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GQG पार्टनर्स ने बेच दिए अडानी ग्रुप के ₹21000 करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी, आज शेयरों पर रखें नजर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Adani Group Stocks: GQG पार्टनर्स ने सितंबर 2026 तिमाही में अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी करीब 8,000 करोड़ रुपये घटाई है
  • जनवरी से जून 2026 के दौरान भी फर्म ने अडानी ग्रुप के शेयरों में लगभग 13,200 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी घटाई थी

अडानी ग्रुप के शेयरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। अमेरिकी निवेश फर्म GQG पार्टनर्स ने सितंबर 2026 तिमाही में अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी करीब 8,000 करोड़ रुपये घटाई है। इससे पहले जनवरी से जून 2026 के दौरान भी फर्म ने अडानी ग्रुप के शेयरों में लगभग 13,200 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी घटाई थी। इस तरह GQG पार्टनर्स ने जनवरी से सितंबर के बीच कुल 21000 करोड़ रुपये से अधिक की हिस्सेदारी बेच चुका है।

हिंडनबर्ग संकट के समय राजीव जैन बने सहारा

यह वही फर्म है, जिसने 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के बाद हुई बिकवाली के दौरान उसने अडानी ग्रुप की कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी। राजीव जैन की शुरू की गई और 156 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति मैनेज करने वाली इस फ़र्म ने 2023 में तब काफी ध्यान खींचा।

द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, GQG Partners की अडानी ग्रुप की कंपनियों में हिस्सेदारी का मार्केट वैल्यू सितंबर के अंत में घटकर करीब 39,270 करोड़ रुपये रह गया, जो जून तिमाही के अंत में लगभग 47,290 करोड़ रुपये था। हालांकि, निवेश की मार्केट वैल्यू में बदलाव को पूरी तरह शेयरों की बिक्री नहीं माना जा सकता, क्योंकि शेयर कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी इस पर असर पड़ता है।

अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में सबसे बड़ी कटौती

सितंबर तिमाही में GQG Partners ने अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी घटाई। कंपनी में फर्म की हिस्सेदारी जून के 4.14% से घटकर सितंबर में 1.71% रह गई।इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अडानी पावर समेत अन्य कंपनियों में भी GQG की हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई। जनवरी से जून के बीच अडानी एंटरप्राइजेज में सबसे बड़ी अनुमानित कटौती हुई थी, जिसकी वैल्यू करीब 6,375 करोड़ रुपये बताई गई थी।

विदेशी निवेशकों का रुख सभी शेयरों में एक जैसा नहीं

GQG पार्टनर्स की बिकवाली के बावजूद अडानी ग्रुप की सभी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी नहीं घटी। सितंबर तिमाही के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। अडानी टोटल गैस में भी विदेशी निवेश बढ़ा। इसके विपरीत, अडानी पावर, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में गिरावट आई।

म्यूचुअल फंडों का रुख भी मिला-जुला रहा। उन्होंने अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अंबुजा सीमेंट्स में हिस्सेदारी घटाई, जबकि अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी पावर और अडानी ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाया।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

GQG Partners की लगातार हिस्सेदारी घटाने की रणनीति अडानी ग्रुप के शेयरों पर आज बाजार की नजर रहेगी। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय नतीजों, कर्ज, नकदी प्रवाह, शेयरों के मूल्यांकन और ताजा शेयरहोल्डिंग पैटर्न को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए। केवल किसी बड़े निवेशक की खरीद-बिक्री के आधार पर शेयर खरीदना या बेचना जोखिम भरा हो सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN