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रूस की लैब में प्लेग से मौत के बाद अफरा-तफरी, निगरानी में रखे गए हैं 200 लोग; कितना खतरनाक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में लैब में काम करने वाली एक महिला शोधकर्ता की प्लेग से मौत हो गई है। घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लगभग 200 लोगों को मेडिकल निगरानी और आइसोलेशन में रखा है।

रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में लैब में काम करने वाली एक महिला शोधकर्ता की प्लेग से मौत हो गई है। घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लगभग 200 लोगों को मेडिकल निगरानी और आइसोलेशन में रखा है। ‘द मॉस्को टाइम्स’ और रूसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बुरियाटिया गणराज्य के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने महिला की मौत का कारण प्लेग होने की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों में आशंका जताई जा रही है कि महिला न्यूमोनिक प्लेग से पीड़ित थी, जो प्लेग का सबसे घातक रूप माना जाता है।

कौन थी मरने वाली महिला

मृतक महिला की पहचान डारिया(27साल) के रूप में हुई है। वह इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में कार्यरत थी। 29 सितंबर को उसे गंभीर निमोनिया के लक्षणों के साथ इरकुत्स्क के पास शेलेखोव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। एक अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने मेडिकल स्टाफ को बताया था कि सैंपल इकट्ठा करते समय गलती से उससे जिंदा बैक्टीरिया वाली एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। यह जानकारी टेलीग्राम चैनल पर दी गई है, अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

इमरजेंसी बैठक बुलाई गई

एक अन्य दावे के मुताबिक यह भी दावा किया जा रहा है कि महिला बुरियाटिया के आधिकारिक दौरे से लौटी थी। यहां मंगोलिया सीमा के पास प्लेग का प्रकोप रिपोर्ट किया गया था। इरकुत्स्क के प्रांतीय अधिकारियों ने शुरुआत में इसे केवल अत्यंत खतरनाक संक्रमण करार दिया था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए महिला के संपर्क में आए डॉक्टरों, अस्पताल के कर्मचारियों और अन्य लोगों सहित करीब 200 लोगों को एहतियातन निगरानी में रखा गया है। आपात बैठक के बाद इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर लोबजेव ने कहा कि संपर्क में आए लोगों में फिलहाल बीमारी के लक्षण नहीं हैं और उनकी शुरुआती लैब रिपोर्ट नेगेटिव आई है। फिलहाल सभी लोगों को निगरानी में रखा गया है।

रेन टीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि महिला के संपर्क में आए लोगों को दो अस्पतालों में भर्ती कराया गया और 12 लोगों को निगरानी के लिए एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट भेजा गया। इनमें से कुछ लोगों में बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन अभी तक संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्लेग ‘येर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु से होता है, जो आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है।’येर्सिनिया पेस्टिस’ से संक्रमित लोगों में अक्सर एक से सात दिनों के बाद लक्षण दिखाई देते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN