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पर्सनल लोन लेते समय 7 गलतियां पड़ेंगी भारी! EMI छोटी दिखेगी, लेकिन जेब से जाएगा ज्यादा पैसा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Personal Loan Mistakes: अचानक पैसों की जरूरत पड़े तो पर्सनल लोन एक आसान रास्ता लगता है
  • बैंक या NBFC कितनी रकम देने को तैयार है, यह देखकर कई लोग तुरंत लोन ले लेते हैं

Personal Loan Mistakes: अचानक पैसों की जरूरत पड़े तो पर्सनल लोन एक आसान रास्ता लगता है। बैंक या NBFC कितनी रकम देने को तैयार है, यह देखकर कई लोग तुरंत लोन ले लेते हैं। लेकिन असली खेल लोन की रकम नहीं, बल्कि उसकी कुल लागत का है। ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, लंबा पीरियड, लेट पेमेंट और प्रीपेमेंट चार्ज जैसी शर्तें आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकती हैं। अगर आप भी पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं, तो इन 7 गलतियों से बचना जरूरी है।

1. सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेना

सबसे कम ब्याज दर वाला लोन हमेशा सबसे सस्ता हो, यह जरूरी नहीं है। बैंक या लेंडर प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज भी ले सकता है। इसलिए सिर्फ विज्ञापन में दिख रही ब्याज दर न देखें। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के तहत लेंडर्स को की-फैक्ट्स स्टेटमेंट (KFS) में लोन की सालाना कॉस्ट और लागू सभी चार्ज की जानकारी देनी होती है। यानी, आप पर्सनल लोन लेने से पहले अलग-अलग ऑफर की कुल लागत की तुलना जरूर करें।

2. जरूरत से ज्यादा पैसा उधार लेना

अगर बैंक आपको 8 लाख रुपये का पर्सनल लोन देने को तैयार है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको पूरी रकम लेनी ही चाहिए। जितना ज्यादा पैसा लेंगे, उतना ज्यादा ब्याज चुकाना होगा। पहले अपनी जरूरत तय करें और उसी हिसाब से लोन लें।

3. कम EMI के चक्कर में लंबी पीरियड चुनना

लंबे पीरियड से ईएमआई कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि आपको ज्यादा समय तक ब्याज देना पड़ेगा। छोटी पीरियड में ईएमआई अधिक होगी, लेकिन कुल ब्याज कम हो सकता है। इसलिए सिर्फ कम ईएमआई देखकर फैसला न करें।

4. प्रीपेमेंट और लोन बंद करने के चार्ज जानें

अगर भविष्य में बोनस या किसी अन्य सोर्स से बड़ी रकम मिलने की उम्मीद है और आप लोन जल्दी चुकाना चाहते हैं, तो पहले से पार्ट-पेमेंट और फोरक्लोजर यानी लोन समय से पहले खत्म करने के नियम समझ लें। अलग-अलग बैंक और लोन प्रोडक्ट में चार्ज और शर्तें अलग हो सकती हैं।

5. EMI लेट होने को मामूली समझना

ईएमआई में देरी सिर्फ पेनल्टी तक सीमित नहीं रह सकती। रिपेमेंट व्यवहार क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को रिपोर्ट किया जाता है। बार-बार पेमेंट में देरी आपके क्रेडिट प्रोफाइल को प्रभावित कर सकती है और भविष्य में लोन महंगा या मुश्किल हो सकता है।

6. एक साथ कई जगह लोन के लिए अप्लाई करना

इंस्टेंट अप्रूवल देखकर कई लेंडर्स के पास एक साथ अप्लाई करना सही रणनीति नहीं है। हर एप्लिकेशन पर क्रेडिट इन्क्वायरी हो सकती है। साथ ही कई ईएमआई का बोझ आपकी मौजूदा वित्तीय स्थिति को बिगाड़ सकता है।

7. डॉक्यूमेंट पढ़े बिना साइन करना

लोन लेने से पहले केएफएस, सेंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट जरूर पढ़ें। ब्याज या कुल लागत, ईएमआई, प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट चार्ज, प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर की शर्तों को अच्छी तरह समझें। पर्सनल लोन गलत वित्तीय फैसला नहीं है। गलती तब होती है जब आप सिर्फ यह देखते हैं कि हाथ में कितने रुपये आएंगे, बजाय इसके कि लोन खत्म होने तक कुल कितने रुपये वापस करने होंगे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN