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‘उम्मीदें इतनी और वो कर कुछ नहीं पाता’, ईश्वर के अस्तित्व पर क्या बोले जावेद अख्तर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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Javed Akhtar on Atheism: जावेद अख्तर ने हाल ही में एक इंटरव्यू में धर्म, विश्वास और नास्तिकता पर बात की। उन्होंने बताया कि लोग धर्म में सिर्फ इसलिए मानते हैं क्योंकि लोगों को उससे सुकून मिलता है। 

बॉलीवुड के दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने हाल ही में धर्म, विश्वास और नास्तिकता को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि लोग ऊपर वाले पर सिर्फ इसलिए विश्वास करते हैं क्योंकि लोगों को उससे उम्मीद मिलती है। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है आप ये मान लीजिए कि एलन मस्क आपका भाई है। वो आपको अगले महीने दो-चार बिलियन डॉलर भेजने वाला है। उन्होंने कहा कि ये मानोगे तो ज्यादा अच्छा लगेगा, कम से कम एलन मस्क है तो।

जावेद अख्तर को याद दिलाई गई स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के साथ उनकी बहस

इंडियन एक्सप्रेस हिंदी से खास बातचीत में जावेद अख्तर ने धर्म, विश्वास और नास्तिकता को लेकर बात की। जावेद अख्तर को इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के साथ हुई उनकी बहस याद दिलाई गई। उस बहस के दौरान मुफ्ती शमाइल नदवी ने कंटिंजेंसी शब्द का इस्तेमाल किया था। जावेद अख्तर ने कहा था कि वो इस शब्द के मायने नहीं समझते हैं। इसके बाद मुफ्ती शमाइल ने उन्हें इस शब्द का मतलब समझाया था।

एक्सप्रेस से खास बातचीत के दौरान जावेद अख्तर से पूछा गया कि क्या अब वो कंटिंजेंसी का मतलब समझ गए हैं? जावेद अख्तर ने कहा, “जी-जी। हर चीज की कंटिंजेंसी होती है लेकिन वो बात सही नहीं है। मिसाल के तौर पर अगर जमीन में गुरुत्वाकर्षण है तो उसकी कंटिंजेंसी क्या है? अगर लाइट की स्पीड है 1 लाख 80 हजार मील सेकेंड तो इसकी कंटिंजेंसी क्या है? कुछ चीजे हैं जिनकी कंटिंजेंसी नहीं है। इन चीजों को फिजिक्स में ब्रूट फैक्ट्स कहते हैं।”

धर्म और आस्था पर क्या बोले जावेद अख्तर?

इसके बाद जावेद अख्तर धर्म के बारे में बात करते नजर आए। उन्होंने कहा, “मेरा सिंपल लॉजिक है। इन सभी धर्मों का मानना है कि एक शक्ति है जो हर जगह मौजूद है और पूरी ताकत से मौजूद है। ऐसा नहीं है कि पत्ता उसकी मर्जी के खिलाफ हिल जाए। ये बात ठीक नहीं लगती मुझे, क्योंकि बहुत सारे पत्ते बहुत अलग हिल रहे हैं। तो मैं ये नहीं मानना चाहता कि अगर वाकई कोई है तो इतने सारे पत्ते इतने गलत तरीके से हिल रहे हैं और वो देख रहा है?”

अपनी बात को समझाते हुए गीतकार ने कहा कि बाढ़, भूकंप जैसी आपदा में इतने लोग मर जाते हैं तो क्या ये सब गुनहगार थे? इनके साथ ऐसा क्यों हुआ? कितने लोग अपराध की वजह से मारे जाते हैं और वो जो सबसे ज्यादा ताकतवर है, वो बैठकर तमाशा देख रहा है? उन्होंने कहा कि ईश्वर से उम्मीदें इतनी हैं और कर वो कुछ नहीं कर पाता है।

खराब हालत वाले देशों में होती है सबसे ज्यादा दुआ: जावेद अख्तर

जावेद अख्तर ने कहा, “दुनिया में जो सबसे ज्यादा खराब हालत में देश हैं, वहीं सबसे ज्यादा दुआ होती है। वहीं, सबसे ज्यादा प्रार्थना की जाती है। जो देश समृद्ध हैं वहां नहीं होती हैं इतनी प्रार्थनाऔर दुआ।”

क्यों ईश्वर में आस्था रखते हैं लोग?

जावेद अख्तर से पूछा गया कि उन्हें फिर क्यों लगता है कि इन सबके बावजूद भी लोग किसी न किसी आस्था से बंधे हुए हैं? उन्होंने कहा- ये उन्हें उम्मीद देता है कि शायद कभी कुछ मिल जाए एक सहारा, एक झूठा सहारा। तसल्ली तो ही है न, आदमी सोचता है कि चलो कोई तो है। तो इससे बड़ी तसल्ली मैं तुम्हें बता देता हूं कि क्या करो? तुम ये मानो कि ये जो एलन मस्क है ये मेरा भाई है, दिल से मानो। अगले महीने ये मुझे दो-चार बिलियन डॉलर भेजने वाला है मुझे और अगले महीने-अगले महीने करते रहो। कितनी तसल्ली होगी अगर आपको लगे कि एलन मस्क आपका भाई है। ये ज्यादा अच्छा है। कम से कम एलन मस्क है तो।”

नास्तिकता को लेकर क्या बोले जावेद अख्तर?

जावेद अख्तर से जब नास्तिकता पर सवाल हुआ तो उन्होंने कहा, “जो धार्मिक आदमी है जो किसी पर आस्था रखता है, वो किसी आदमी पर भरोसा करता है। जो उसके मां-बाप ने बोला उस पर करता है भरोसा या कोई संत मिल जाता है तो उस पर करता है। आजकल तो अपने बहुत कूल किस्म के हैं गुरू, उनमें से कोई मिल जाता है। तो उस पर भरोसा करता है। हमारा (नास्तिकता) किस्सा अलग है। हम आदमी पर भरोसा नहीं करते हैं। हम बात पर भरोसा करते हैं। हमें लॉजिक और कारण पर भरोसा है। वो इंसान पर भरोसा करते हैं। 99 पर्सेंट लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें वो पैदा होते हैं।”

लेखक ने कहा, “दुनिया में 10 बड़े धर्म हैं और ये कहना कि सब एक हैं, ये बेकार बात है। सब अलग-अलग हैं। तो अगर तुम किसी भी धर्म को मानते हो तो 10 पर्सेंट है कि तुम ठीक हो और 90 पर्सेंट है कि तुम गलत हो। अगर तुम नास्तिक हो जाओगे तो 50-50 पर्सेंट चांस है कि आप गलत या सही हो।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN