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SC से यस बैंक को तगड़ा झटका, एक झटके में 20% तक टूटा शेयर, ₹17 के नीचे भाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करने के मामले में यस बैंक को सु्प्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है
  • इस खबर के बीच यस बैंक के शेयर 20 पर्सेंट तक टूट गए

Yes Bank share: निजी क्षेत्र के यस बैंक को सु्प्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें बैंक के 8415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ (बट्टे खाते में डालने) करने के फैसले को रद्द कर दिया गया था। इस फैसले से यस बैंक के शेयर क्रैश हो गए। सप्ताह के चौथे दिन बीएसई पर बैंक के शेयर 20 पर्सेंट तक टूटकर 16.98 रुपये के निचले स्तर पर आ गए। यह शेयर के 52 हफ्ते का नया लो है। इससे पहले, बीएसई पर 52 हफ्ते का लो 17.19 रुपये था।

क्या कहा कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है। बेंच ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि इस फैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं है। सभी अपीलें खारिज की जाती हैं।” दरअसल, ये मामला उन निवेशकों से जुड़ा है, जिनके AT-1 बॉन्ड मार्च 2020 में यस बैंक के पुनर्गठन के दौरान पूरी तरह राइट-ऑफ कर दिए गए थे। बॉन्डधारकों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जनवरी 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बैंक को झटका देते हुए फैसले को रद्द कर दिया। इससे बॉन्डधारकों को राहत मिली लेकिन इसके बाद यस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

दोनों पक्षों ने क्या तर्क दिए?

केंद्र, वित्त मंत्रालय, RBI और यस बैंक की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि बैंक की पूंजी को फिर से बनाने और उसे बचाने के लिए इन बॉन्ड को राइट-ऑफ करना जरूरी था। उन्होंने कहा था कि भारतीय बैंकों में करीब ₹1.81 लाख करोड़ के AT-1 बॉन्ड बकाया हैं।

ऐसे बॉन्ड की नुकसान सहने की क्षमता कमजोर होने से बैंकिंग व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, Axis ट्रस्ट सर्विसेज और अन्य बॉन्डधारकों की ओर से दलील दी गई कि बैंक के प्रशासक ने एकतरफा फैसला लेकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कदम उठाया। बॉन्डधारकों का कहना था कि राइट-ऑफ की कार्रवाई पुनर्गठन योजना और तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार नहीं की गई थी।

AT-1 बॉन्ड और यस बैंक

एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड की बात करें तो बैंकों के लिए पूंजी जुटाने का एक माध्यम हैं। वैश्विक वित्तीय संकट के बाद लागू बैंकिंग सुधारों और Basel III नियमों के तहत इनका इस्तेमाल बैंकों की पूंजी मजबूत करने के लिए किया जाता है। इन बॉन्ड की कोई निश्चित मैच्योरिटी अवधि नहीं होती। निवेशकों को आम तौर पर इन पर ब्याज मिलता है लेकिन इनमें सामान्य बॉन्ड की तुलना में ज्यादा जोखिम होता है। बैंक के गंभीर वित्तीय संकट में पहुंचने या तय नियामकीय शर्तें पूरी होने पर इन बॉन्ड को पूरी तरह या आंशिक रूप से राइट-ऑफ किया जा सकता है अथवा शेयरों में बदला जा सकता है। यस बैंक के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

दरअसल, बढ़ते बैड लोन, गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं और लिक्विडिटी के भारी दबाव के कारण यस बैंक का संकट गहरा गया था। मार्च 2020 में RBI ने बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थीं। इसके बाद एसबीआई की अगुवाई में बैंक के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी के तहत 14 मार्च 2020 को 8,415 करोड़ रुपये मूल्य के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ (बट्टे खाते में डालना) कर दिया गया। इसी के बाद यह मामला कोर्ट में पहुंच गया। अब बॉन्डधारकों को बड़ी जीत मिली है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN