करीब 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की
  • अक्टूबर में निफ्टी की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे

भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर की डेरिवेटिव सीरीज बेहद कमजोर रही। निफ्टी ने सितंबर सीरीज में करीब 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। यह पिछले 25 वर्षों में सितंबर की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सितंबर 2001 में निफ्टी 6.5 प्रतिशत गिरा था। इस बार निफ्टी में 1,400 से ज्यादा अंकों की गिरावट आई है।

22,600 का स्तर टूटा

बाजार में लगातार विदेशी बिकवाली, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और ऊंची बॉन्ड यील्ड का दबाव रहा। इस गिरावट के दौरान निफ्टी 2020 के बाद से सबसे लंबे साप्ताहिक गिरावट के दौर में भी पहुंच गया। सितंबर के आखिरी कारोबारी सत्रों में निफ्टी अपने 200-वीक मूविंग एवरेज के आसपास के 22,600 के स्तर से नीचे चला गया। मंगलवार को इंडेक्स ने 22,569 का इंट्राडे निचला स्तर छुआ।

क्या निफ्टी 22,600 के ऊपर दोबारा टिक पाएगा

टेक्निकल एनालिस्ट्स की नजर अब इस बात पर है कि निफ्टी 22,600 के ऊपर दोबारा टिक पाता है या नहीं। इसके ऊपर वापसी बाजार में सुधार की गुंजाइश बढ़ा सकती है, जबकि लगातार नीचे रहने पर दबाव जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

अक्टूबर में 22,800-22,900 अहम

अक्टूबर सीरीज में निफ्टी के लिए 22,800-22,900 का जोन शुरुआती प्रतिरोध माना जा रहा है। इसके ऊपर 23,000-23,100 अगला महत्वपूर्ण स्तर है। वहीं, नीचे की ओर 22,550-22,500 पहला सपोर्ट जोन है। इसके बाद 22,400-22,500 के क्षेत्र को मजबूत सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।

निफ्टी में गिरावट के क्या हैं कारण

महंगा तेल : सितंबर की गिरावट में कच्चे तेल की कीमतों ने भी अहम भूमिका निभाई। ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद लगभग 105 डॉलर के आसपास बना रहा। भारत की बड़ी तेल आयात जरूरतों के कारण महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है।

कमजोर रुपया: सितंबर में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 96.2 के स्तर तक कमजोर हुआ। साथ ही भारत की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.17 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर रही।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली: बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी दबाव का बड़ा कारण बनी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 2.17 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की। महंगा तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी विदेशी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया।

घरेलू अर्थव्यवस्था से मिल रहा सहारा

हालांकि, बाजार पर वैश्विक दबाव बना हुआ है, घरेलू अर्थव्यवस्था से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अगस्त में भारत का IIP सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियां वैश्विक दबाव के असर को कुछ हद तक कम कर सकती हैं।

अक्टूबर में इन स्तरों पर नजर

22,400-22,500: मजबूत सपोर्ट

22,500-22,550: शुरुआती सपोर्ट

22,600: अहम 200-वीक मूविंग एवरेज

22,800-22,900: पहला प्रमुख रेजिस्टेंस

23,000-23,100: अगला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN