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रोज़ घर पहुंच रहे ‘आईफ़ोन, फ़्रिज और टीवी’ जैसे 40 पार्सल, फिर भी इन्फ़्लुएंसर को क्यों जाना पड़ा विदेश?

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Source :- BBC INDIA

सोशल मीडिया यूज़र्स की ओर से लगातार भेजे जा रहे पार्सलों के कारण इन्फ़्लुएंसर वीरमणि को अपना घर छोड़ना पड़ा है.

केरल जाने के लिए अपने फ़ॉलोअर्स से मदद मांगने वाले एक इन्फ़्लुएंसर को अपना घर छोड़ना पड़ा है. जबकि आईफ़ोन, फ़्रिज और टीवी सहित उनके घर हर रोज़ क़रीब 40 पार्सल आ रहे हैं.

दरअसल, मदुरै के इंस्टाग्राम इन्फ़्लुएंसर वीरमणि ने सोशल मीडिया पर अपने घर का पता और फ़ोन नंबर सार्वजनिक कर दिया था. इसके बाद उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं.

उनकी पत्नी सुमंगली वीरमणि कहती हैं, “हमारे घर हर दिन कम से कम 30 से 40 बार लोग ‘कैश ऑन डिलीवरी’ वाला सामान लेकर आ रहा हैं. यहां तक कि दरवाज़ा खोलने में डर लगने लगा है. सोशल मीडिया पर लोगों की ओर से बनाए जा रहे दबाव के कारण पति विदेश चले गए हैं.”

उनकी पत्नी दुखी होकर कहती हैं, “वह घर लौटने से डर रहे हैं. पड़ोसी भी उनसे नाराज़ हैं.” किसी ने उनकी किडनी दान के लिए भी फ़ोन नंबर सार्वजनिक कर दिया है.

मदुरै के रहने वाले वीरमणि सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हैं. इंस्टाग्राम पर उनके तीन लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं.

वीरमणि ने अपने एक वीडियो में फ़ोन नंबर देते हुए केरल जाने के लिए फ़ॉलोअर्स से मदद मांगी थी.

इसके बाद उन्होंने एक और वीडियो पोस्ट करके बताया कि उन्हें छह हज़ार रुपये मिले हैं.

फिर कुछ फ़ॉलोअर्स ने उनसे पूछा कि अगर वह अपने घर का पता दे दें, तो वे उन्हें गिफ़्ट भी भेज सकते हैं.

इसके बाद वीरमणि ने मदुरै में अपने घर का पता सार्वजनिक कर दिया.

उनकी पत्नी सुमंगली ने बीबीसी को बताया, “उसी दिन से हमारे घर सामान आने लगा. लेकिन हर चीज़ ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर भेजी जा रही थी. इसकी वजह से हम मुश्किल में पड़ गए.”

वह कहती हैं, “आईफ़ोन 17, टेलीविज़न, फ़्रिज, वॉशिंग मशीन, फ़र्नीचर और कपड़ों से लेकर किराने के सामान तक, लाखों रुपये की चीज़ें भेजी जा रही हैं.”

“कुछ दिन पहले किसी ने ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर 20 किलो बिरयानी भी भेज दी थी.”

इसके बाद वीरमणि ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया.

उन्होंने वीडियो में कहा, “मेरे घर लगातार सामान आ रहा है. सामान लेकर आने वाले डिलीवरी कर्मचारियों को समझाना भी मेरे लिए मुश्किल हो गया है.”

“कृपया मेरे लिए कोई सामान ऑर्डर न करें.”

‘किडनी दान के लिए भी नंबर सार्वजनिक कर दिया’

वीरमणि ने सोशल मीडिया पर केरल जाने के लिए लोगों से मदद मांगी थी.

एक अन्य वीडियो में उन्होंने कहा, “वे ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर सामान भेज रहे हैं. उन्होंने किडनी दान के लिए भी मेरा नंबर दे दिया है.”

“इसी वजह से मैं विदेश जा रहा हूं. कृपया कोई सामान न भेजें.”

‘100 से ज़्यादा पार्सल आ चुके हैं’

हालांकि, वीरमणि की पत्नी सुमंगली का कहना है कि ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर उनके घर सामान आना अब भी जारी है.

वह कहती हैं, “मेरे पति अभी तक मदुरै नहीं लौटे हैं. उन्हें घर आने से डर लगता है.”

“घर पर सामान लेकर आने वाले डिलीवरी एजेंट ओटीपी मांगते हैं. लेकिन हमें यह तक नहीं पता कि सामान कौन भेज रहा है.”

“मैं उन्हें यही बात बताती हूं. कुछ लोग समझ जाते हैं, जबकि कुछ ग़ुस्सा होकर झगड़ा करने लगते हैं. इसकी वजह से मुझे घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है.”

इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हैं वीरमणि

सुमंगली के मुताबिक़, वीरमणि पहले मदुरै की एक निजी कंपनी में काम करते थे.

वह कहती हैं, “अब वह बेरोज़गार हैं. वह लगातार इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते रहते थे. मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी समस्या खड़ी हो जाएगी.”

“इस परेशानी की वजह से मकान मालिक और पड़ोसी भी नाराज़ हैं. हम जल्द ही यह घर ख़ाली कर देंगे.”

एक निजी डिलीवरी कंपनी के कर्मचारी अरुण के मुताबिक़, वीरमणि के नाम पर 100 से ज़्यादा पार्सल आए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक पहुंचाया नहीं गया है. अरुण उनका बदला हुआ नाम है.

वह कहते हैं, “हम जो ‘कैश ऑन डिलीवरी’ वाले ऑर्डर लेकर जाते हैं, उनके वापस आने से हमारे काम पर असर पड़ता है.”

“उन्हें पहुंचाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है और पेट्रोल का ख़र्च भी होता है.”

“जब एक ही दिन में वीरमणि के घर के पते पर 30 से 40 चीज़ें पहुंचानी हों, तो कर्मचारी यह काम लेने से इनकार कर देते हैं या इससे बचने की कोशिश करते हैं.”

मकान मालिक सहित पड़ोसी भी नाराज़

वीरमणि के परिवार के मुताबिक़, किसी ने ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर 20 किलो बिरयानी भी भेज दी थी.

वीरमणि की पत्नी कहती हैं कि “मकान मालिक और पड़ोसियों समेत सभी लोग बहुत नाराज़ हैं. अब हमें घर ख़ाली करना पड़ेगा. वो दूसरों को सलाह देती हैं कि कृपया अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक न करें.”

पिछले कुछ दिनों से अमेज़ॉन, स्विगी और फ़्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन ऐप के ज़रिए घर का सामान, खाने-पीने की चीज़ें और दूसरे उत्पाद वीरमणि के घर पहुंचाए जा रहे हैं.

सोशल मीडिया यूज़र्स ये सभी चीज़ें ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर भेज रहे हैं. वीरमणि का परिवार इन्हें स्वीकार नहीं कर रहा, क्योंकि उनके पास इनकी क़ीमत चुकाने की क्षमता नहीं है.

सुमंगली वीरमणि कहती हैं, “कोई न कोई सामान पहुंचाने के लिए लगातार दरवाज़ा खटखटाता रहता है. अब तो दरवाज़ा खोलने में भी डर लगता है.”

“हम कहते हैं कि यह सामान हमने नहीं मंगाया है, फिर भी वे हमारी बात नहीं सुनते. इसी वजह से मेरे पति विदेश चले गए.

डेटा प्राइवेसी का सवाल, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और वकील बालू कहते हैं, “सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के लिए लोग बिना सोचे-समझे ऐसे काम कर देते हैं. आज की ऑनलाइन दुनिया में अनजाने में सार्वजनिक की गई छोटी से छोटी जानकारी भी गंभीर अपराध की वजह बन सकती है.”

वह कहते हैं, “ऐसी समस्याओं की एक वजह यह है कि लोगों को डेटा प्राइवेसी यानी अपनी जानकारी को निजी रखने और उसके सार्वजनिक होने के असर के बारे में पूरी समझ नहीं है.”

“किसी को ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर लगातार लाखों रुपये का सामान भेजना मानसिक रूप से परेशान करना है.”

बालू कहते हैं, “इसे रोकने के लिए पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. हालांकि, केवल केस दर्ज कराने से ऐसे ऑर्डर पूरी तरह बंद नहीं होंगे.”

“लेकिन शिकायत के ज़रिए यह पता लगाया जा सकता है कि ये पार्सल किसने भेजे हैं.”

ऑनलाइन फ़ैक्ट चेकिंग के विशेषज्ञ मुरलीकृष्णन चिन्नादुरई कहते हैं, “इस तरह सार्वजनिक रूप से अपने घर का पता और फ़ोन नंबर देने से पैसों की धोखाधड़ी हो सकती है.”

“इस जानकारी का इस्तेमाल करके फ़र्ज़ी पहचान पत्र भी बनाए जा सकते हैं.”

वह कहते हैं, “हम कौन सी जानकारी किसके साथ साझा करते हैं, यह बहुत मायने रखता है. हमें यह भी तय करना चाहिए कि हम किस मक़सद से जानकारी दे रहे हैं और उसका इस्तेमाल उसी मक़सद के लिए हो रहा है या नहीं.”

“सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी ज़रूरत से ज़्यादा सार्वजनिक करने से कई तरह का नुक़सान हो सकते हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर क्या बताना है और क्या नहीं, इसे लेकर ख़ुद पर नियंत्रण रखना ज़रूरी है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS