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सोना महंगा फिर भी 10 ग्राम की खरीद पर ₹5000 तक कैसे मिल रही छूट?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • सोने-चांदी पर आयात शुल्क 15%, ऊपर से 3% GST भी लगता है
  • बिना बिल कैश खरीदारी में हर 10 ग्राम पर 5,000 रुपये की छूट मिल रही
  • सरकार की टैक्स बढ़ाने की नीति का उलटा असर, ग्रे मार्केट को बढ़ावा

भारत में सोने की कीमतें आसमान पर हैं और टैक्स भी भारी है। इस वजह से ज्यादा लोग ऐसी खरीदारी कर रहे हैं, जिसमें न बिल बनता है और न सरकारी रिकॉर्ड। सोना और गहने कैश में बिना रसीद के हाथ बदल रहे हैं, जिसे अधिकारी ट्रैक नहीं कर पाते।ब्लूमबर्ग ने बाजार से जुड़े पांच लोगों के हवाले से बताया है कि कैश में बिना बिल खरीदने पर थोक खरीदारों को करेंट मार्केट प्राइस से 6% तक छूट मिल सकती है। कैश लेने वाले व्यापारी टैक्स बचा लेते हैं और उसका एक हिस्सा ग्राहक को दे देते हैं।

10 ग्राम सोने की खरीद पर 5,000 रुपये की छूट, पर रसीद नहीं

अनुराधा नाम की एक गृहिणी ने बताया कि उन्होंने बेटी की शादी के लिए गहने खरीदे। उन्हें हर 10 ग्राम पर 5,000 रुपये यानी करीब 52 डॉलर की छूट मिली, लेकिन कोई रसीद नहीं ली। इस साल सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अनुराधा के लिए यह बचत नजरअंदाज करना मुश्किल था।

कीमतें अब कुछ नरम हुई हैं, फिर भी साल भर पहले से करीब 28% ज्यादा हैं। उन्होंने कहा, “यह ऑफर मना करना मुश्किल था। सोना बहुत महंगा है और हमें ज्वेलर पर भरोसा है।”

सरकार की नीति का उलटा असर

अनुराधा उन बढ़ती खरीदारों में हैं जो अनौपचारिक यानी समानांतर बाजार की ओर मुड़ रहे हैं। बुलियन मार्केट तब से तेज हुआ है, जब सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क दोगुने से ज्यादा कर 15% कर दिया। सरकार का मकसद था कि सोने की खरीद कम हो, क्योंकि भारत का व्यापार घाटा बढ़ रहा है। रिटेल ग्राहकों को 3% गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST भी देना पड़ता है।

भारत में सोने के प्रति क्यों है दिवानगी

दुनिया में चीन के बाद भारत सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां सोना जन्म, त्योहार और सबसे ज्यादा शादी में खरीदा जाता है। सोने के प्रति दिवानगी का आलम यह है कि गोल्ड गहना, तोहफा और परिवार की बचत, तीनों है। देश में सोने का उत्पादन बहुत कम है, इसलिए ज्यादातर मांग आयात से पूरी होती है। इससे व्यापार बिल और करेंसी पर दबाव पड़ता है।

समानांतर बाजार में 200 डॉलर प्रति औंस तक छूट

मनीकंट्रोल की खबर के मुताबिक, कैश मार्केट में व्यापारी घरेलू कीमतों के मुकाबले 200 डॉलर प्रति औंस तक सस्ता सोना जुटा पा रहे हैं। अनौपचारिक बाजार बिखरा हुआ है, जहां सौदे अलग-अलग तय होते हैं, किसी एक बेंचमार्क पर नहीं।

लंदन की मॉनेटरी मेटल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर हिरेन चंदारिया कहते हैं, “समानांतर बाजार में इतनी बड़ी छूट मुख्य रूप से अनौपचारिक सप्लाई के गणित को दिखाती है। ज्यादा आयात शुल्क से सोने को सरकारी टैक्स वाले चैनल से बाहर लाने की प्रेरणा बढ़ती है।”

आधिकारिक आयात पर औसत छूट 50 डॉलर प्रति औंस

कंसल्टेंसी मेटल्स फोकस के मुताबिक सितंबर में सरकारी चैनल से आयातित सोने की लैंडेड कीमत पर औसत छूट करीब 50 डॉलर प्रति औंस थी। वहीं कुछ रिटेल ग्राहक मोलभाव और ज्वेलर से रिश्ते के आधार पर 10 ग्राम पर 10,000 रुपये तक छूट पा सकते हैं।

व्यापार घाटा और सोने का आयात

सोना तेल के बाद भारत की सबसे बड़ी आयातित वस्तु है और व्यापार घाटे में बड़ा योगदान देता है। जुलाई में व्यापार घाटा करीब 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इस साल सबसे ज्यादा था। जुलाई तक चार महीनों में इन शिपमेंट का बिल साल भर पहले से 32% से ज्यादा बढ़ा। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच महीनों में दूसरी बार भारतीयों से सोना खरीदने से बचने और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील की। हालांकि अगस्त में आयात साल भर पहले के मुकाबले आधे से भी कम रहा।

शादी-त्योहार सीजन में कारोबार तेज

भारत में अनौपचारिक सोने का कारोबार लगभग हमेशा से रहा है, लेकिन जब आयात शुल्क 6% था तब सरकारी चैनल से बचने की कम वजह थी। नई बढ़ोतरी ने अनौपचारिक कारोबार को फिर जिंदा कर दिया। यह अब अक्टूबर के मध्य से शुरू होने वाले शादी और त्योहार सीजन से पहले खूब फल-फूल रहा है, जो मार्च की शुरुआत तक चलता है। चंदारिया कहते हैं, “आज की सोने की कीमतों पर थोड़ा-सा प्रतिशत अंतर भी रुपये में बड़ा खर्च अंतर बन जाता है।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN