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एनर्जी ड्रिंक लेबल पर FSSAI से भिड़ गई Reliance, कोर्ट के आदेश से बदल गया पूरा गेम!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट को कैंपा के एनर्जी ड्रिंक प्रोडक्ट पर “Energy Drink” Label इस्तेमाल करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है
  • कोर्ट ने FSSAI के उस निर्देश पर फिलहाल रोक लगाई, जिसके तहत हाई-कैफीन बेवरेज पर इस लेबल के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी

रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट को कैंपा के एनर्जी ड्रिंक प्रोडक्ट पर “Energy Drink” Label इस्तेमाल करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत।

रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Reliance Consumer Products) को अपने कैंपा (Campa) ब्रांड के एनर्जी ड्रिंक (Energy Drink) को लेकर FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के साथ चल रहे विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार 6 अक्टूबर को कोर्ट ने कंपनी को फिलहाल कैंपा (Campa) के कुछ उत्पादों पर एनर्जी ड्रिंक (Energy Drink) शब्द का इस्तेमाल जारी रखने की अनुमति दी। इसके साथ ही पेप्सिका (PepsiCo) और मॉन्सटर बेवरेज (Monster Beverage) को लेकर भी FSSAI के इसी आदेश पर रोक लगा दी गई है।

क्या है मामला?

यह मामला FSSAI के 30 जून के उस निर्देश से जुड़ा है, जिसमें ज्यादा कैफीन (Caffeine) वाले पेय पदार्थों को एनर्जी ड्रिंक के तौर पर बेचने या इस तरह लेबल करने पर आपत्ति जताई गई थी। रिलायंस (Reliance) ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि इससे उसके कारोबार पर असर पड़ा है और पहले से तैयार बड़े पैमाने पर इंवेंटरी और पैकेजिंग बेकार होने का खतरा पैदा हो गया है।

रिलायंस को पहले नोटिस क्यों नहीं दिया?

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI से सवाल किया कि रिलायंस (Reliance) के खिलाफ आदेश जारी करने से पहले कंपनी को नोटिस क्यों नहीं दिया गया। कोर्ट ने रेगुलेटर (Regulator) से कहा कि गलती को सुधारने में अभी भी देर नहीं हुई है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी। पेप्सिको (PepsiCo) और मॉन्सटर बेवरेज (Monster Beverage) की याचिकाओं पर भी कोर्ट में सुनवाई होनी है।

रिलायंस (Reliance) ने कोर्ट को बताया कि उसके पास करीब 16.8 करोड़ तैयार कैंस और 12 करोड़ प्लास्टिक बॉटल्स (Plastic Bottles) मौजूद हैं, जिन पर एनर्जी ड्रिंक (Energy Drink) लेबल लगा हुआ है। इसके अलावा करीब 40 करोड़ कैंस और 36 करोड़ बॉटल्स के लिए पैकेजिंग पहले ही प्रिंट हो चुकी है। कंपनी का कहना है कि FSSAI की कार्रवाई के बाद कुछ राज्यों में उसका स्टॉक जब्त किया गया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को प्रभावित प्रोडक्ट हटाने के निर्देश भी दिए गए।

रेड बुल को पहले ही मिल चुकी है राहत

इस विवाद में रिलायंस अकेली कंपनी नहीं है। पेप्सिको (PepsiCo) और मॉन्सटर बेवरेज (Monster Beverage) ने भी पिछले सप्ताह FSSAI के 30 जून के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। वहीं, रेड बुल (Red Bull) को पहले ही कोर्ट से राहत मिल चुकी है और उसे अपने प्रोडक्ट (Products) पर एनर्जी ड्रिंक (Energy Drink) शब्द का इस्तेमाल जारी रखने की अनुमति है।

क्यों अहम है यह पूरा विवाद?

इस मामले की जड़ में यह सवाल है कि कैफीन (Caffeine) वाले पेय पदार्थों को कंपनियां किस नाम से मार्केट कर सकती हैं और कंज्यूमर्स के सामने उनकी पहचान किस तरह पेश की जा सकती है। FSSAI की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब देश में फूड सेफ्टी (Food Safety) से जुड़े नियमों के पालन को लेकर निगरानी और इंफोर्समेंट बढ़ाई जा रही है।

फिलहाल, दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम राहत से रिलायंस (Reliance), पेप्सिको (PepsiCo) और मॉन्सटर (Monster) को अपने प्रोडक्ट (Products) की बिक्री और मार्केटिंग (Marketing) को लेकर तत्काल राहत मिली है। हालांकि, अंतिम फैसला अभी बाकी है। 5 नवंबर की सुनवाई में इस विवाद की आगे की दिशा साफ होने की उम्मीद है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN