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8वें वेतन आयोग से सिविलियन पेंशनर्स क्यों मांग रहे हैं ‘वन रैंक, वन पेंशन’?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • 8th Pay Commission: कर्मचारी संगठनों की मांग है कि अगर दो कर्मचारी एक ही पद या स्तर पर लगभग समान सेवा पूरी करके रिटायर हुए हैं, तो केवल रिटायरमेंट की तारीख अलग होने के कारण उनकी पेंशन में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए
  • अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा

8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने अपनी मांगें रखनी शुरू कर दी हैं। इनमें एक प्रमुख मांग वन रैंक, वन पेंशन (OROP) लागू करने की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि एक ही पद या स्तर से अलग-अलग समय पर रिटायर हुए केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए।

OROP क्या है?

वन रैंक, वन पेंशन यानी OROP का मूल उद्देश्य समान पद और समान सेवा अवधि वाले रिटायर्ड कर्मचारियों के बीच पेंशन की असमानता को कम करना है। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग वेतन आयोगों के दौरान रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन अलग हो सकती है। इसका कारण यह है कि समय के साथ सैलरी और पेंशन तय करने के नियम बदलते रहे हैं।

अभी किन लोगों को मिलता है OROP?

केंद्र सरकार ने 2015 में सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए OROP लागू किया था, जिसका वित्तीय लाभ 1 जुलाई 2014 से प्रभावी माना गया। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के लिए भी अलग पेंशन समानता व्यवस्था मौजूद है। अब कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इसी तरह की व्यवस्था केंद्र सरकार के लेवल 1 से 18 तक के नागरिक कर्मचारियों के लिए भी लागू की जाए।

पुराने वेतन आयोगों में भी उठी थी पेंशन समानता की बात

AIDEF के सी. श्रीकुमार के अनुसार, पुराने वेतन आयोगों ने भी पुराने और नए पेंशनर्स के बीच पेंशन के अंतर को कम करने की जरूरत पर चर्चा की थी। 5वें वेतन आयोग ने 1986 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन को 1 जनवरी 1986 के आधार पर वेतन तय करके अपडेट करने का सुझाव दिया था।

इसके लिए सेवारत कर्मचारियों पर लागू वेतन निर्धारण के फॉर्मूले को आधार बनाने की बात कही गई थी। आयोग ने यह भी सुझाव दिया था कि संबंधित पद के संशोधित वेतनमान के न्यूनतम वेतन का 50 फीसदी से कम पेंशन नहीं होनी चाहिए।

7वें वेतन आयोग ने भी पुराने और नए पेंशनभोगियों के बीच समानता को महत्वपूर्ण माना था और दोनों के बीच अंतर को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी।

कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से क्या चाहते हैं?

AIDEF का कहना है कि नोशनल फिक्सेशन यानी वेतन निर्धारण के जरिए पुराने पेंशनभोगियों को भी बाद के वेतन आयोगों के लाभ से जोड़ा जा सकता है। इसमें केवल पुराने वेतनमान को आधार बनाने के बजाय कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय के पद, स्तर और करियर प्रोग्रेशन को भी ध्यान में रखने की मांग की गई है।

संगठन का सुझाव है कि अगर किसी पद को बाद में अपग्रेड, रीक्लासिफाई या ऊंचे पे लेवल में शामिल किया जाता है, तो उस पद से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को भी संबंधित अपग्रेडेड दर्जा देने पर विचार किया जाए।

AIDEF OROP में कितनी पेंशन चाहता है?

AIDEF का सुझाव है कि पेंशन फिक्सेशन से तय किए गए पेंशन योग्य वेतन की 50 फीसदी होनी चाहिए। हालांकि, यह संबंधित पद या स्तर के लिए लागू न्यूनतम पेंशन और दूसरे कानूनी नियमों के अधीन होगी।

इसका पुराने पेंशनर्स पर क्या असर हो सकता है?

अगर 8वां वेतन आयोग नागरिक कर्मचारियों के लिए OROP या इसी तरह की पेंशन समानता व्यवस्था की सिफारिश करता है और सरकार उसे मंजूर करती है, तो अलग-अलग वेतन आयोगों के दौरान रिटायर हुए समान पद वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन का अंतर कम हो सकता है।

हालांकि, अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। अभी कर्मचारी संगठनों की यह एक मांग और प्रस्ताव है, इसे लागू व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN