Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका के टेनेसी में मौत की सजा पाई क्रिस्टा पाइक दो जहरीले इंजेक्शन लगने के बाद भी जिंदा बच गई। इसके बाद उसे इलाजे के लिए अस्पताल ले जाया गया है। जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
अमेरिका में एक टेनेसी राज्य से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मौत की सजा पाई एक महिला दो जहरीले इंजेक्शन लगाए जाने के बाद भी जिंदा बच गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। हत्या की दोषी पाई गई महिला कैदी क्रिस्टा पाइक के वकील ने बताया कि उसे जहरीले इंजेक्शन दे दिए गए थे। इसके बाद भी उसकी धड़कन चल रही थी। इसके बाद आखिरी समय में कानूनी टीम द्वारा एक आपातकालीन याचिका दायर की गई। इसमें कहा गया कि पाइक बेहोश हो गई है, लेकिन उनके खर्राटे सुनाई दे रहे हैं। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 50 वर्षीय पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो सिरिंज दी गई थीं। इसके बाद भी उनकी धड़कन नहीं रुकी। अब उनका इलाज किया जा रहा है।
टेनेसी की गवर्नर बिल ली ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “असल में क्या हुआ है। यह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि साल राज्य में होने वाली मौत की सजा अब योजना के मुताबिक नहीं दी जा सकती है।” गवर्नर के मुताबिक फिलहाल इस घटनाक्रम के बाद पाइक को घातक इंजेक्शन देने की सभी प्रक्रिया को रोक दिया गया है।
पाइक की कानूनी टीम ने क्या कहा पाइक की कानूनी टीम ने इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज रात टेनेसी राज्य एक बार फिर से कानूनी तौर पर मौत की सजा देने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा, “हमें इस मामले में सही साबित होने में कोई खुशी नहीं है। लेकिन पाइक ने जिन मुद्दों को उठाया था। वह सच साबित हुए हैं। इसमें नसों तक पहुंचने में दिक्कत, नसों का फट जाना और पेंटोबार्बिटल की खराब गुणवत्ता का होना शामिल था।
क्रिस्टा पाइक का क्या था अपराध?
बता दें, पचास वर्षीय पाइक को 1995 में अपनी 19 साल की सहपाठी कोलीन स्लेमर को प्रताड़ित करने और उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। इस हत्या ने पूरे देश का ध्यान खींचा था क्योंकि पीड़िता के शरीर पर पेंटाग्राम (पंचकोणीय तारा) उकेरा गया था। पाइक तब 18 साल की थी जब उसने और उसके प्रेमी तडारिल शिप ने, स्लेमर को नॉक्सविल के एक जंगली इलाके में बहला-फुसलाकर ले जाने के बाद उस पर हमला किया।
अभियोजकों के मुताबिक पाइक ने बॉक्स कटर से स्लेमर को काटा और उसकी पिटाई की, जबकि शिप ने उसके शरीर पर पेंटाग्राम उकेरने की बात स्वीकार की। पाइक को मौत की सजा सुनायी गयी जबकि शिप, जो उस समय 17 साल का था, को उम्रकैद की सजा मिली।
पाइक ने हत्या से कभी इनकार नहीं किया , हालांकि उनके वकीलों ने तर्क दिया कि जिन जूरी सदस्यों ने उन्हें मौत की सजा सुनायी, उन्होंने उसके बचपन में हुए गंभीर यौन शोषण एवं उपेक्षा के पूरे इतिहास के बारे में नहीं सुना। बाद में पाइक को बाइपोलर विकार और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस विकार होने का भी पता चला। बचाव पक्ष का कहना है कि अपराध के समय उनकी मानसिक स्थिति के लिए ये बातें अहम थीं।
बुधवार को होने वाली सजा-ए-मौत पर अमल से कुछ घंटे पहले ही उस पर अनिश्चितता के बादल छा गये थे। जहरीला इंजेक्शन दिये जाने के तय समय से लगभग एक घंटे पहले, अमेरिका का छठा सर्किट अपीलीय न्यायालय ने पाइक के वकीलों की दलीलों की जांच करने के लिए इस पर अस्थायी रोक लगा दी। इन दलीलों में यह सवाल भी शामिल था कि क्या बचपन में उसके साथ हुए दुर्व्यवहार से जुड़े सबूतों पर ठीक से विचार किया गया था।
टेनेसी के अटॉर्नी जनरल के ऑफिस ने तुरंत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दलील दी कि आखिरी समय में किए गए दखल को रद्द कर देना चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सजा-ए-मौत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया। जस्टिस सोनिया सोतोमयोर, एलेना कगन और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने असहमति व्यक्त की। जस्टिस सोतोमयोर ने कहा कि कहा कि इस फैसले से सजा-ए-मौत पर अमल करने की इजाजत मिल गयी, जबकि दोषी ठहराये जाने के खिलाफ उनकी कानूनी आपत्तियों पर अभी ठीक से विचार होना बाकी है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




